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कारोबारियों से फिरौती के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खतरनाक प्लान, RERA, GST डेटा से निकाल रहे नाम

जांच एजेंसियों के मुताबिक, गैंग के सदस्य जिनमें कई नाबालिग स्कूल ड्रापआउट और पहली बार अपराध करने वाले शामिल हैं. GST और RERA पोर्टल से डेटा खंगालते थे. कारोबार, प्रोजेक्ट, मालिक की जानकारी, टर्नओवर, प्रमोटर, प्रोफाइल सब कुछ जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, उसे हथियार बना दिया गया.

कारोबारियों से फिरौती के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खतरनाक प्लान, RERA, GST डेटा से निकाल रहे नाम
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  • MP में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कारोबारियों को निशाना बनाकर डिजिटल एक्सटॉर्शन नेटवर्क बनाया है
  • उज्जैन के राजपाल सिंह चंद्रावत ने फिरौती से अपना बिजनेस साम्राज्य स्थापित करने का प्रयास किया
  • गैंग ने भोपाल, इंदौर, अशोकनगर, खरगोन समेत कई शहरों के कारोबारियों से करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूली
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नई दिल्ली/भोपाल:

सरकारी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से शुरू होकर अब गोलियों तक यह खेल पहुंच चुका है.मध्य प्रदेश में कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने एक ऐसा डिजिटल एक्सटॉर्शन नेटवर्क खड़ा कर लिया है, जहां डर नहीं डेटा हथियार बन चुका है.GST और RERA पोर्टल से कारोबारियों की पहचान, Signal जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप से धमकियां और विदेश में बैठे हैंडलर यह पूरा तंत्र अब पुलिस के सामने एक नए किस्म की चुनौती बनकर उभरा है.लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे डेटा, डिजिटल निगरानी और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए अपना साम्राज्य चला रहे हैं.

अपराध नहीं सुनयोजित ऑपरेशन 

NDTV की पड़ताल में सामने आया है कि राज्यभर में 5 से 15 करोड़ रुपये तक की फिरौती के लिए कारोबारियों को निशाना बनाया जा रहा है.यह कोई बेतरतीब अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ऑपरेशन है, जहां पहले डेटा खंगाला जाता है, फिर टारगेट चुना जाता है और उसके बाद धमकी देकर वसूली की जाती है.

इस नेटवर्क के केंद्र में उज्जैन का राजपाल सिंह चंद्रावत है, जो खरगोन के कपास व्यापारी दिलीप राठौर से 10 करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में अहम कड़ी बनकर सामने आया है, लेकिन जांच में यह भी सामने आया कि राजपाल सिर्फ वसूली नहीं कर रहा था, वह इस पैसे से अपना “बिजनेस साम्राज्य” खड़ा करना चाहता था. एक वरिष्ठ अधिकारी ने NDTV से कहा, “राजपाल खुद को कारोबारी बनाना चाहता था, लेकिन उसके पास पूंजी नहीं थी. एक्सटॉर्शन उसके लिए शॉर्टकट बन गया.”

जांच में पता चला कि उसने एक कंपनी भी बनाई थी और बड़े कॉरपोरेट्स से सब-कॉन्ट्रैक्ट लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कम टर्नओवर के कारण उससे भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगा जा रहा था. यहीं से उसकी कड़ी जुड़ी विदेश में बैठे हैंडलर हैरी बॉक्सर से जो टारगेट पहचानने, धमकी देने और पैसा जुटाने की पूरी रणनीति चला रहा था.

इन राज्यों में फैला है नेटवर्क

यह नेटवर्क सिर्फ मालवा तक सीमित नहीं रहा. NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक इंदौर, भोपाल, अशोकनगर, महू और यहां तक कि मुंबई से जुड़े कारोबारी भी इस गैंग के निशाने पर थे. इंदौर के एक बड़े कोयला व्यापारी का नाम भी लिस्ट में शामिल था. पैटर्न साफ है पहले पहचान, फिर धमकी और आखिर में वसूली. ये भी पता लगा कि राजपाल का नेटवर्क गुजरात समेत पड़ोसी राज्यों तक फैला हुआ था.

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सबसे खतरनाक हिस्सा है टारगेट की पहचान का तरीका

जांच एजेंसियों के मुताबिक, गैंग के सदस्य जिनमें कई नाबालिग स्कूल ड्रापआउट और पहली बार अपराध करने वाले शामिल हैं. GST और RERA पोर्टल से डेटा खंगालते थे. कारोबार, प्रोजेक्ट, मालिक की जानकारी, टर्नओवर, प्रमोटर, प्रोफाइल सब कुछ जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, उसे हथियार बना दिया गया.एक अधिकारी ने कहा, “उन्हें सब पता होता था परिवार, कर्मचारी, पैसे यही डर पैदा करता है.”

इसके बाद आने वाले कॉल सिर्फ धमकी नहीं होते थे. वे पूरी जानकारी के साथ आते थे, बल्कि बेहद सटीक और निजी जानकारी. WhatsApp कॉल, वॉयस नोट और अब Signal ऐप के जरिए जिसे ट्रेस करना बेहद मुश्किल है उससे धमकियां दी जाती थीं.  गैंग के कोर लेयर और अंतरराष्ट्रीय हैंडलर Signal का इस्तेमाल कर रहे हैं.

