- केरलम चुनाव में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद पार्टी कार्यालय में केसी वेणुगोपाल की तस्वीरें सजाई गईं थीं
- वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है, जिन्हें राहुल गांधी का विश्वासपात्र माना जाता है
- कांग्रेस विधायकों और सांसदों ने वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन दिया है, लेकिन विवाद जारी है
केरलम में जब 4 मई को कउंटिंग शुरू होने के पहले दो घंटे में ही साफ हो गया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ गठबंधन को प्रचंड जीत मिलने जा रही है तो तिरुवनंतपुरम स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इकट्ठे होने लगे. कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन, रमेश चेन्नीथला की तस्वीरों के साथ जश्न मना रहे थे. बाकी नेताओं की तस्वीरें छोटी थीं लेकिन केसी वेणुगोपाल के बड़े कटआउट थे. चुनाव के अगले दिन प्रदेश कांग्रेस कार्यालय इंदिरा भवन के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के साथ केसी वेणुगोपाल की तस्वीर लगी नजर आई जिसपर लिखा था “द रियल लीडर”. लेकिन नतीजों के एक हफ्ते के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व केरलम में “लीडर” का चेहरा तय नहीं कर पाया है.
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को भावी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किए जाने की मुहिम से किसी को हैरानी नहीं हुई. उन्हें राहुल गांधी का विश्वासपात्र माना जाता है. 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस में अंदरखाने चर्चा थी कि वेणुगोपाल को सीएम बनाया जा सकता है. लेकिन तब केरलम में हर पांच साल बाद सरकार बदलने का सिलसिला टूटा और वाम मोर्चा की सरकार दोबारा सत्ता में आ गई. वेणुगोपाल ना पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे ना ही इस बार, लेकिन उनके सियासी कद को देखते हुए उन्हें सीएम का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था.
सीएम के लिए नव निर्वाचित विधायकों की मन की बात जानने जब पार्टी नेतृत्व की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक गुरुवार को तिरुवनंतपुरम पहुंचे तो कांग्रेस के 63 विधायकों में से ज्यादातर ने केसी वेणुगोपाल का नाम लिया. विधायकों के अलावा केरलम के कांग्रेस सांसदों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी वेणुगोपाल के हाथों में कमान सौंपने का सुझाव दिया.

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल. (फाइल फोटो)
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पार्टी नेतृत्व की पसंद और ज्यादातर विधायकों के समर्थन के आधार पर केरलम के मुख्यमंत्री के तौर पर केसी वेणुगोपाल के नाम पर अब तक मुहर लग चुकी होती लेकिन उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा वीडी सतीशन हैं जो बतौर नेता विपक्ष बीते कुछ सालों में आम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय होकर उभरे हैं. कांग्रेस की सहयोगी आईयूएमएल पुरजोर तरीके से सतीशन का समर्थन कर रही है. यही वजह है कि सतीशन सीएम की कुर्सी के लिए अड़े हुए हैं.
उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि सीएम नहीं बनाए जाने की स्थिति में वो किसी और की कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनेंगे. इन सब के बीच रमेश चेन्नीथला अपनी वरिष्ठता के आधार पर सीएम पद पर दावा ठोक रहे हैं.
नतीजों के बाद वेणुगोपाल का पलड़ा जैसे ही भारी होता नजर आया वैसे ही केरल में सतीशन के समर्थकों ने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक मुहिम छेड़ दी. केरल में प्रदर्शन हुए और वेणुगोपाल की तस्वीरों पर नुकसान भी पहुंचाया गया. इस गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन से नाराज राहुल गांधी ने सीएम पद के तीनों दावेदारों वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्नीथला को अपने-अपने समर्थकों को काबू में रखने की नसीहत दी. शनिवार शाम को दिल्ली में राहुल गांधी और खरगे ने तीनों नेताओं के साथ लंबी चर्चा की. हालांकि कोई आम सहमति नहीं बन पाई.
कांग्रेस आलाकमान की यही सबसे बड़ी दुविधा है कि विधायकों की पसंद यानी वेणुगोपाल का नाम तय करें या लोगों की पसंद सतीशन का. ना विधायक दल में बहुमत की राय को दरकिनार करना आसान है ना ही सहयोगियों की राय को!
प्रदर्शन और प्रेशर पॉलिटिक्स वाली बात सतीशन के खिलाफ गई. लेकिन उनकी नाराजगी से संभावित नुकसान का एहसास पार्टी नेतृत्व को है. वैसे भी वेणुगोपाल को सीएम बनाया गया तो उन्हें विधानसभा उपचुनाव लड़ना होगा साथ ही उनकी लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव करवाया जाएगा.
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वीडी सतीशन के समर्थक उनके पोस्टर लगाते हुए.
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान चाहता है कि वेणुगोपाल की सरकार में सतीशन सबसे महत्वपूर्ण मंत्री की भूमिका निभाएं. रमेश चेन्नीथला को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है.
लेकिन फैसले को लम्बित रखने और ऐलान में देरी से क्या बात बन जाएगी? इसको लेकर कांग्रेस के नेता ने कहा कि ये एक महत्वपूर्ण फैसला है. सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श करने में समय लगता ही है. इससे कोई नुकसान नहीं होगा.
रविवार को राहुल गांधी तमिलनाडु के सीएम स्टालिन के शपथ ग्रहण समारोह में व्यस्त थे. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे भी बेंगलुरु में हैं. ऐसे में संकेत यही हैं कि पेंच नहीं सुलझा तो एलान में और देरी हो सकती है.
पांच राज्यों के लिए संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में केरलम को छोड़ बाक़ी सभी जगह मुख्यमंत्री का चेहरा तय हो चुका है. केरलम को लेकर हो रही देरी से कांग्रेस की किरकिरी हो रही है.
केरलम CM को लेकर वेणुगोपाल और सतीशन में उलझे पेच के बीच राहुल गांधी ने मंगलवार को केरलम के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों की बैठक बुलाई है. यानी केरलम सीएम के एलान में और समय लग सकता है.
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