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कोच्चि में ग्रैंड मुफ्ती ने कही महिलाओं को घर में रखने की बात, जानें केरल की बेटियों ने कैसे रचा इतिहास

भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर ने कहा था कि महिलाएं सोने की तरह होती हैं, उनको संभालकर रखना चाहिए. उनको बाहर नहीं निकलने देना चाहिए. महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में लाने से बर्बादी हो सकती है.

कोच्चि में ग्रैंड मुफ्ती ने कही महिलाओं को घर में रखने की बात, जानें केरल की बेटियों ने कैसे रचा इतिहास
देश का नाम रोशन करने वाली केरल की महिलाओं के बारे में जानें.

कोच्चि में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद ने महिलाओं को घरों के भीतर रखने की वकालत की और उनकी तुलना सोने के गहनों से की. लेकिन यह बयान ऐसे केरल में आया है, जिसे भारत में महिला शिक्षा, सामाजिक प्रगति और राजनीतिक भागीदारी का मॉडल माना जाता है. स्थानीय शासन में भी महिलाओं की मजबूत भागीदारी है. केरल में पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू है, जिसके चलते हजारों महिलाएं ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही हैं.

केरल की कुछ महिलाओं के नाम और काम जिन्होंने इतिहास रचा

  • दक्षायणी वेलायुधन – संविधान सभा की सदस्य.
  • एनी मास्कारेन – स्वतंत्रता सेनानी और शुरुआती महिला सांसदों में शामिल.
  • अम्मू स्वामीनाथन – संविधान सभा सदस्य और महिला अधिकारों की आवाज.
  • जस्टिस अन्ना चांडी – भारत की पहली महिला हाईकोर्ट जज.
  • जस्टिस फातिमा बीवी – भारत के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज.
  • के.आर. गौरीअम्मा – केरल की सबसे प्रभावशाली महिला राजनेताओं में से एक.
  • के.के. शैलजा – निपाह और कोविड प्रबंधन के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली नेता

देश का नाम रोशन करने वालीं केरल की बेटियां

भारत की पहली महिला हाईकोर्ट जज जस्टिस अन्ना चांडी केरल के तिरुवनंतपुरम से थीं.  उन्होंने साल 1937 में त्रावणकोर में एक जिला अदालत में देश की पहली महिला न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था.9 फरवरी 1959 को केरल हाई कोर्ट की जज बनीं थीं. वहीं सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज  जस्टिस एम. फातिमा बीवी का जन्म केरल के पथानामथिट्टा में हुआ था.वह 1989 में न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली देश की पहली महिला जज थीं, बल्कि उच्च न्यायपालिका में पहुंचने वाली पहली मुस्लिम महिला भी थीं.

ग्रैंड मुफ्ती के बयान की हो रही आलोचना

के.आर. गौरीअम्मा का नाम केरल की सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली महिला नेताओं में शामिल है, उनको केरल की 'लौह महिला' भी कहा जाता था.उनका जन्म केरल के अलाप्पुझा में हुआ था. एनी मास्केरीन स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही शुरुआती महिला सांसदों में भी शामिल थीं. उनका जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ था. 

देश की इन दिग्गज महिलाओं का ताल्लुक केरल से था. इसके बावजूद ग्रैंड मुफ्ती ने केरल में महिलाओं को घर में रखे जाने की वकालत की, जिसे लेकर उनकी जमकर आलोचना हो रही है. 

शिक्षा के मामले में  केरल की महिलाएं पूरे देश में सबसे 

केरल महिलाओं को शिक्षा के मामले में देश के सबसे आगे राज्य में गिना जाता है. 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में महिला साक्षरता दर 92.1% थी, जबकि NFHS-5 (2019-21) के मुताबिक 15-49 आयु वर्ग की 98.3% महिलाएं साक्षर थीं और 77% महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी की थी.

 ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर ने महिलाओं पर क्या कहा?

भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर ने कहा था कि महिलाएं सोने की तरह होती हैं, उनको संभालकर रखना चाहिए. उनको बाहर नहीं निकलने देना चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में लाने से बर्बादी हो सकती है. उन्होंने कहा कि जिस तरह डिब्बे में सुरक्षित रखे हार की खूबसूरती बनी रहती है. वहीं सड़क किनारे पड़े हार को आने-जाने वाले छूते हैं जिससे वह अपनी कीमत खो देता है. वैसे ही महिलाओं को घरों में रहना चाहिए. ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि ये कहा गया है कि महिलाओं को अपने घरों के भीतर रहना चाहिए. उनको सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए.

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