हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में मंगलवार शाम बादल फटने की घटना ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं. तिन्नो-कोठी और कोलांग क्षेत्र के मुंची नाला और चपॉर नाला में अचानक आए तेज बहाव से भारी नुकसान हुआ. सबसे बड़ा नुकसान मुंची नाला के पुल को हुआ, जो पूरी तरह बह गया. पुल बहने से नाले के पार जाने वाला संपर्क मार्ग बंद हो गया और लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया.
सड़क, कूहल और पेयजल व्यवस्था को बड़ा नुकसान
बाढ़ जैसे हालात के कारण इलाके की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं. सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली कूहलें बह गईं जबकि पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइनें और पानी की टंकियां भी नुकसान की चपेट में आ गईं. इससे ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. प्रशासन अब क्षतिग्रस्त सुविधाओं को जल्द बहाल करने की तैयारी में जुटा है.
खेतों में घुसा नाले का पानी
तेज बहाव के दौरान नाले का पानी खेतों की ओर मुड़ गया, जिससे बड़ी मात्रा में कृषि भूमि प्रभावित हुई. कई किसानों की खड़ी फसलें बहाव की चपेट में आकर खराब हो गईं. ग्रामीणों का कहना है कि जिन खेतों में फसल तैयार थी, वहां सबसे अधिक नुकसान हुआ है. फसलों तक पहुंचने वाले रास्ते भी प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
मवेशी और मजदूर फंसे
लाहौल-स्पीति की विधायका अनुराधा राणा ने बताया कि इस आपदा से तीन गांव प्रभावित हुए हैं. रास्ता बह जाने के कारण कुछ मजदूर और ग्रामीणों के मवेशी नाले के पार फंस गए थे. हालांकि प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया. इससे किसी बड़े हादसे की आशंका टल गई.
ग्रामीणों ने राहत और मुआवजे की मांग उठाई
विधायका ने बताया कि पानी की सप्लाई से जुड़ी पाइपलाइनें और सिंचाई व्यवस्था को जल्द बहाल किया जाएगा. वहीं नाले के पार स्थित कृषि भूमि से फसल निकालने के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करने, पुल और सड़क को प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने तथा किसानों और पशुपालकों को उचित राहत और मुआवजा देने की मांग की है.
यह भी पढ़ें- शोर में गुम हो गए संसद के 7 हजार मिनट और हंगामे के कारण 175 करोड़ रुपये बर्बाद
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं