महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर तनाव अब खुलकर सामने आ गया है. विधान परिषद चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. बीजेपी ने अपने सहयोगी दल पर धोखा देने और स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाया है. वहीं, शिंदे गुट ने मुख्यमंत्री की लोकप्रियता पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि सत्ता की पूरी कमान एकनाथ शिंदे को सौंप दी जानी चाहिए. बीजेपी ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की अहम सीटों पर गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए सीधे शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया है. बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नवनीत बान ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने गठबंधन का साथ नहीं दिया, जिसकी वजह से पार्टी को महत्वपूर्ण सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा.
बीजेपी ने शिंद की सेना पर क्या आरोप लगाए हैं
उन्होंने कहा कि पुणे में शिवसेना ने सचिन सानप का समर्थन किया, जबकि छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार ने एनसीपी के खिलाफ प्रचार किया. बान के मुताबिक, अगर शिवसेना ने गठबंधन धर्म का पालन किया होता तो महायुति सभी पांच सीटें जीत सकती थी. लेकिन शिवसेना की अपनी महत्वाकांक्षाओं के कारण उसे तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा.वहीं दूसरी ओर, बीजेपी नेता नीतेश राणे ने चुनाव में मिली हार के असर को कम करके दिखाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में पहले गठबंधन का कोई आधार नहीं था, वहां भी उसने शून्य से दो सीटें हासिल की हैं.
हालांकि, तीनों सत्ताधारी दलों के बीच मतभेदों को स्वीकार करते हुए राणे ने गठबंधन के भीतर ही कुछ लोगों पर गड़बड़ी करने का इशारा किया. उन्होंने कहा,''जब सरकार में तीन पार्टियां होती हैं तो इस तरह की बातें कभी-कभी हो जाती हैं. हमारे बीच भी शकुनि मामा जैसे कुछ लोग हैं.''
इसके बाद शिवसेना नेताओं ने भी बीजेपी पर पलटवार किया और हार के लिए उसकी नेतृत्व क्षमता और उम्मीदवारों के चयन को जिम्मेदार ठहराया. पुणे में शिवसेना नेता रवींद्र धंगेकर ने बीजेपी प्रवक्ता बान को 'पैसे लेकर काम करने वाला पत्रकार' बताया. उन्होंने दावा किया कि जनता में बीजेपी के प्रति नाराजगी की वजह से गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा.
धंगेकर ने कहा कि बीजेपी ने जिस उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, वह पार्टी का सही प्रतिनिधि नहीं, बल्कि जबरन वसूली करने वाला व्यक्ति था. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार के कामकाज को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा है. ऐसे में एकनाथ शिंदे को सत्ता की पूरी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. उन्होंने इसके पीछे शिंदे सरकार की लोकप्रिय योजनाओं, खासकर 'लाडकी बहिन योजना' का भी हवाला दिया.
शिंदे की सेना ने बीजेपी पर क्या आरोप लगाए हैं
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री उदय सामंत ने भी इसी तरह की बात कही. उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने पारंपरिक वोट बैंक को भी एकजुट रखने में नाकाम रही. नागपुर में पार्टी ने अपने ही 9,000 वोट गंवा दिए. सामंत ने कहा कि अगर शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ें तो जीत निश्चित है. उन्होंने स्थानीय स्तर पर शिवसेना के दूसरे दलों के साथ गठबंधन करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पुणे में स्मिता जाधव के समर्थन में पार्टी के नेताओं ने सक्रिय रूप से प्रचार किया था. सामंत ने यह भी कहा कि अगर एकनाथ शिंदे अनुमति देते हैं तो शिवसेना के नेता गठबंधन से जुड़े इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे.
इस बीच, गठबंधन में बढ़ते विवाद को रोकने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को सहयोगी दलों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान देने से तुरंत बचने का निर्देश दिया है. देर रात हुई बैठक में शिंदे ने पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से चुनाव के दौरान हुई गलतियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी. उन्होंने चेतावनी दी कि गठबंधन के भीतर इस तरह की खींचतान का फायदा सिर्फ विपक्ष को होगा.
वहीं बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण से भी इस पूरे मामले पर सफाई मांगी है. गठबंधन में बढ़ती दरार को भरने और विवाद को शांत करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जल्द ही एक आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है.
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