- कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार का समर्थन करने पर जिम संचालक दीपक कुमार को गंभीर आर्थिक और सामाजिक नुकसान हुआ है
- बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठनों ने मुस्लिम दुकानदार की 'बाबा' नाम की दुकान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था.
- दीपक कुमार ने विवाद के दौरान अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया, जिससे मामला स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया.
उत्तराखंड के कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार का पक्ष लेना जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ 'मोहम्मद दीपक' के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है. इस विवाद के बाद उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर उनके व्यवसाय पर पड़ा है. दीपक के 'हल्क जिम' में जहाँ पहले 150 के करीब सदस्य नियमित रूप से आते थे, वहीं इस पूरे घटनाक्रम और उपजे विवाद के बाद अब यह संख्या घटकर 15 से भी कम रह गई है. वैचारिक स्टैंड लेने के कारण लोग उनसे किनारा कर रहे हैं, जिससे उनके जिम का भविष्य अब संकट में दिखाई दे रहा है.
26 जनवरी को उत्तराखंड के कोटद्वार में बाबा गारमेंट्स की दुकान में बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठन ने आकर हंगामा खड़ा किया था और हंगामा के पीछे वजह दुकान का नाम बाबा था, क्योंकि यह दुकान एक मुस्लिम की थी बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठनों ने इस बात पर आपत्ति दर्शन जताई थी कि बाबा नाम मुस्लिम दुकानदार नहीं रख सकता, क्योंकि कोटद्वार में बजरंगबली का प्रसिद्ध मंदिर सिद्धबली है और सिद्धबली को सिद्धबली बाबा के नाम से कोटद्वार के लोग जानते हैं और पुकारते हैं. यही बाबा नाम इस पूरे विवाद की जड़ था.
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यह विवाद 31 जनवरी को और बढ़ गया, जब बड़ी मात्रा में बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठन एक बार फिर से न सिर्फ बाबा गारमेंट्स की दुकान के आगे विरोध करने आए, बल्कि दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक के जिम के सामने भी आ खड़े हुए और पुलिस ने बीच बचाव किया. लेकिन 26 जनवरी से लेकर 31 जनवरी और उसके बाद लगातार यह मामला सुर्खियों में रहा.
मानसिक संकट से जूझ रहे हैं दीपक कुमार
कोटद्वार के बद्रीनाथ मार्ग पर स्थित 'हल्क जिम' के संचालक दीपक कुमार इन दिनों एक गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं. एक समय था जब उनके जिम में लगभग 150 युवा कसरत करने आते थे, लेकिन एक हालिया विवाद और अप्रिय घटना के बाद यह संख्या घटकर महज 15 रह गई है. दीपक बताते हैं कि जिम का मासिक किराया ही 40,000 रुपये है और ऊपर से घर के लोन की 16,000 रुपये की किस्त का बोझ भी उन पर है. हालात इतने चुनौतीपूर्ण हैं कि उनकी 70 वर्षीय बुजुर्ग मां को आज भी घर चलाने में सहयोग के लिए चाय की दुकान (टी स्टॉल) लगानी पड़ रही है.

जिम में काम ठप होने के कारण अब घर का बुनियादी खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है. दीपक ने जब जिम आने वाले युवाओं से संपर्क किया, तो डरे हुए छात्रों ने बताया कि जिम में हुई घटना के कारण उनके माता-पिता उन्हें वहां भेजने से मना कर रहे हैं. भविष्य की चिंता में डूबे दीपक कहते हैं कि उन्होंने बच्चों को बुलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सुरक्षा के डर और बदनामी के चलते लोग अब उनके जिम से किनारा कर रहे हैं, जिससे उनके सालों की मेहनत और निवेश दांव पर लग गया है.
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