अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में SIT की जांच में कई खुलासे हुए हैं. इस मामले में अब तक 70 लाख रुपये कैश रिकवर किया गया है. जांच टीम अभी भी नोटों की गिनती कर रही है. कैश और बढ़ सकता है. पुलिस ने इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस इन ने इन आरोपियों को कोर्ट में भी पेश किया है. कोर्ट ने सभी आरोपियों को सोमवार तक की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है.
सूत्रों के मुताबिक आरोपी टिन्नू के पास बिना आदेश के हुंडियों की चाभी थीं. SIT की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि ट्रस्ट को बहुत पहले ही चोरी का अंदेशा हो गया था. सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच बैठक में एसओपी भी बनी थी. स्टेट बैंक की तरफ से गोविन्द मिश्र और ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्र ने अभिलेख पर हस्ताक्षर किया था. गणना प्रक्रिया में आगे एसओपी का इस्तेमाल नहीं हुआ. SIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि लापरवाही जानबूझकर की गई थी.
आरोपियों को कोर्ट में किया गया पेश
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. इन सभी 8 आरोपियों को SIT ने गिरफ्तार करके कोर्ट के सामने पेश किया. आरोपी पेशी के बाद कोर्ट परिसर से निकल चुके हैं.
कौन-कौन है आरोपी
पुलिस ने बताया कि एसआईटी की ओर से दो दिन पहले सरकार को सौंपी गई प्रारम्भिक रिपोर्ट में कठोर सिफारिश की गई हैं. पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
सूत्रों के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
सीएम योगी ने गठित की थी SIT
अयोध्या के राम में कथित दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ था.
राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से 'दूध का दूध और पानी का पानी' होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसआईटी ने कुछ 'कठोर' सिफारिशें की हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले को लेकर 'बहुत गंभीर' हैं. अधिकारी ने बताया कि नामजद लोगों में से ज्यादातर दान की गिनती की प्रक्रिया में शामिल थे. उन्होंने बताया कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के बारे में कहा जाता है कि वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का वाहन चालक था.
टिन्नू ने दान और चढ़ावे की रकम गिनने में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया था और कहा था कि उससे जलने वाले कुछ लोग उसका नाम उछाल रहे हैं। हालांकि उसने उन लोगों के नाम नहीं बताए थे. लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा नामक आरोपी भी मंदिर में मिले दान की रकम और अन्य कीमती सामान की गिनती का काम करते थे.
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