- कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को अवैध प्रवासियों के समर्थन पर कड़ी फटकार लगाई है
- डॉक्टर की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस एक्शन को बदले की भावना बताया
- कर्नाटक सरकार को जांच रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया गया है, जबकि अगली सुनवाई तक जांच स्थगित कर दी गई है
कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि देश की सुरक्षा खतरे में है, अवैध प्रवासियों को संतुष्ट करना बंद करें. ये बात अदालत ने एक डॉक्टर की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही. डॉक्टर ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी थी. यह FIR उन पर तब दर्ज की गई थी जब उन्होंने कथित तौर पर पुलिस की मदद बांग्लादेश के एक संदिग्ध अवैध प्रवासी की पहचान करने में की थी.
याचिकाकर्ता डॉक्टर ने तर्क दिया कि जब जांच अधिकारी ने 'फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस' (FRRO) को संदिग्ध अवैध प्रवासी के बारे में जानकारी दी, तो उसके ही आरोपों के आधार पर कुछ ही मिनटों में उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कर लिया गया. उन्होंने इस FIR को बदले की भावना से की गई जवाबी कार्रवाई बताया.
ठीक 15 मिनट बाद FIR कैसे दर्ज हुई?
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने रिकॉर्ड्स की जांच करते हुए पाया कि जांच अधिकारी ने सुबह 11:30 बजे FRRO को पत्र लिखा और संदिग्ध अवैध प्रवासी के खिलाफ एक्शन की मांग की थी. जबकि डॉक्टर पर FIR सुबह 11:45 बजे दर्ज की गई थी. जज ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे सीधे तौर पर जवाबी कार्रवाई कहा. उन्होंने पूछा कि FRRO को सूचना देने के ठीक 15 मिनट बाद ही मारपीट के आरोप वाली FIR कैसे दर्ज की जा सकती है. जस्टिस नागप्रसन्ना ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, "इसीलिए ये अवैध प्रवासी यहां बने रहते हैं. अगर सरकार इस तरह उनका समर्थन करती है, तो ऐसा ही होगा."
अवैध प्रवासियों का बढ़ना सिस्टम के लिए खतरनाक
कोर्ट ने कहा कि अगर सिस्टम इस तरह की चीजों का समर्थन करेगा तो अवैध प्रवासियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी, जो कि सिस्टम के लिए खतरनाक है, देश की सुरक्षा खतरे में है. जस्टिस ने सवाल उठाया कि जांच अधिकारी द्वारा संदिग्ध अवैध अप्रवासी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के बावजूद शिकायतकर्ता के खिलाफ आपराधिक मामला क्यों दर्ज किया गया.
जस्टिस नागप्रसन्ना ने मारपीट के आरोपों के आधार पर भी सवाल उठाया. उन्होंने देखा कि शिकायत का समर्थन करने के लिए कोई प्रत्यक्ष चोट या मेडिकल रिकॉर्ड मौजूद नहीं थे. जस्टिस ने कहा कि कोई घाव नहीं है, कुछ भी नहीं, कोई अस्पताल का रिकॉर्ड नहीं, कुछ भी नहीं. बस उन्होंने मारे जाने का दावा किया और आपने अपराध दर्ज कर लिया.
अदालत ने पुलिसिया एक्शन पर जताई चिंता
अदालत ने पुलिसिया कार्रवाई पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर पुलिस एक अवैध अप्रवासी के समर्थन में ऐसे काम करती है तो ये यह व्यवस्था बंद होनी चाहिए. उनको संतुष्ट करना बंद करो. वहीं कर्नाटक सरकार ने डॉक्टर की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि वह किसी का बचाव नहीं कर रहा. उसने जांच रिकॉर्ड पेश करने के कोर्ट से समय मांगा. हालांकि, अदालत संतुष्ट नहीं हुई और राज्य को संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देते हुए कहा, "यह बिल्कुल सही नहीं है." जांच को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया गया.
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