- कल्याण-डोंबिवली में MNS ने शिंदे गुट को समर्थन देकर महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है
- उद्धव ठाकरे गुट ने बताया कि सम्मानजनक प्रस्ताव आने पर वे सत्ता समीकरण पर पुनर्विचार कर सकते हैं
- उद्धव ठाकरे ने पार्षदों को आश्वासन दिया कि उनका सम्मान बना रहेगा
कल्याण-डोंबिवली में अचानक बदले राजनीतिक समीकरणों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. KDMC में मनसे (MNS) की ओर से शिंदे गुट को समर्थन देने के बाद अब उद्धव ठाकरे गुट की ओर से आए संकेत ने पूरे राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सत्ता समीकरण एक बार फिर बदल सकते हैं. इस बीच ‘मातोश्री' पर उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में एक अहम बैठक हुई, जिसमें कल्याण–डोंबिवली के नवनिर्वाचित पार्षदों ने हिस्सा लिया.
बैठक के बाद ठाकरे गुट के कई पार्षदों ने कहा कि अगर शिंदे गुट या बीजेपी की ओर से “सम्मानजनक प्रस्ताव” आता है, तो वे उस पर विचार कर सकते हैं. ठाकरे गुट के नेता उमेश बोरगावकर ने कहा, “अगर महायुति या बीजेपी की ओर से कोई सम्मानजनक प्रस्ताव आता है, तो हम उस पर विचार करेंगे.”
क्या हैं राजनीतिक संकेत?
इस बयान ने संकेत दिया है कि उद्धव गुट संभावित राजनीतिक बदलावों के लिए दरवाज़ा बंद नहीं कर रहा. हालांकि उद्धव ठाकरे फिलहाल विपक्ष में बैठने की तैयारी जाहिर कर रहे हैं. बैठक में उन्होंने पार्षदों को आश्वासन दिया कि चाहे वे सत्ता में हों या विपक्ष में, “उनका सम्मान बरकरार रहेगा.” उन्होंने मनसे (MNS) के रुख पर भी नाराज़गी जताई और कहा कि अगर मनसे उनके साथ होती, तो वे KDMC में एक मजबूत विपक्ष बन सकते थे.
जो पार्षद पार्टी लाइन के खिलाफ उनपर होगी कार्रवाई
उद्धव ठाकरे ने मनसे द्वारा शिंदे गुट को समर्थन देने को “चौंकाने वाला फैसला” बताया. उन्होंने पार्षदों से कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आते रहते हैं, लेकिन पार्टी अनुशासन और एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण है. पार्टी की ओर से यह भी साफ संदेश दिया गया है कि जो पार्षद पार्टी लाइन से हटकर चले हैं या संपर्क में नहीं हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है. बैठक में यह भी बताया गया कि आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे खुद स्थिति की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे.
KDMC में लगातार बदल रहे समीकरणों को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है. मनसे के कदम के बाद अब ठाकरे गुट का यह संकेत राजनीतिक उथल-पुथल की नई शुरुआत हो सकता है.
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