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'समय युद्ध का चौथा आयाम', रण संवाद में CDS अनिल चौहान ने बताया- भविष्य में कैसे लड़े जाएंगे जंग?

सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि आज हम फिर से एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां आप कह सकते हैं कि समय युद्ध का चौथा आयाम है. ऐसा इसलिए क्योंकि युद्ध का दायरा (बैटल स्पेस) बहुत अधिक विस्तृत हो गया है."

'समय युद्ध का चौथा आयाम',  रण संवाद में CDS अनिल चौहान ने बताया- भविष्य में कैसे लड़े जाएंगे जंग?
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान.
  • भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने मॉडर्न युद्ध के विभिन्न आयामों और उनके बदलावों पर चर्चा की.
  • उन्होंने कहा कि विमानों के आविष्कार ने युद्ध को भौतिक क्षेत्र के अलावा तीसरा आयाम प्रदान किया है.
  • अनिल चौहान ने युद्ध के चौथे आयाम के रूप में समय को बताया, जो युद्ध क्षेत्र के दायरे को व्यापक बनाता है.
बेंगलुरु:

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CSD) अनिल चौहान ने शुक्रवार को 'मॉडर्न एज वॉर' पर बड़ी डिटेल से अपनी बातें रखी.  कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित ट्राई सर्विस सेमिनार 'रण संवाद' में CDS अनिल चौहान ने युद्ध के अलग-अलग आयाम और उसमे आ रही बदलावों पर अपनी बातें रखी. अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि युद्ध राजनीति के अधीन होता है और विशेष रूप से लोकतांत्रिक सरकारें जनमत की बंधक होती हैं." 

विमानों के आविष्कार ने युद्ध को तीसरा आयाम दियाः अनिल चौहान

फिर उन्होंने आगे कहा कि जब युद्ध किसी अलग ही वास्तविकता में लड़ा जा रहा होता है तो इसे समझना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि पूरे इतिहास में हमने युद्ध को केवल भौतिक क्षेत्र में ही देखा है. जब भी युद्ध भौतिक क्षेत्र में होता है, हमने देखा है कि वह द्वि-आयामी होता था. विमानों आदि के आविष्कार ने इस युद्ध को एक तीसरा आयाम दिया. 

सीडीएस अनिल चौहान ने आगे कहा कि आज हम फिर से एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां आप कह सकते हैं कि समय युद्ध का चौथा आयाम है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि युद्ध का दायरा (बैटल स्पेस) बहुत अधिक विस्तृत हो गया है."

'मॉडर्न वॉर में कई चीजें एक साथ होती रहती है'

समय को युद्ध का नया आयाम बताते हुए CDS ने आगे कहा, "टाइम वॉर का एक नया आयाम है. इसमें अलग-अलग घटनाएं अलग-अलग स्पीड से हो रही होती है. यह अपने आप में एक चुनौती है. हमें एक ही युद्धक्षेत्र पर संकुचित और विस्तृत समय को समझने की जरूरत है, क्योंकि तब यह एक नए तरह का आयाम पैदा करता है. 

'साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम युद्ध के पांचवें व छठे आयाम'

भविष्य के जंग के तौर-तरीकों पर सीडीएस ने कहा कि साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम युद्ध के पांचवें और छठे आयाम बन सकते हैं. सातवाँ आयाम cognitive warfare हो सकता है. हम शायद भविष्य में न केवल बहु-क्षेत्रीय (multi-domain), बल्कि बहु-आयामी युद्ध के युग की ओर बढ़ रहे हैं."

'सभी चीजों से मिलकर दुश्मन की कार्यक्षमता को समाप्त करना मकसद'

जनरल अनिल चौहान ने आगे कहा, "यह युद्ध का अगला चरण है. एक स्तर पर, हम काइनेटिक को नॉन-काइनेटिक के साथ, संपर्क को गैर-संपर्क के साथ, मानव-युक्त को मानव-रहित के साथ, मैनुअल को ऑटोनॉमस के साथ, और युद्ध के पुराने क्षेत्रों को नए क्षेत्रों के साथ मिलाने की कोशिश कर रहे हैं. अगले स्तर पर, हम तीन क्षेत्रों यानी नए आयामों का मेल देखते हैं, जो बहु-क्षेत्रीय अभियान, बहु-आयामी अभियान और कई क्षेत्रों में एक साथ चलने वाले अभियान तैयार कर रहे हैं. इन सबका असर विनाश नहीं है."

असल में इससे दुश्मन की कार्यक्षमता पूरी तरह से ठप पड़ जाती है. इसमें छल और भ्रम शामिल हो सकता है, और अंत में यह एक तरह की ठप पड़ जाने की स्थिति की ओर ले जाता है. 

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लेखक के बारे में
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प्रभांशु रंजन
Chief Sub Editor
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