- मोदी कैबिनेट में फिलहाल फेरबदल की अटकलों को बीजेपी सूत्रों ने खारिज कर दिया है
- बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता मॉनसून सत्र की तैयारी है, इसके बाद फेरबदल की संभावना है
- अगले साल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनके आधार पर मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावना बनी रहेगी
मोदी कैबिनेट में जल्द ही फेरबदल की अटकलों को बीजेपी सूत्रों ने खारिज किया है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू होने वाला मॉनसून सत्र है. हालांकि इसके बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. दरअसल प्रधानमंत्री मोदी मॉनसून सत्र से पहले 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर जा रहे हैं.वैसे भी मोदी 3.0 में अभी तक मंत्रिपरिषद में कोई फेरबदल नहीं हुआ है. जबकि तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो चुके हैं. हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना जताई जा रही है.
एनडीए को समर्थन देने वाले ये दल कर सकते हैं दावा
सबसे बड़ा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में हुआ, जहां तृणमूल कांग्रेस के 20 लोक सभा सांसद टूट कर अलग हो गए और उन्होंने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है. इस तरह वे अब एनडीए में बीजेपी के बाद दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बन गए हैं. उनसे कम संख्या वाले टीडीपी और जेडीयू का एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री है. ऐसे में संभावना है कि अगर यह धड़ा सरकार में शामिल होने का फैसला करता है तो उसका दावा भी एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद पर बनेगा.
हालांकि सवाल ये भी है कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए क्या बीजेपी यह जोखिम मोल लेगी क्योंकि दो महीने पहले पार्टी राज्य में इन्हीं नेताओं के खिलाफ तीखी राजनीतिक लड़ाई लड़ रही थी. जनधारणा न बदले, इसलिए बीजेपी ने बाद में इस धड़े से दूरी बनाई और बजाए बीजेपी में विलय के उन्होंने एक गुमनाम दल एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना.
कैबिनेट मंत्री पद पर ये लोग भी कर सकते हैं दावा
दूसरा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम महाराष्ट्र में हुआ है, जहां शिवसेना यूबीटी के छह सांसद शिवसेना शिंदे में विलय कर रहे हैं. माना जा रहा है कि यह संख्या सात तक पहुंच सकती है. ऐसे में शिवसेना की ताकत बढ़ कर 13-14 हो जाएगी और उसका भी एक कैबिनेट मंत्री पद पर दावा बनेगा. अभी उसके पास केवल एक राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार है.
इससे पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. सवाल है कि क्या पंजाब विधानसभा चुनाव देखते हुए इनमें से किसी को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलेगी. जिस तरह से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की हाल की पंजाब यात्रा के दौरान राघव चड्ढा की खातिरदारी की गई उससे इन अटकलों को बल मिला है. पंजाब से ही आने वाले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को इस बार राज्य सभा भेजा गया है. पंजाब से अभी रवनीत सिंह बिट्टू राज्य मंत्री हैं, उनका राज्य सभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया पर वे अभी मंत्रिपरिषद में बने हुए हैं. माना जा रहा है कि उन्हें पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है.
खत्म हो रहा इन मंत्रियों का कार्यकाल
वहीं एक अन्य राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया. केरल बीजेपी के नेता कूरियन मोदी मंत्रिपरिषद के अकेले ईसाई मंत्री थे और वे मध्य प्रदेश से राज्य सभा के सांसद थे. उनका राज्य सभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था और पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्य सभा नहीं भेजने का फैसला किया था.
इसी तरह नवंबर में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्य मंत्री बी एल वर्मा का राज्य सभा कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. ये दोनों उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं, जहां अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में पार्टी को यह भी फैसला करना है कि उन्हें दोबारा राज्य सभा भेजा जाए या नहीं. इनका मंत्रिपरिषद में बने रहना भी इसी बात पर निर्भर करेगा.
कुछ राज्यपालों का कार्यकाल भी हो रहा खत्म
दो अन्य राज्य मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा, को क्रमशः यूपी और दिल्ली में राज्य बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत यह भी इस्तीफा दे सकते हैं. हालांकि सूत्रों का इशारा है कि विधानसभा चुनाव देखते हुए पंकज चौधरी मंत्रिपरिषद में बने रहे सकते हैं, ताकि कुर्मी समाज को संदेश दिया जा सके. इसी तरह कुछ राज्यपालों का कार्यकाल भी अगले महीने समाप्त होने जा रहा है. कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने वाला है. जबकि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है, ऐसे में नए राज्यपालों की नियुक्ति की भी चर्चा है.
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिपरिषद विस्तार में अगले साल होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखा जाएगा. अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है. वैसे तो अभी उत्तर प्रदेश से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व पहले से ही है. लेकिन प्रदर्शन के आधार पर कुछ फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अभी उत्तर प्रदेश से कोई ब्राह्मण कैबिनेट मंत्री नहीं है. साथ ही, दलित और अति पिछ़ड़े वर्ग की भी नुमाइंदगी बढ़ाई जा सकती है.
मंत्रिपरिषद में फेरबदल के साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का भी गठन होना है. ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है, जबकि संगठन से कुछ नेता मंत्रिपरिषद में लाए जा सकते हैं.
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