भारत के दुश्मन खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गोल्डी बराड़ ने दावा किया कि उसने ही कनाडा में निज्जर की हत्या करवाई. हत्या की वजह निज्जर के युवाओं को ड्रग्स के जाल में फंसाना बताया है. बता दें कि बीते सालों में लॉरेंस बिश्नोई और उसकी गैंग का आतंक भारत से लेकर कनाडा अमेरिका तक फैल गया. जिसका सबसे बड़ा काम एक्सटॉर्शन यानी रंगदारी और हथियारों की सप्लाई है. इस गैग को बनाने वाले लॉरेंस बिश्नोई की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है. आज हम आपको बताएंगे कि कैसे एक अच्छे घर का लड़का जुर्म की दुनिया में खौफ का पर्याय बन गया और उसकी गर्लफ्रेंड को जिंदा क्यों जला दिया गया था.
पहली नजर का इश्क
कहानी की शुरुआत होती है पंजाब के अबोहर से. लॉरेंस के पिता खुद हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल थे. घर में करोड़ों की जमीन-जायदाद थी. यानी जिंदगी में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. लेकिन कहते हैं न कि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही लॉरेंस की नजर एक लड़की पर पड़ी. ये सिर्फ पसंद नहीं थी, ये था पहली नजर का गहरा इश्क. दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाईं और स्कूल के बाद चंडीगढ़ के मशहूर डीएवी कॉलेज में एक साथ दाखिला भी लिया.
जिंदगी का सबसे खौफनाक मोड़
चंडीगढ़ पहुंचते ही इस कहानी में एक नया मोड़ आता है. लॉरेंस का मन किताबों से ज्यादा कॉलेज की राजनीति में रमने लगा. उसने SOPU नाम का एक छात्र संगठन खड़ा किया. उसका एक ही सपना था- कॉलेज का प्रेसिडेंट बनना और कैंपस में अपना सिक्का जमाना.

साल 2011 का वो कॉलेज चुनाव आया. लॉरेंस ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन नतीजा उम्मीद के उलट रहा. उसकी पार्टी हार गई. इस हार ने उसे अंदर तक झकझोर दिया, लेकिन असली झटका लगना अभी बाकी था. दुश्मनी इस कदर बढ़ चुकी थी कि विरोधी गुट ने सारी हदें पार कर दीं. उन्होंने लॉरेंस को घुटनों पर लाने के लिए उसकी सबसे बड़ी ताकत, उसकी मोहब्बत को निशाना बनाया. 2011 में ऐसी खबरें भी आईं कि विरोधी गुट ने उसकी गर्लफ्रेंड को जिंदा जला दिया है. हालांकि इस घटना को एक हादसे का नाम दिया गया. हालांकि NDTV लॉरेंस की गर्लफ्रेंड से जुड़ी इस घटना की पुष्टि नहीं करता है. तमाम खबरों में बताया जाता है कि इस घटना के बाद से ही लॉरेंस के अंदर का आशिक मर गया, और पीछे रह गई तो सिर्फ और सिर्फ बदले की सुलगती आग.
ये भी पढ़ें: जोधपुर के महाराजा गज सिंह: महज 4 साल में मिली गद्दी, इंदिरा गांधी का वो फैसला, जिसने बदल दिया पूरा खेल
किताबें छूटीं, कट्टा उठाया और शुरू हुआ जुर्म का सफर
प्यार की राख से इंतकाम बाहर निकला, उसने लॉरेंस के हाथों से हमेशा के लिए कलम छीन ली और उसकी जगह थमा दी बंदूक. अपनी मोहब्बत की मौत का बदला लेने के लिए उसने हथियार उठा लिए.
कैंपस की लड़ाइयों से शुरू हुआ यह सिलसिला धीरे-धीरे खूनी गैंगवार में बदल गया. विरोधी गुट के छात्र नेताओं पर जानलेवा हमले हुए, पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज होने लगीं और देखते ही देखते कॉलेज का वो शांत लड़का पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के पुलिस रिकॉर्ड्स में एक मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर बन गया.
सलमान खान से ये 'तीस साल' पुरानी अदावत?
अब सवाल उठता है कि जो लड़का पंजाब-हरियाणा की सीमाओं में अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन रहा था, उसका बॉलीवुड के भाईजान यानी सलमान खान से क्या लेना-देना?
इसके लिए हमें साल 1998 में जाना होगा. राजस्थान में फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान सलमान खान पर काले हिरण के शिकार का आरोप लगा था. उस वक्त लॉरेंस महज 5 साल का बच्चा रहा होगा. लेकिन बिश्नोई समाज के लिए काला हिरण सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि भगवान की तरह पूजनीय है. अपने समाज की इस आस्था को ठेस पहुंचता देख लॉरेंस ने इसे अपनी निजी दुश्मनी मान लिया.
बरसों बाद भी वो गुस्सा ठंडा नहीं हुआ. साल 2024 में जब मुंबई में बाबा सिद्दीकी की सरेआम हत्या कर दी गई, जो सलमान खान के बेहद करीबी थे, तो इसके तार सीधे लॉरेंस गैंग से जुड़े. सोशल मीडिया पर साफ शब्दों में चेतावनी दी गई कि जो भी सलमान खान की मदद करेगा, वो अपना हिसाब-किताब तैयार रखे. यानी कॉलेज की रंजिश से शुरू हुआ यह सफर अब बॉलीवुड के गलियारों तक खौफ का साया बन चुका है.

सिद्धू मूसेवाला की हत्या की वजह?
अगस्त 2021 में लॉरेंस के करीबी साथी विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या हुई थी. बिश्नोई गैंग का मानना था कि सिद्धू मूसेवाला ने इस हत्या में शामिल आरोपियों (विशेषकर मैनेजर शगनप्रीत) को पनाह दी और मदद की. बिश्नोई गैंग का आरोप था कि मूसेवाला विरोधी बंबीहा गैंग को आर्थिक और अंदरूनी मदद पहुंचाते थे. 29 मई 2022 को पंजाब सरकार द्वारा सुरक्षा कम किए जाने के तुरंत बाद लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के शूटरों ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी.
ये भी पढ़ें: मारवाड़ी सेठों ने जब चुरू-सीकर के राजा का घमंड चूर किया, बसा लिया चमचमाता शहर, अंग्रेज अफसर भी सिर झुकाकर करते थे सलाम
ये कहानी थी लॉरेंस बिश्नोई की. आज वो गुजरात में साबरमती जेल में सख्त पहरे में बंद है. लेकिन हैरानी और चिंता की बात ये है कि जेल की ये ऊंची दीवारें भी उसके खौफ को बाहर आने से नहीं रोक पा रही हैं. एक ऐसा लड़का जिसके पास चमकता हुआ भविष्य हो सकता था, लेकिन बदले की आग ने उसे देश के सबसे बड़े गैंगस्टर्स में से एक बना दिया.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं