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This Article is From Aug 29, 2021

मधुबनी के 'सुखेत मॉडल' से लेकर RJ गंगा की संस्कृत के मुरीद हुए PM मोदी, 'मन की बात' में दी नजीर; 10 बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम की शुरुआत हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि देकर की. मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने खेल और खेलों को लेकर युवाओं का बढ़ता रुझान, युवाओं की नई सोच और कुछ नया करने की ललक का जिक्र किया.

मधुबनी के 'सुखेत मॉडल' से लेकर RJ गंगा की संस्कृत के मुरीद हुए PM मोदी, 'मन की बात' में दी नजीर; 10 बड़ी बातें
(फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
  1. मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में भारत की हॉकी का डंका बजाने का काम ध्यानचंद जी की हॉकी ने किया था. कितने ही पदक क्यों न मिल जाएं, लेकिन जब तक हॉकी में पदक नहीं मिलता भारत का कोई भी नागरिक विजय का आनंद नहीं ले सकता है और इस बार ओलंपिक में हॉकी का पदक मिला, चार दशक के बाद मिला. हमें देश के नौजवानों में हमारे बेटे-बेटियों में, खेल के प्रति जो आकर्षण नजर आ रहा है, माता-पिता को भी बच्चे अगर खेल में आगे जा रहे हैं तो खुशी हो रही है, ये जो ललक दिख रही है न... मैं समझता हूं, यही मेजर ध्यानचंद जी को बहुत बड़ी श्रद्धांजलि है. 
  2. युवाओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि आज का युवा मन घिसे-पिटे पुराने तौर तरीकों से कुछ नया करना चाहता है, हटकर के करना चाहता है. आज का युवा मन बने बनाए रास्तों पर चलना नहीं चाहता है. वो नए रास्ते बनाना चाहता है. अंजान जगह पर कदम रखना चाहता है. मुझे पक्का भरोसा है आने वाले दिनों में बहुत बड़ी संख्या ऐसे सैटेलाइट्स की होगी, जिनमें हमारे युवाओं ने, हमारे छात्रों ने, हमारे कॉलेजों ने, हमारी यूनिवर्सिटीज ने, लैब में काम करने वाले स्टूडेंट्स ने काम किया होगा. 
  3. स्वच्छ भारत अभियान को लेकर उन्होंने कहा कि जब की स्वच्छता की बात आती है तो इंदौर का नाम आता ही आता है क्योंकि इंदौर ने स्वच्छता के संबंध में अपनी एक विशेष पहचान बनाई है और इंदौर के नागरिक इसके अभिनन्दन के अधिकारी भी है. इंदौर के लोग ‘Water Plus City', बनाए रखने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं. ‘Water Plus City' यानी ऐसा शहर जहां बिना ट्रीटमेंट के कोई भी सीवेज किसी सार्वजनिक जल स्त्रोत में नहीं डाला जाता. इंदौर के नागरिकों ने खुद आगे आकर अपनी नालियों को सीवर लाइन से जोड़ा है. 
  4. बिहार के मधुबनी में डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय और वहां के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र ने मिलकर के एक अच्छा प्रयास किया है. इसका लाभ किसानों को तो हो ही रहा है, इससे स्वच्छ भारत अभियान को भी नई ताकत मिल रही है. विश्वविद्यालय की इस पहल का नाम है – “सुखेत मॉडल”. सुखेत मॉडल का मकसद है गाँवों में प्रदूषण को कम करना. इस मॉडल के तहत गांव के किसानों से गोबर और खेतों–घरों से निकलने वाला अन्य कचरा इकट्ठा किया जाता है और बदले में गांव वालों को रसोई गैस सिलेंडर के लिए पैसे दिये जाते हैं. जो कचरा गाँव से एकत्रित होता है उसके निपटारे के लिए  vermi compost बनाने का भी काम किया जा रहा है. 
  5. सुखेत मॉडल के चार लाभ तो सीधे-सीधे नजर आते हैं. एक तो गांव को प्रदूषण से मुक्ति, दूसरा गांव को गन्दगी से मुक्ति, तीसरा गांव वालों को रसोई गैस सिलेंडर के लिए पैसे और चौथा गाँव के किसानों को जैविक खाद. 
  6. आपको मालूम है न ये केवड़िया वही है जहां दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू, हमारे देश का गौरव, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जहां पर है, उस केवड़िया की मैं बात कर रहा हूं. RJ गंगा, गुजरात के रेडियो जॉकी के ग्रुप की एक सदस्य हैं. उनके और भी साथी हैं, जैसे RJ नीलम, RJ गुरु और RJ हेतल. ये सभी लोग मिलकर गुजरात में, केवड़िया में इस समय संस्कृत भाषा का मान बढ़ाने में जुटे हुए हैं. 
  7. अगले कुछ दिनों में ही ‘विश्वकर्मा जयंती' भी आने वाली है. भगवान विश्वकर्मा को हमारे यहां विश्व की सृजन शक्ति का प्रतीक माना गया है. जो भी अपने कौशल से किसी वस्तु का निर्माण करता है, सृजन करता है, चाहे वो सिलाई-कढ़ाई हो, सॉफ्टवेयर हो या फिर सैटेलाइट, ये सब भगवान विश्वकर्मा का प्रगटीकरण है. दुनिया में भले स्किल की पहचान आज नए तरीके से हो रही है, लेकिन हमारे ऋषियों ने तो हजारों सालों से स्किल और स्केल पर बल दिया है. 
  8. सोचकर देखिए, आपके घर में बिजली की कुछ दिक्कत आ जाए और आपका कोई इलेक्ट्रीशियन ना मिले तो क्या होगा? आपके सामने कितनी बड़ी परेशानी आ जाएगी. हमारा जीवन ऐसे ही अनेकों skilled लोगों की वजह से चलता है. इसका एक और पहलू भी है और वो कभी-कभी चिंता भी कराता है, जिस देश में, जहाँ की संस्कृति में, परंपरा में, सोच में, हुनर को, skill manpower को भगवान विश्वकर्मा के साथ जोड़ दिया गया हो, वहाँ स्थितियाँ कैसे बदल गई! 
  9. सोच कुछ ऐसी बन गई कि हुनर आधारित कार्यों को छोटा समझा जाने लगा. एक समय, हमारे पारिवारिक जीवन, सामाजिक जीवन, राष्ट्र जीवन पर कौशल्य का बहुत बड़ा प्रभाव रहता था, लेकिन गुलामी के लंबे कालखंड में हुनर को इस तरह का सम्मान देने वाली भावना धीरे-धीरे विस्मृत हो गई. हमें हुनर को सम्मान देना होगा, हुनरमंद होने के लिए मेहनत करनी होगी. हुनरमंद होने का गर्व होना चाहिए.
  10. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें एक बात और याद रखनी है. दवाई भी, कड़ाई भी. देश में 62 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है, लेकिन फिर भी हमें सावधानी रखनी है, सतर्कता रखनी है. इसी कामना के साथ, आप सभी को आने वाले पर्वों की एक बार फिर ढेरों बधाइयां."
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