- उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन में चार ट्रेकर्स के शव बरामद किए गए हैं, जबकि चार की तलाश जारी है.
- बचाव अभियान में SDRF, NDRS, नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग और वन विभाग की टीमें सक्रिय रूप से लगी हुई हैं.
- उत्तराखंड में कुल 83 ट्रैकिंग रूट हैं, जिनमें से सबसे अधिक रूट उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं.
उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित केदारताल में ट्रेकिंग के दौरान लापता हुए ट्रेकर्स में से 4 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं. 27 अक्टूबर को 12 सदस्यीय दल गंगोत्री से केदारताल ट्रैक के लिए रवाना हुआ था. मौसम खराब होने के बाद यह दल वापस लौट रहा था, तभी रास्ते में हिमस्खलन (एवलांच) आ गया और दल इसके चपेट में आ गया. इस दौरान चार सदस्य, तीन पोर्टर और एक कुक को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया था. लेकिन 7 पर्वतारोही और 1 गाइड फंस गए थे, जिनकी लगातार तलाश की जा रही थी.

उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर गए दल के 4र सदस्यों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि शेष 4 लोगों की तलाश जारी है. बचाव अभियान में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग और वन विभाग की टीमें लगातार जुटी हुई हैं. पिछले पांच दिनों से लापता लोगों की तलाश की जा रही थी. केदारताल ट्रैक पर कच्ची धाम के समीप आठ ट्रेकर्स हिमस्खलन में फंस गए थे. लगभग 4000 मीटर की ऊंचाई पर चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एसडीआरएफ और निम की टीम ने दो महिला और दो पुरुष ट्रेकर्स के शव बरामद किए हैं. शेष चार लोगों की तलाश जारी है.

उत्तराखंड के किस जिले में सबसे अधिक ट्रैकिंग रूट हैं?
उत्तराखंड में ट्रेकिंग के दौरान होने वाला यह पहला हादसा नहीं है. इससे पहले भी कई दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा चुकी है. हर बार यह सवाल उठता है कि ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए ठोस गाइडलाइन कब बनेगी और ऐसा तंत्र कब विकसित होगा, जिससे पर्वतारोहियों को समय पर बचाया जा सके. साथ ही उन्हें ट्रेकिंग पर जाने से पहले बेहतर संचार सुविधाएं, ट्रैकिंग रूट की पुख्ता जानकारी और मौसम का सटीक पूर्वानुमान मिल सके. उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए राज्य में 83 ट्रैक और चोटियां खोली हुई हैं. अकेले उत्तरकाशी जिले में सबसे अधिक ट्रैकिंग रूट हैं. पिछले कुछ वर्षों में इन मार्गों पर हिमस्खलन और अन्य कारणों से कई ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए अभी तक एक समान और स्पष्ट नियमावली नहीं है. पिछले दो वर्षों से ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है, जिससे पर्वतारोहियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. पर्वतारोहण अभियानों में अनुभवी गाइड और प्रशिक्षित पोर्टरों की मौजूदगी भी बेहद जरूरी मानी जाती है. उत्तराखंड में ट्रेकिंग गतिविधियों में पर्यटन विभाग और वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि अधिकांश ट्रैकिंग रूट वन विभाग के अधीन क्षेत्रों में आते हैं. ऐसे में इन मार्गों पर जाने के लिए विभागीय अनुमति आवश्यक होती है. इसके अलावा साहसिक पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए अभी तक कोई प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम लागू नहीं हो पाया है.
उत्तरकाशी के विभिन्न ट्रैकों पर हुए प्रमुख हादसे
सितंबर 2002 : गंगोत्री-3 अभियान में दो बंगाल के पर्वतारोही और एक पोर्टर की मौत.
- सितंबर 2003 : केदारडोम चोटी पर दो बंगाल के पर्वतारोहियों की मौत.
- सितंबर 2005 : कालिंदी ट्रैक पर जर्मन पर्यटकों के साथ गए एक पोर्टर की मौत.
- सितंबर 2005 : सतोपंथ आरोहण के दौरान सेना के एक पर्वतारोही की मौत.
- सितंबर 2007 : कालिंदी ट्रैक पर छह पोर्टरों की मौत.
- सितंबर 2009 : सतोपंथ आरोहण के दौरान गढ़वाल राइफल्स के एक जवान की मौत.
- सितंबर 2010 : कालिंदी ट्रैक पर लापता तीन बंगाल के ट्रेकर्स और पांच पोर्टरों की मौत.
- अप्रैल 2018 : चाइंशील बुग्याल में एक ट्रैकर की मौत.
- मई 2018 : केदारताल ट्रैक पर एक पोर्टर की मौत.
- जून 2018 : सांकरी-यमुनोत्री ट्रैक पर एक पोर्टर की मौत.
- जून 2018 : हरीकेदून-छितकुल ट्रैक पर एक ट्रैकर की मौत.
- सितंबर 2018 : गंगोत्री-भोजवासा ट्रैक पर एक व्यक्ति की मौत.
- अक्टूबर 2018 : हरीकेदून ट्रैक पर एक ट्रैकर की मौत.
- मई 2019 : खिमलोगा-छितकुल ट्रैक पर मोरी के एक पोर्टर की मौत.
- अक्टूबर 2021 : आईटीबीपी की लंबी दूरी की पेट्रोलिंग के दौरान हिमस्खलन में तीन पोर्टरों की मौत.
- वर्ष 2021 : लमखागा-छितकुल ट्रैक पर हिमस्खलन में सात लोगों की मौत.
- वर्ष 2022 : द्रोपदी का डांडा-2 चोटी पर आरोहण के दौरान हिमस्खलन में निम के 29 प्रशिक्षुओं की मौत.
- वर्ष 2023 : रुनसारा ताल ट्रैक (मोरी) में तबीयत बिगड़ने से दो ट्रेकर्स की मौत.
- वर्ष 2023 : गंगोत्री-कालिंदीखाल ट्रैक पर तबीयत बिगड़ने से एक ट्रैकर की मौत.
- वर्ष 2024 : सहस्त्रताल ट्रैक पर बर्फीले तूफान में फंसने से नौ ट्रेकर्स की मौत.
- वर्ष 2026 : गंगोत्री-केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन में चार ट्रेकर्स की मौत, जबकि अन्य की तलाश जारी.
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