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कानपुर किडनी रैकेट: दिल्ली से फ्लाइट से आते थे टेक्निशियन,ठहरते थे लक्जरी होटलों में,फीस थी 50 हजार

Kanpur Illegal Kidney Transplant: कानपुर किडनी कांड में बड़ा खुलासा हुआ है. दिल्ली से फ्लाइट के जरिए बुलाए जाने वाले टेक्निशियन महज 50 हजार रुपये के लिए अवैध ट्रांसप्लांट करते थे. अब डोनर और रिसीवर को गंभीर हालत में लखनऊ पीजीआई रेफर किया गया है.

कानपुर किडनी रैकेट: दिल्ली से फ्लाइट से आते थे टेक्निशियन,ठहरते थे लक्जरी होटलों में,फीस थी 50 हजार

Kanpur Kidney Racket: कानपुर किडनी कांड की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, इसके पीछे का खौफनाक और लक्जरी नेटवर्क सामने आ रहा है. पुलिस ने अब दिल्ली के बड़े अस्पतालों में काम करने वाले दो ऐसे ओटी टेक्निशियन को दबोचा है, जो महज 50 हजार रुपये की फीस के लिए डॉक्टर के साथ फ्लाइट से कानपुर आते थे. पुलिस के मुताबिक लग्जरी होटल में ठहरने और वापसी में महंगी गाड़ियों के इंतजाम के बीच अवैध ट्रांसप्लांट का यह खेल चल रहा था. इस बीच अब इस पूरे कांड की जांच गाजियाबाद, नोएडा और लखनऊ तक  फैल गई है.

मौत का सफर और लग्जरी इंतजाम

पुलिस की गिरफ्त में आए दो टेक्निशियन,कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने पूछताछ में बताया कि उन्हें एक ऑपरेशन के लिए 35 से 50 हजार रुपये तक दिए जाते थे. इन आरोपियों के लिए सुख-सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाता था. डॉ. रोहित नाम का मुख्य आरोपी इन्हें दिल्ली से कानपुर लाने के लिए बाकायदा फ्लाइट के टिकट बुक कराता था. कानपुर पहुंचने पर इनके ठहरने के लिए आलीशान होटलों का इंतजाम होता था और खाने-पीने का सारा खर्च भी गिरोह ही उठाता था.वापसी के लिए इन्हें लग्जरी गाड़ियां मुहैया कराई जाती थीं. 
 

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व्हाट्सएप पर तय होती थी लोकेशन

जांच में सामने आया है कि ये दोनों टेक्निशियन दिल्ली-एनसीआर के नामी अस्पतालों में काम करते थे और इस गिरोह के लिए 'फ्रीलांस' काम कर रहे थे. डॉ. रोहित ही इन्हें ऑपरेशन की जगह और समय की जानकारी व्हाट्सएप के जरिए देता था. कल्याणपुर के आहूजा हॉस्पिटल में हुए अवैध ट्रांसप्लांट के दौरान भी ये दोनों आरोपी डॉक्टर के साथ ही फ्लाइट से कानपुर पहुंचे थे. डीसीपी वेस्ट कासिम आबिदी के मुताबिक, इस रैकेट के तार कानपुर के अलावा मेरठ, लखनऊ, दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों तक फैले हुए हैं.

डोनर और रिसीवर की हालत बिगड़ी

इस बीच खबर है कि किडनी कांड से जुड़े डोनर आयुष और किडनी लेने वाली पारुल तोमर की तबीयत बिगड़ गई है. कानपुर के हैलट अस्पताल (मेडिकल कॉलेज) में उचित इलाज और सुधार न होने के चलते दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच लखनऊ पीजीआई रेफर किया गया है. बताया जा रहा है कि डोनर आयुष से मिलने उसकी एक महिला मित्र भी पहुंची थी. अस्पताल के डॉक्टर सौरभ अग्रवाल ने भी इनकी स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजने की पुष्टि की है.

पुलिस की रडार पर बड़े चेहरे

रावतपुर पुलिस ने इन दोनों टेक्निशियनों को दलहन अनुसंधान केंद्र के पास से गिरफ्तार किया है. अब पुलिस की टीमें डॉ. रोहित और इस गिरोह से जुड़े अन्य डॉक्टरों की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं. पुलिस का कहना है कि उनके पास कई अहम सबूत हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर जल्द ही इस गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य रसूखदार चेहरों को बेनकाब कर जेल भेजा जाएगा. इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट अस्पतालों के बीच चल रहे डरावने गठजोड़ की कलई खोल दी है.
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