- लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को 30 मई 2026 से देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया है
- सरकार ने वरिष्ठता के बजाय ऑपरेशनल अनुभव वाले अधिकारी को सीडीएस पद पर नियुक्त करने का रणनीतिक निर्णय लिया है
- उन्हें सेना सुधारों और थिएटर कमांड योजना को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रामणि देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ होंगे. वह 30 मई 2026 को पद संभालेंगे. वह जनरल अनिल चौहान की जगह लेंगे. सरकार के इस फैसले को बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है. इससे साफ संकेत मिला है कि अब सिर्फ वरिष्ठता के आधार पर सीडीएस नहीं चुना जाएगा. सरकार ऐसे अधिकारी को मौका दे रही है, जिसके पास बड़ा ऑपरेशनल अनुभव हो. लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रामणि फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में मिलिट्री एडवाइजर हैं. वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के साथ काम कर रहे हैं. उनसे पहले जनरल अनिल चौहान भी इसी भूमिका में थे. बाद में उन्हें सीडीएस बनाया गया था.
दो अफसर थे रेस में
इस बार भी सरकार ने मौजूदा सेना प्रमुख या नौसेना प्रमुख को नहीं चुना. रणनीतिक हलकों में एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और जनरल उपेंद्र द्विवेदी को मजबूत दावेदार माना जा रहा था. अपने बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहने वाले एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह पहले ही इस रेस से बाहर थे . लेकिन सरकार ने सेना के एक रिटायर्ड थ्री-स्टार अधिकारी पर भरोसा जताया. सरकार के इस फैसले से वायुसेना और नौसेना के अधिकारियों में नाखुशी है . उनको लगता है कि ऐसा होता रहा तो उनका नंबर कब आयेगा .
खैर यह एक राजनीतिक फैसला है जिसमें सरकार का भरोसा बहुत मायने रखता हैं . जब देश में पहली बार सीडीएस पद बनाया गया तो उस वक्त यह फोर स्टार जनरल के लिये रखा गया. तब जनरल विपिन रावत को सीडीएस बनाया गया . हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो जाने पर करीब एक साल यह पद खाली रहा . बाद में सीडीएस पद को लेकर नियमों में बदलाव किया गया . इसके बाद थ्री स्टार रिटायर्ड अधिकारी जनरल अनिल चौहान को सीडीएस बनाया गया .
जनरल सुब्रामणि का 40 साल से लंबा है करियर
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रामणि का सैन्य करियर 40 साल से ज्यादा लंबा रहा है. उन्हें दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन मिला था. वहीं देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान ने गोरखा राइफल्स में कमीशन लिया था . जनरल सुब्रामणि ने सेना में रहने के दौरान उन्होंने देश के कई संवेदनशील इलाकों में सेवा दी.असम में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए. जम्मू-कश्मीर में भी अहम जिम्मेदारियां संभालीं. पूर्वोत्तर और उत्तरी सीमाओं पर भी काम किया.
तेज फैसला लेने वाला माना जाता है
सेना के कई अधिकारी उन्हें तेज फैसले लेने वाला लीडर मानते हैं. उन्हें तकनीक की अच्छी समझ रखने वाला अधिकारी भी कहा जाता है. उनके साथ काम कर चुके कई अधिकारी कहते हैं कि वह सरल स्वभाव के हैं. वह अपनी टीम और जवानों का पूरा ध्यान रखते हैं. लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थिएटर कमांड सुधार को पूरा करना होगा. यह भारतीय सेना में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इस योजना के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना को मिलाकर संयुक्त कमांड बनाई जाएगी. इसके तहत चीन सीमा के लिए अलग थिएटर कमांड होगी. पाकिस्तान मोर्चे के लिए अलग कमांड बनाई जाएगी. हिंद महासागर क्षेत्र के लिए मैरीटाइम थिएटर कमांड होगी. लेकिन इस योजना पर लंबे समय से काम चल रहा है. तीनों सेनाओं के बीच इसको लेकर कई मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं. कमांड और संसाधनों को लेकर सहमति बनाने में समय लगा.
मौजूदा सीडीएस जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल में इस योजना को आगे बढ़ाया गया. अब इसे जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी राजा सुब्रामणि के पास होगी. उन्हें आधुनिक युद्ध की नई चुनौतियों से भी निपटना होगा. आज ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-टेक हथियारों का दौर है. ऐसे में भारतीय सेना को और आधुनिक बनाना जरूरी माना जा रहा है. ऐसे में जनरल राजा सुब्रामणि का कार्यकाल भारतीय सैन्य सुधारों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
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