NDTV को मिले डिजिटल ट्रेल्स से यह भी संकेत मिले हैं कि राजपाल से जुड़े खातों में विदेश, खासकर अमेरिका से पैसे आए हैं. यह पूरा ऑपरेशन बेहद संगठित, परतदार और चिंताजनक है.करीब 10 दिन पहले मुरैना से प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी हुई जिस पर 20,000 रुपये का इनाम था और दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले थे. SIT की हिरासत में शुक्ला इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है.

SIT चीफ के खुलासे हैरान कर देंगे

SIT प्रमुख DIG राहुल लोढा ने प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद कहा था “राज्य में लॉरेंस गैंग से जुड़े सभी मामलों की जांच SIT ने अपने हाथ में ली है और इसमें बड़ी सफलता मिली है.प्रदीप शुक्ला इस नेटवर्क का अहम हिस्सा था, उसे मुरैना से गिरफ्तार किया गया है. जांच में प्रदीप शुक्ला के लॉरेंस बिश्नोई गैंग से सीधे संबंध के सबूत मिले हैं. प्रदीप शुक्ला, हैरी बॉक्सर का करीबी सहयोगी है. वही शूटर्स की व्यवस्था करता था.मध्य प्रदेश में गैंग के ऑपरेशन को संभालने की जिम्मेदारी प्रदीप शुक्ला के पास थी. SIT अब उससे पूछताछ कर नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है.हैरी बॉक्सर समेत कई आरोपी अभी फरार हैं. इस गैंग ने भोपाल, खरगोन, इंदौर और अशोकनगर के बड़े कारोबारियों को करोड़ों की फिरौती के लिए धमकाया.”

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विदेश से सीधे जुड़े नेटवर्क 

इस पूरे नेटवर्क के शीर्ष पर हैरी बॉक्सर उर्फ हरि चंद जाट है, जो कथित तौर पर नॉर्थ अमेरिका से ऑपरेट कर रहा है. उसके नीचे रितिक बॉक्सर जैसे हैंडलर हैं, जो अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद होने के बावजूद कथित तौर पर ऑपरेशन को निर्देश दे रहे हैं. इसके बाद आते हैं राजपाल चंद्रावत और हाल ही में मुरैना से गिरफ्तार प्रदीप शुक्ला जैसे मिड-लेवल ऑपरेटिव, जो विदेशी हैंडलर्स और स्थानीय गुर्गों के बीच कड़ी का काम करते हैं.

इस पिरामिड के सबसे नीचे हैं फील्ड ऑपरेटिव नाबालिग लड़के, जो अक्सर स्कूल छोड़ चुके होते हैं और जिन्हें इंस्टाग्राम के जरिए गैंग में जोड़ा जाता है. गैंग की चमक-दमक भरी लाइफस्टाइल दिखाकर उन्हें फंसाया जाता है. जांच में यह भी सामने आया कि शुक्ला ने जयपुर के 19 वर्षीय युवक मनीष जांगिड़ को अशोकनगर में पेट्रोल बम हमला करने के लिए तैयार किया था. यह युवक इंस्टाग्राम के जरिए गैंग से जुड़ा और वीडियो कॉल पर उसे ट्रेनिंग दी गई यहां तक कि बम बनाना भी सिखाया गया.

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जमानत आसान, नेटवर्क पकड़ना मुश्किल...

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “ये जानबूझकर नाबालिगों को इस्तेमाल करते हैं जमानत आसान, नेटवर्क पकड़ना मुश्किल.” खरगोन में यह साजिश सीधे हिंसा में बदल गई. दिलीप राठौर के घर पर तीन बार फायरिंग की कोशिश हुई और 16 मार्च को गोलियां चलीं. अगले ही दिन फायरिंग का वीडियो भेजकर 10 करोड़ की मांग की गई. अब तक मध्य प्रदेश और राजस्थान से 24 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.NDTV को जानकारी मिली है कि पिछले एक महीने में ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, महू, अशोकनगर और खरगोन में कम से कम 6 ऐसे मामले सामने आए हैं.पुलिस अधिकारी मानते हैं कि कई पीड़ित डर के कारण सामने नहीं आए और संभवतः पैसे देकर मामला खत्म कर दिया.

एक अधिकारी ने साफ कहा, “यह कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं यह एक संगठित नेटवर्क है.” सबसे बड़ा खतरा यह है कि ऐसे कई “राजपाल” अलग-अलग इलाकों में सक्रिय हो सकते हैं जो डेटा जुटाकर इस ग्लोबल एक्सटॉर्शन मशीन को चला रहे हैं. जैसे-जैसे STF और SIT की निगरानी में जांच आगे बढ़ रही है, एक बात साफ होती जा रही है यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है. यह संगठित अपराध, डिजिटल इंटेलिजेंस और वैश्विक नेटवर्क का खतरनाक संगम है. GST डेटा से लेकर Signal चैट तक, उज्जैन से लेकर उत्तर अमेरिका तक अब एक्सटॉर्शन की अर्थव्यवस्था पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है.और सिस्टम अभी इसकी असली गहराई को समझना शुरू ही कर पाया है.

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