पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में कहा है कि वो चाहती हैं कि इंडिया गठबंधन की बैठक जून के पहले हफ्ते में बुलाई जाए और इसमें और भी समान विचारधारा वाले दलों को बुलाया जाए. जाहिर है बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी अब दिल्ली का साथ चाहती हैं खासकर कांग्रेस का.
हालांकि जब हमने कांग्रेस से इस बारे में जानकारी के लिए संपर्क किया तो मीडिया विभाग के एक नेता ने कहा कि मुझे कोई आइडिया नहीं हैं लेकिन यह भी बता दूं कि इसी मीडिया विभाग के नेता ने कुछ दिनों पहले हमें बताया था कि जून में इंडिया गठबंधन की बैठक हो सकती है. उसके बाद जब हमने समाजवादी पार्टी के नेताओं से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी में नहीं है. हां यदि ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस के किसी नेता ने अखिलेश जी को सीधे संपर्क किया हो तो हम नहीं बता सकते. यानी जून में इंडिया गठबंधन की बैठक होने वाली है, इस पर समाजवादी पार्टी में भी किसी को ज्यादा पता नहीं है.
शायद इसकी वजह ये भी हो सकती है कि ममता बनर्जी ने आज ही इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाने की बात कही है और बाकी पार्टियों की राय आने में थोड़ा वक्त लग सकता है.

वैसे राहुल गांधी जब बंगाल में कांग्रेस का प्रचार करने गए थे, तब तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर जम कर बरसे थे, मगर जब ममता बनर्जी चुनाव हार गईं तो राहुल गांधी उनके सर्मथन में आगे आए थे. राहुल गांधी ने तब कहा था कि ममता बनर्जी वोट चोरी का शिकार हुई हैं और बीजेपी ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर उनकी 100 सीटें चुरा ली है. राहुल ने यह भी कहा था कि अभी राजनीति करने का वक्त नहीं है. ऐसा कह कर राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के पक्ष में खड़े हो गए थे, मगर ममता बनर्जी या कहें तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते इंडिया गठबंधन के साथ नरम-गरम का ही रहा है. कभी हां तो कभी ना वाली स्थिति.
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इंडिया गठबंधन की जो अंतिम बैठक महिला आरक्षण के मुद्दे पर बुलाई गयी थी उसमें जरूर तृणमूल कांग्रेस शामिल हुई थी. कांग्रेस ने हमेशा कहा है कि इंडिया गठबंधन को राज्य की राजनीति से अलग रखना चाहिए जैसे वह केरल में वामदलों के खिलाफ चुनाव लड़ती हैं मगर वो इंडिया गठबंधन का हिस्सा है. वैसा ही तृणमूल कांग्रेस के साथ भी है और समाजवादी पार्टी के साथ भी. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव तो ममता बनर्जी से एकजुटता दिखाने के लिए कोलकाता तक पहुंच गए. उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और सपा मिलकर लड़ेंगे. विपक्ष में कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी ही दूसरा बड़ा दल है फिर तृणमूल कांग्रेस और उसके बाद डीएमके का नंबर आता है.

मगर दिक्कत ये है कि तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव साथ लड़ने के बाद कांग्रेस ने एक्टर विजय की पार्टी टीवीके के साथ हाथ मिला लिया और उसी गुस्से में डीएमके ने लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए सीट निर्धारित करने की चिट्ठी दे दी है. अब देखना है कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा रहेगी या नहीं.
हालांकि जिस तरह की अपील ममता बनर्जी ने की है यदि विपक्ष के बाकी नेता डीएमके से इंडिया गठबंधन में रहने के लिए मनाते हैं तो शायद बात बन भी जाए. वैसे अटल बिहारी वाजपेयी के समय डीएमके एनडीए का हिस्सा रह चुकी है. वैसे एक्टर विजय की पार्टी टीवीके को भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनना पड़ेगा क्योंकि वे तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रहे है मगर फिलहाल उनका एक भी सांसद नहीं है. अगले महीने तमिलनाडु में राज्यसभा का एक उपचुनाव है जिसमें उनका एक सांसद चुन कर आ सकता है.

कुल मिलाकर फिलहाल इंडिया गठबंधन के लेकर एक कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. गठबंधन के घटक दलों को कांग्रेस का साथ चाहिए भी मगर उन्हें कांग्रेस से डर भी लगता है क्योंकि राज्यों में वो कांग्रेस को जगह नहीं देना चाहती है. लेकिन इंडिया गठबंधन को एक ही चीज इकट्ठा रख सकती है वह है बीजेपी का डर. और उसे रोकने के लिए उन्हें कांग्रेस की जरूरत पड़ेगी. यही बात ममता बनर्जी ने कही है.
अक्सर संसद में विपक्ष को एकजुट रखने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक होती है जिसमें आम आदमी पार्टी भी शामिल होती है और पिछले सत्र में तो बीजू जनता दल भी शामिल हुई थी. मगर देखना होगा कि ममता बनर्जी के पहल पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे दल क्या करते हैं? और जून में बैठक होती है या नहीं? तभी इंडिया गठबंधन के नए स्वरूप का पता चलेगा.
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