- मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण के लिए साधु-संतों ने 9 अगस्त से कार सेवा कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान किया है
- देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संत मथुरा में पहुंच रहे हैं और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है
- 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ आश्रम में यज्ञ और शिला पूजन के साथ कार सेवा कार्यक्रम का शुभारंभ होगा
अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए साधु-संतों ने कार सेवा का ऐलान किया है. इसकी शुरुआत 9 अगस्त से होनी है और उससे पहले साधु-संतों का मथुरा में पहुंचना शुरू हो गया है. इस मामले को लेकर प्रशासन अलर्ट पर है और पूरी सुरक्षा चाक-चौबंद की गई है. संतों ने ऐलान किया है कि मथुरा के चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर कारसेवा का शंखनाद होगा. जानकारी मिली है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया है. इस आयोजन में 13 अखाड़ों से महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है.
इससे पहले कार सेवा को लेकर शुक्रवार को धर्मनगरी वृंदावन में संत समाज की महाबैठक आयोजित की गई. मोहिनी शरण महाराज के आश्रम में हुई इस बैठक में विभिन्न अखाड़ों, पीठों और धार्मिक संगठनों से जुड़े साधु-संतों ने भाग लिया. बैठक में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा करते हुए संत समाज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए चलाए जा रहे अभियान को पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया. इसके साथ ही 9 अगस्त को होने वाले शिला पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया. बैठक में धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़, चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज, महा निर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. सत्यानंद सरस्वती सहित कई वरिष्ठ संत, महामंडलेश्वर और धार्मिक प्रतिनिधि मौजूद रहे.
यज्ञ से शुरू होगा आयोजन, फिर भव्य शिला पूजा का प्लान
संतों ने सर्वसम्मति से स्वामी सच्चिदानंद महाराज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण के लिए ब्रज का संत समाज पूरी तरह एकजुट है. बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 अगस्त को सभी साधु-संत और श्रद्धालु चित्रगुप्त पीठ आश्रम में एकत्रित होंगे. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे यज्ञ से होगी. इसके बाद 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य शिला पूजन किया जाएगा और दोपहर 12 बजे शंखनाद कर आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी. संतों ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए विशेष शिलाएं तैयार कराई जा रही हैं, जिन पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की आकर्षक नक्काशी की जाएगी. शिला पूजन के बाद इन्हीं शिलाओं पर कार्यशाला में नक्काशी का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा.
संत बोले- प्रशासन ने कोई एक्शन लिया तो विरोध होगा, पीछे नहीं हटेंगे
स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि कार्यक्रम में कितने श्रद्धालु शामिल होंगे. इसका अनुमान लगाना कठिन है क्योंकि यह पूरी तरह कृष्ण भक्तों की आस्था से जुड़ा आयोजन है. श्रावण मास को देखते हुए मुख्य कार सेवा की तिथि बाद में तय की जाएगी. अखाड़ा परिषद की ओर से भी श्रावण मास के बाद मुख्य कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया है, इसलिए फिलहाल शिला पूजन और संबंधित कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अभियान या संतों के खिलाफ किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई या नोटिस जारी किया जाता है, तो संत समाज उसका विरोध करेगा. यह अभियान भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली की मुक्ति की मांग से जुड़ा है और इसे लेकर संत समाज पीछे हटने वाला नहीं है.
सुलह वार्ता फेल, अब 18 अगस्त को फिर से होगी बैठक
इस बीच शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दोनों पक्षों के बीच स्थानीय स्तर पर वार्ता भी हुई. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका. अब इस मामले में 18 अगस्त को फिर से वार्ता की जाएगी.अधिवक्ताओं के अनुसार दोनों पक्षों ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत में अपनी-अपनी दलीलें रखीं. हालांकि किसी सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका. उन्होंने बताया कि अगर इस बार भी कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो मामले में उच्चतम न्यायालय से ही निर्णय की उम्मीद होगी. मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान और मंदिर परिसर स्थित शाही ईदगाह को लेकर पिछले कई साल से विवाद बना हुआ है. करीब डेढ़ दर्जन याचियों ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बताते हुए दावा किया कि शाही ईदगाह श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के स्वामित्व वाली 13.37 एकड़ भूमि पर स्थित है. इसे हिंदू पक्ष को सौंपे जाने की मांग की गई है.
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