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This Article is From Feb 09, 2026

कर्नाटक में कहां मिला 5 हजार साल पुराना मानव कंकाल? शरीर के ऊपर रखे थे पत्थर, खुलेंगे कई राज!

कर्नाटक के बल्लारी में खुदाई के दौरान 5000 साल पुराना मानव कंकाल मिला है. अधिकारियों के अनुसार, खुदाई कार्य के दौरान एक सप्ताह पहले हड्डियां दिखाई दी थीं, जिसके बाद विस्तृत खुदाई में यह पूरा ढांचा सामने आया.

कर्नाटक में कहां मिला 5 हजार साल पुराना मानव कंकाल? शरीर के ऊपर रखे थे पत्थर, खुलेंगे कई राज!
  • कर्नाटक के बल्लारी जिले में खुदाई के दौरान 5000 साल पुराना मानव कंकाल मिला है
  • कंकाल तेक्कलकोटे कस्बे के गौद्रु मूले पहाड़ी पर पाया गया,पत्थरों के नीचे दफनाया गया था
  • पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कंकाल प्रागैतिहासिक काल का है
बल्लारी:

कर्नाटक के बल्लारी से चौंकाने वाली खबर सामने आई है.यहां खुदाई के दौरान, 5000 साल पुराना मानव कंकाल मिला है. कंकाल देखने में 5.5 फीट लंबा है. पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खुदाई कार्य के दौरान एक सप्ताह पहले हड्डियां दिखाई दी थीं,जिसके बाद पूरी खुदाई में यह पूरा ढांचा सामने आया है. अधिकारियों का मानना है कि इससे प्राचीन सभ्यता के राज खुलने की संभावना है. बताया गया कि ये कंकाल प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) के हो सकते हैं. 

कब के हैं कंकाल?

बेल्लारी के तेक्कलकोटे में पुरातत्वविदों ने पाया कि कंकाल को एक दफन करने वाली के संदर्भ में रखा गया था,जिसके ऊपर पत्थर रखे गए थे.यह इस क्षेत्र के शुरुआती मानव समुदायों की ओर से अपनाई जाने वाली प्राचीन अंतिम संस्कार प्रथाओं का संकेत देता है.विशेषज्ञों ने भी इसपर अपनी राय दी है.खुदाई टीम की एसोसिएट डायरेक्टर और अमेरिका के हार्टविक कॉलेज में प्रोफेसर नमिता एस.सुगंधी ने पुष्टि की है कि ये अवशेष प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) के हो सकते हैं.

यह खोज बल्लारी जिले के सिरुगुप्पा तालुक के तेक्कलकोटे कस्बे में स्थित गौद्रु मूले पहाड़ी पर की गई है.अधिकारियों के अनुसार,लगभग एक सप्ताह पहले खुदाई के दौरान सबसे पहले कुछ मानव हड्डियां दिखाई दी थीं.आगे की खुदाई में लगभग 5.5 फीट लंबा पूरा मानव कंकाल मिला है. पुरातत्वविदों ने बताया कि शरीर के ऊपर पत्थर रखे हुए मिले,जो दर्शाता है कि उस समय के मानव समुदाय प्राचीन अंतिम संस्कार प्रथाएं अपनाते थे.

पुरातत्व विभाग ने खोज की पुष्टि की

खोज की पुष्टि करते हुए खुदाई टीम की एसोसिएट डायरेक्टर नमिता एस.सुगंधी अमेरिका के हार्टविक कॉलेज में प्रोफेसर भी हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि यह दफन स्थल हजारों वर्ष पुराना हो सकता है.विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज वर्तमान कर्नाटक क्षेत्र में प्रारंभिक मानव बस्तियों,दफनाने की परंपराओं और उस समय की सांस्कृतिक प्रथाओं को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकती है. अवशेषों की सही उम्र और ऐतिहासिक महत्व जानने के लिए कार्बन डेटिंग,फॉरेंसिक विश्लेषण और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण किए जाने की उम्मीद है.फिलहाल स्थल पर अतिरिक्त खुदाई और दस्तावेजीकरण का काम जारी है.

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