- भारत सरकार ने खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की आवश्यकता लगभग 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी है, पर्याप्त स्टॉक मौजूद
- यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक एलएनजी और अन्य कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद उत्पादन प्रभावित हुआ है
- सरकार के उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए राज्यों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से देश भर के फर्टिलाइजर प्लांट्स में गैस की सप्लाई मुहैया कराने की कवायद में जुटी भारत सरकार ने साफ किया है कि जून से शुरू हो रहे खरीफ सीजन 2026 के दौरान देश में जरूरत के मुताबिक, उर्वरक का स्टॉक मौजूद है. कृषि मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी मनिंदर कौर द्विवेदी ने बताया कि राज्यों के साथ बातचीत कर खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, जिसमें से 180 लाख मीट्रिक टन (46%) शुरुआती स्टॉक (opening stock) के रूप में उपलब्ध है, जो कि सामान्य पूर्व-सीजन स्तर से काफी अधिक है. उर्वरक विभाग के मुताबिक, कुल स्टॉक लगभग 180 लाख टन है, जबकि पिछले वर्ष यह 147 लाख टन था.
यूरिया उत्पादन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल
खाड़ी क्षेत्र उर्वरक आयात का एक प्रमुख स्रोत है. यूरिया का 20-30 प्रतिशत और डीएपी का 30 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से होता है. भारत के एलएनजी आयात का लगभग 50 प्रतिशत भी यहीं से आता है, जो यूरिया उत्पादन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है. उर्वरक विभाग के अनुसार, "घरेलू स्तर पर पी एंड के उर्वरकों के उत्पादन में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल और मध्यवर्ती पदार्थ जैसे अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड भी प्रभावित हुए हैं. वैश्विक उर्वरक बाजार में एलएनजी, अमोनिया और सल्फर सहित इनपुट की कीमतों में तीव्र वृद्धि देखी गई है, साथ ही माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत में भी वृद्धि हुई है. मौजूदा स्थिति के कारण यूरिया के घरेलू उत्पादन पर असर पड़ा है. उर्वरक विभाग इस प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठा रहा है."
उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी रोकने के लिए ऑपरेशन
केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, सीमा पार तस्करी या गैर-कृषि उपयोग के लिए उर्वरक का डायवर्जन को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाएं. इस बार गैस की सप्लाई में कुछ कमी की वजह से यूरिया प्लांट का एनुअल मेंटिनेस समय से पहले किया गया, जिससे मौजूद गैस के स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल यूरिया के प्रोडक्शन के लिए किया जा सके. देश में यूरिया की उपलब्धता जरूरत के मुताबिक, बहाल रखने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संकट की संभावना को देखते हुए समय से पहले ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के मध्य तक साढे़ 13 लाख टन यूरिया के आयात के लिए आर्डर जारी कर दिए गए थे.

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केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय के मुताबिक, रूस और मोरक्को से फर्टिलाइजर स्टॉक की सप्लाई सामान्य तरीके से जारी है, जबकि सऊदी अरब से भी 3 मिलियन टन डीएपी खाद की सप्लाई जारी है, उसकी सप्लाई में कोई बाधा अभी तक नहीं आई है. देश के 652 जिलों में उर्वरक की बिक्री की कड़ी निगरानी की जा रही है, और कहीं भी ब्लैक मार्केटिंग ना हो इसके लिए कारगर व्यवस्था बहस की गई है.
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