Maharashtra Coronavirus: महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की मार सबसे ज़्यादा रही है. यहां कोविड ड्यूटी (Covid Duty) पर तैनात करीब 57 निजी डॉक्टरों (Private Doctors) की पिछले दो महीनों में मौत हुई है. राज्य सरकार ने निजी डॉक्टरों को भी 50 लाख की बीमा (Insurance) स्कीम में रखने का वादा किया था, लेकिन परिवारों की बीमा अर्जियां एक-एक कर खारिज हो रही हैं. कोविड ड्यूटी पर तैनात निजी डॉक्टर और उनके परिवार खफा हैं क्योंकि जिस 50 लाख बीमा का सरकार ने उनसे वादा किया था, वे उससे वंचित हैं. राज्य सरकार ने अगस्त में एक नोटिफ़िकेशन में कहा था कि निजी डॉक्टरों को भी बीमा देंगे. इस पर महाराष्ट्र में 45,000 डॉक्टरों वाले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने राज्य सरकार की कड़ी निंदा की है. IMA के मुताबिक़ कोविड के कारण राज्य में 57 निजी डॉक्टरों की जानें गई हैं और एक-एक करके सभी की बीमा अर्जियां ख़ारिज हो रही हैं. रिजेक्ट हुई कुछ बीमा ऐप्लिकेशन एनडीटीवी के भी हाथ लगी हैं.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ अविनाश भोंडवे ने कहा कि ''केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि जो भी स्वास्थ्यकर्मी कोविड ड्यूटी के दौरान जान गंवाते हैं, उनके परिवार को पचास लाख का बीमा दिया जाएगा. ये सिर्फ़ सरकारी हॉस्पिटलों के डॉक्टरों को था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने IMA के साथ मीटिंग में मान लिया था कि निजी डॉक्टरों को भी बीमा दिया जाएगा. नोटिफ़िकेशन भी निकाला. पिछले दो महीने में 57 डॉक्टरों की मौत हुई है लेकिन सबकी बीमा एप्लिकेशन सरकार रिजेक्ट कर रही है. सबसे ज़्यादा मामले यहां हैं, जिसमें निजी डॉक्टर दिन रात लगे हैं, सरकारी से ज़्यादा, फिर भी सरकार अपमानजनक व्यवहार कर रही है.''
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जनरल प्रैक्टिशनर डॉ मिलिंद वैरागी कोविड मरीजों को देखते हुए संक्रमित हुए और आठ जुलाई को चल बसे. बीमा एप्लिकेशन रिजेक्ट हो चुकी है. उनकी पत्नी सरकार से मदद की अपील कर रही हैं. डॉ मिलिंद वैरागी की पत्नी डॉ सीता वैरागी ने कहा कि ''इनके जाने से समाज के साथ-साथ मेरी फ़ैमिली का भी बड़ा नुक़सान हुआ है. 83 साल की उनकी मां दुख में हार्टअटैक के बाद चल बसीं. मैं भी पॉज़िटिव हुई, नानावटी में थी. अभी क्वारंटाइन में हूं. जून से क्लिनिक बंद है, कोई कमाई नहीं. मेरे ऊपर मेरी बेटी की ज़िम्मेदारी है. पहले पचास लाख के इंश्योरेंस का वादा था लेकिन फिर मुंह फेर लिया. सरकार से निवेदन है, इस बारे में कोई निर्णय लें.''
एक जून को कोविड के कारण सर्जन डॉ चितरंजन भावे ने भी जान गंवाई. अब उनकी पत्नी और बेटी डॉ भावे के बीमा रिजेक्शन के दोहरे दुःख से आहत हैं. डॉ भावे की पत्नी सुजाता भावे ने कहा कि ''जब हमें पता चला कि सरकार ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया है, मैं बहुत निराश हुई. क्योंकि रिजेक्ट करने की जो वजह उन्होंने बताई वह बहुत तकनीकी थी. डॉक्टर चाहे प्राइवेट क्लीनिक में पेशेंट देखें या सरकारी में, इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?'' डॉ भावे की बेटी श्रद्धा भावे ने कहा कि ''इस भेदभाव की वजह से हम बेहद दुखी हैं. ये बीमा रक़म को लेकर बात नहीं बल्कि एक डॉक्टर को दिए जाने वाले सम्मान की बात है. सम्मान हर डॉक्टर को मिलना चाहिए फिर चाहे वो प्राइवेट क्लिनिक में काम कर रहे हों या सरकारी में.''
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इन रिजेक्टेड एप्लिकेशन में ये भी दिख रहा है कि सरकारी व्यवस्था में कोविड ड्यूटी पर तैनात निजी डॉक्टरों को भी बीमा के दायरे से दूर रखा गया है. राज्य के डॉक्टर समुदाय ने अपील ना माने जाने पर बड़े विरोध की चेतावनी दी है.
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