विज्ञापन

जब शरद पवार ने इंदिरा गांधी से की थी बगावत...महाराष्ट्र में दल बदल का लंबा है इतिहास

महाराष्ट्र में सियासी टूट और दलबदल का खेल कोई आज का नहीं है. इसके इतिहास की परतें काफी गहरी हैं. इंदिरा गांधी के वक्त पर कांग्रेस ने भी ये दौर देखा है जो आज की शिवसेना यूबीटी देख रही है.

जब शरद पवार ने इंदिरा गांधी से की थी बगावत...महाराष्ट्र में दल बदल का लंबा है इतिहास
1969 में राष्ट्रपति चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी टूटती है और इंदिरा गांधी की कांग्रेस (R)के साथ यशवंत राव चौहान और शरद पवार रहते है.

महाराष्ट्र में आज कल जो हो रहा है वह इस राज्य के लिए कोई नया नहीं है. महाराष्ट्र का इतिहास है कि यहां कई बार पार्टियां टूटी हैं और नई सरकार बनाई गई है कभी यह कांग्रेस से साथ हुआ करता था, अब शिवसेना के साथ हो रहा है. सबसे पहले 1969 में राष्ट्रपति चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी टूटती है और इंदिरा गांधी की कांग्रेस (R)के साथ यशवंत राव चौहान और शरद पवार रहते है.

मगर महाराष्ट्र कांग्रेस में असली टूट 1977 में इंदिरा गांधी के चुनाव हारने के बाद होती है जिसमें इंदिरा कांग्रेस को कांग्रेस (I)कहा गया और दूसरा धड़ा बना कांग्रेस (U) तब शरद पवार अपने राजनीतिक गुरु यशवंतराव चौहान के साथ कांग्रेस U में शामिल हो गए.

कांग्रेस के दोनों धड़े अलग-अलग लड़े मगर चुनाव के बाद जनता पार्टी को सरकार से बाहर रखने के लिए एकजुट हो गए ,वसंत दादा पाटिल मुख्यमंत्री बने और शरद पवार मंत्री.

कांग्रेस तोड़कर सीएम बने थे शरद पवार

उसी साल शरद पवार कांग्रेस U से अलग हो गए और जनता पार्टी के साथ मिलकर पीडीएफ प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस बनाया और 38 साल के उम्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए. हालांकि 1980 में इंदिरा गांधी ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया. 1987 में शरद पवार की फिर कांग्रेस में वापसी होती है तब उन्होंने कहा कि यह सब शिवसेना के प्रभाव को रोकने के लिए कर रहे है.

1999 में महाराष्ट्र में कांग्रेस एक बार फिर टूटती है शरद पवार ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर अलग दल बनाया मगर फिर उसी साल महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना को सरकार में आने से रोकने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाया और तब विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री बने.2004 से 2014 तक शरद पवार यूपीए का हिस्सा बने और केंद्र में मंत्री बने रहे.

अब आते हैं 1995 में जब पहली बार शिवसेना और भाजपा की सरकार बनी और मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने और गोपीनाथ मुंडे उपमुख्यमंत्री.यह सरकार भी निर्दलीय और कुछ बागी विधायकों के मदद से बनाई गयी थी .

7 साल पहले भी महाराष्ट्र में खूब हुआ था सियासी ड्रामा

महाराष्ट्र की राजनीति में 23 नवंबर 2019 को एक भूचाल आया जब रातोंरात देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गयी. यह सब इसलिए हुआ कि विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना और बीजेपी में मुख्यमंत्री पद को लेकर तकरार हो गई और गठबंधन टूट गया. शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी और बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं थी. बीजेपी ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी में सेंध लगाई और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया.

मगर ये सरकार केवल पांच दिनों तक रह पाई क्योंकि शरद पवार हरकत में आए और शिवसेना,कांग्रेस और एनसीपी को मिलाकर कर महाविकास अघाडी बनाया और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने और अजित पवार एक बार फिर उपमुख्यमंत्री. महाराष्ट्र में हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम से बीजेपी तिलमिलाई हुई थी और मौके का इंतजार कर रही थी. जून 2022 में शिवसेना में टूट होती है और एकनाथ शिंदे अलग हो जाते हैं उनके पास शिवसेना के दो तिहाई विधायकों के अलावा निर्दलीय मिलाकर 40 विधायक थे. उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बन गए.

महाराष्ट्र में जुलाई 2023 में एक और पार्टी में टूट होती है और इसबार नंबर था शरद पवार की एनसीपी का.अजित पवार एनसीपी के 53 में से 41 विधायक ले कर अलग हो जाते हैं और एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो जाते हैं और उपमुख्यमंत्री बन जाते हैं.पार्टियों में टूट का मामला चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक जाता है और एकनाथ शिंदे को असली शिवसेना और अजित पवार की पार्टी को असली एनसीपी घोषित किया जाता है.उद्धव ठाकरे और शरद पवार के हाथ से पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी चला जाता है.

अब बात करते हैं 2026 की. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उद्धव सेना के 9 सांसद जीत कर आते हैं मगर 2026 आते आते यहां एक बार फिर बगावत होती है और 6 सांसद अलग होने की चिट्ठी लोकसभा अध्यक्ष को देते हैं.दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई जाती है जिसमें ये 6 सांसद गायब रहते हैं और लगता है कि उद्धव की शिवसेना को एक बार फिर टूटने से नहीं रोका जा सकता है. ये है कहानी महाराष्ट्र में पार्टियों के एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने और फिर मिल कर सरकार बनाने और फिर पार्टियों को तोड़ने की कहानी.

यह भी पढ़ें: उद्धव के अलावा कांग्रेस और NCP को भी झटके दे रहा एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर', 8 महीने में 16 झटके

लेखक के बारे में
img
मनोरंजन भारती
मैनेजिंग एडिटर, NDTV इंडिया
मनोरंजन भारती ने अपने 32 साल के राजनीतिक रिपोर्टिंग करियर में देश का कोई ऐसा चुनाव नहीं है जिसकी रिपोर्टिंग ना की हो.मनोरंजन पिछले तीन दशकों से संसद क... और पढ़ें
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Maharashtra, Shivsena, Sharad  Pawar, Maharashtra BJP
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com