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इस महिला के हाथ में देश के सबसे पावरफुल लीडर की सिक्योरिटी, मिलिए मेजर नव्या शेखावत से

Major Navya Shekhawat Success story: मेजर नव्या शेखावत को मिली नई जिम्मेदारी के बाद वह इन दिनों कई लड़कियों की रोल मॉडल बन चुकी हैं. इन दिनों के फोटो और वीडियो वायरल हो रहे हैं.

इस महिला के हाथ में देश के सबसे पावरफुल लीडर की सिक्योरिटी, मिलिए मेजर नव्या शेखावत से
Major Navya Shekhawat Success story

जब राष्ट्रपति भवन में कोई बड़ा सरकारी कार्यक्रम चल रहा होता है, तब आपने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ठीक बगल में एक महिला सैन्य अधिकारी को पूरी मुस्तैदी से खड़े देखा होगा. चेहरे पर गजब का अनुशासन, नजरें बाज जैसी तेज और चाल में देश का गौरव. ये कोई साधारण अफसर नहीं हैं, ये हैं मेजर नव्या शेखावत. और इन्होंने जो कर दिखाया है, वो भारतीय सेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है 

मेजर नव्या शेखावत इंडियन आर्मी की पहली ऐसी महिला अफसर बन गई हैं, जिन्हें भारत के राष्ट्रपति की 'एड्स-डी-कैंप' यानी ADC नियुक्त किया गया है. सीधे और सरल शब्दों में कहें तो राष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिए जो सबसे भरोसेमंद और खास अधिकारी तैनात होते हैं, मेजर नव्या अब उन्हीं का नेतृत्व कर रही हैं.  

Major Navya Shekhawat Success story: The Indian Armys First Woman Aide-de-Camp to the President Murmu

राष्ट्रपति के होते हैं पांच ADC

आमतौर पर राष्ट्रपति की मदद के लिए पांच ADC होते हैं - तीन थल सेना से, एक नौसेना से और एक वायुसेना से. दशकों से इन कुर्सियों पर सिर्फ पुरुषों का दबदबा रहा. लेकिन वक्त बदला और साल 2025 में नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी पहली महिला ADC बनीं. और अब, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए थल सेना से पहली बार मेजर नव्या ने अपना लोहा मनवाया है.

आर्मी सर्विस कॉर्प्स की जांबाज अफसर मेजर नव्या अब राष्ट्रपति के हर खास दौरे, देश-विदेश के मेहमानों के स्वागत और बड़े सम्मान समारोहों में साए की तरह साथ रहती हैं. आजकल सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं. वर्दी का सपना देखने वाली देश की हजारों बेटियों के लिए मेजर नव्या अब एक रोल मॉडल बन चुकी हैं.  

Major Navya Shekhawat Success story: The Indian Armys First Woman Aide-de-Camp to the President Murmu

यहां तक कैसे पहुंची मेजर नव्या शेखावत?

इस कामयाबी के पीछे सालों का पसीना और कड़ी तपस्या छिपी है. नव्या का सफर भी देश के लाखों युवाओं की तरह ही शुरू हुआ था. उन्होंने UPSC की बेहद कठिन CDS परीक्षा पास की. इसके बाद चेन्नई की प्रसिद्ध ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) के लिए उनका सिलेक्शन हुआ, जहां आम नागरिकों को फौलादी अफसर बनाया जाता है.

OTA की ट्रेनिंग इतनी सख्त होती है कि अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं. यहां शारीरिक ताकत से ज्यादा आपकी मानसिक मजबूती को परखा जाता है. नव्या ने इस इम्तिहान को न सिर्फ पास किया, बल्कि सेना की धड़कन कहे जाने वाले 'आर्मी सर्विस कॉर्प्स' में अपनी जगह बनाई. 
 

1992 के बाद पहली बार मिली महिला शक्ति को पहचान

नव्या की ये सफलता केवल उनकी अकेले की नहीं है, बल्कि यह कहानी है हिंदुस्तानी फौज में महिलाओं के संघर्ष और जीत की. साल 1992 में पहली बार महिलाओं को सेना में एंट्री मिली थी. इसके बाद साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने सेना के दरवाजे महिलाओं के लिए पूरी तरह खोल दिए, जिससे उन्हें पुरुषों के बराबर परमानेंट कमीशन मिलने लगा. आज देश की बेटियां केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कमांडिंग रोल में भी देश का मान बढ़ा रही हैं.

अक्सर लोग सोचते हैं कि सेना में सिर्फ फ्रंटलाइन या कॉम्बैट रोल ही सबसे शानदार होते हैं. लेकिन मेजर नव्या ने साबित कर दिया कि अगर आपमें काबिलियत और देश के लिए कुछ गुजरने का जज्बा है, तो आप सेना के किसी भी विभाग में रहकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं.  

Major Navya Shekhawat Success story: The Indian Armys First Woman Aide-de-Camp to the President Murmu
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