मेघालय की एक बुजुर्ग महिला ने पूर्वी खासी हिल्स जिले की एक सीट के प्रत्याशियों से मुफ्त की चीज़ कथित रूप से लेने से इनकार कर दिया और उनके परिवार को मिला ‘तोहफा' वापस कर दिया. अपने इलाके में महिला संगठन की प्रमुख पुरिती फावा ने प्रत्याशियों के एजेंट को कथित रूप से यह भी कहा कि वे विधायक चुनना चाहती है न कि वितरक. मेघालय की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 27 फरवरी को चुनाव होना है जबकि मतगणना दो मार्च को होगी.
फावा का परिवार पश्चिम शिलांग विधानसभा क्षेत्र के लुमदिएनजरी इलाके में रहता है. परिवार को 28 जनवरी को सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के प्रत्याशी मोहिनद्रो रापसंग और 30 जनवरी को यूनाइटिड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के उम्मीदवार पॉल लिंगदोह से मुफ्त की चीजें मिली थी.
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फावा ने शुक्रवार को कहा, “जब मुफ्त की चीजें आई थी तो मैं घर पर नहीं थी. जब मैं वापस आई तो मेरी बेटी ने मुझे बताया कि 28 और 30 जनवरी को प्रत्याशियों ने हमें प्रेशर कूकर और आयातित कटोरों के दो सेट भिजवाए थे.”
उन्होंने कहा, “मैंने मुफ्त की चीजें पहुंचाने वाले एजेंट को कॉल किया और उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि उम्मीदवारों ने तोहफे भिजवाएं हैं. यूडीपी उम्मीदवार ने कलेंडर भी भिजवाया था.”
फावा ने दावा किया कि उन्होंने बृहस्पतिवार को ये ‘तोहफे' लौटा दिए और उम्मीदवारों से कहा कि अगर वे विधायक बनना चाहते हैं तो वे ये चीजें ना बांटें. “अन्यथा वे वितरक बनना चुन सकते हैं.”
फावा ने यह भी दावा किया कि वह शुक्रवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों से मुलाकात करेंगी और औपचारिक रूप से उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों द्वारा बांटे जा रही मुफ्त की चीज़ों की जानकारी देंगी.
रापसंग विपक्षी कांग्रेस के टिकट पर पहली विधायक बने थे, लेकिन वह पाला बदलकर मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा की सत्तारूढ़ एनपीपी में हाल में शामिल हो गए. वह चुनाव से पहले कथित रूप से खुलेआम मतदाताओं को प्रेशर कूकर बांट रहे हैं.
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि वे मुफ्त की चीज़ें बांट रहे हैं और दावा किया कि ये प्रेशर कूकर उनकी विधायक निधि के पैसे के हैं.
पॉल जनजातीय परिषद के मौजूदा सदस्य हैं और पूर्व विधायक हैं. वह 2018 के चुनाव में रापसंग से चुनाव हार गए थे.
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