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This Article is From Aug 02, 2019

बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न पर आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा, पॉक्सो बिल में हुए ये संशोधन

बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकने के लिये राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पॉक्सो संशोधन बिल पास हो गया. अब 12 साल के बच्चों के साथ यौन अपराध करने वाले को आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सज़ा दी जा सकती है.

बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न पर आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा, पॉक्सो बिल में हुए ये संशोधन
प्रतीकात्मक तस्वीर
  • राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पॉक्सो संशोधन बिल पास
  • बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न पर आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा
  • पॉक्सो बिल में हुए कई संशोधन
नई दिल्ली:

बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकने के लिये राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पॉक्सो संशोधन बिल पास हो गया. अब 12 साल के बच्चों के साथ यौन अपराध करने वाले को आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सज़ा दी जा सकती है. बच्चों के खिलाफ बढ़ रही यौन अपराधों को रोकने और सजा के प्रावधान को और कड़ा करने वाला पॉक्सो कानून प्रिवेंशन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस लोकसभा से भी पास हो गया. लोकसभा में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने पॉस्को बिल पेश किया.

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स्मृति ईरानी ने कहा कि नया कानून पहले से ज्यादा मजबूत है. इसमें बच्चों के साथ यौन अपराधों में मिलने वाली न्यूनतम सजा की  बढ़ाया गया है. इसके साथ ही यौन शोषण की परिभाषा में बदलाव किया गया है. पॉक्सो संशोधन बिल में सरकार ने कुछ जरूरी बदलाव करके एक नया बिल संसद में पेश किया गया था.

अब आपको बताते है पॉक्सो बिल में क्या संशोधन किए गए हैं-

  1. रेप करने पर न्यूनतम सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है. यदि पीड़ित 16 साल या उससे कम उम्र का हो जिसमें लड़का और लड़की दोनों शामिल हैं तो कम से कम 20 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा होगी.
  2. रेप के दौरान यदि बच्चे की मौत हो जाती है, प्राकृतिक आपदा के दौरान बच्चे से रेप होता है या फिर दंगे या हिंसा के दौरान बच्चे से रेप होता है. तो ऐसे में न्यूनतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है. अधिकतम फांसी की सजा हो सकती है.
  3. किसी बच्ची या बच्चे से गैंगरेप होता है तो ऐसे मामलों में इस कानून में फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है.
  4. नए कानून में बच्चों के शरीर में हार्मोन या कैमिकल इंजेक्ट करके उन्हें यौनिक रूप से मैच्योर बनाने की कोशिश को भी अपराध का दायरे में डाला गया है. इसके तहत कम से कम 5 साल की सजा होगी, जिसे बढ़ाकर 7 साल भी किया जा सकता है.
  5. इसके साथ ही नए बिल में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी की परिभाषा के दायरे को भी बढ़ाया गया है. अभी तक सिर्फ बच्चों से जुड़े अश्लील वीडियो इस कानून के दायरे में आते थे. लेकिन अब तस्वीर, एनिमेटेड वीडियो, कार्टून को भी इस दायरे में शामिल किया गया है.
  6. बच्चों से जुड़े पोर्न रखने के अपराध में पहली बार 5000 रुपये और दूसरी बार अपराध साबित होने पर 15000 का जुर्माना लगेगा. चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को प्रचारित, प्रसारित करने, उसे बेचने पर 3 साल तक की सजा, इसे बढ़ाकर 5 साल भी किया जा सकता है. 

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वहीं पॉक्सो बिल पर चर्चा के दौरान उन्नाव रेप पीड़िता पर जानलेवा हमला का मुद्दा भी सदन में उठा. टीएमसी की शताब्दी रॉय ने मामले को उठाते हुए स्मृति ईरानी से मां होने के जवाब मांगा. बहरहाल अब संसद के दोनों सदनों से बिल के पास होने के बाद अब राष्ट्रपति के पास बिल को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद ये बिल कानून का रूप ले लेगा.

फिलहाल 6 लाख यौन अपराधी हैं. उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में यौन अपराध के एक लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं. सरकार ने 123 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए फंड सैंक्शन कर दिए हैं. 2021 तक इन कोर्ट्स के बनने की उम्मीद है.

Video: लोकसभा में पॉक्सो संशोधन बिल मंज़ूर, 12 साल के बच्चों से यौन अपराध पर फांसी

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