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कानपुर किडनी कांड: 10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची किडनी; विदेशी नागरिक समेत 50 लोगों का ट्रांसप्लांट 

कानपुर में अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जहां डोनर से 10 लाख में किडनी खरीदकर मरीज से 60 लाख तक वसूले गए. पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने विदेशी नागरिकों समेत 40‑50 अवैध ट्रांसप्लांट किए. नामी डॉक्टरों और अस्पतालों की मिलीभगत सामने आई है.

कानपुर किडनी कांड: 10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची किडनी; विदेशी नागरिक समेत 50 लोगों का ट्रांसप्लांट 
  • कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ जिसमें कई नामी अस्पताल, डॉक्टर और दलाल शामिल हैं.
  • गिरोह ने आर्थिक तंगी में युवाओं को टेलीग्राम के जरिए किडनी बेचने के लिए फंसाकर करोड़ों का खेल रचा है.
  • एक मरीज के लिए 60 लाख वसूले गए जबकि किडनी देने वाले को मात्र 10 लाख रुपये दिए गए थे.
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Kanpur Kidney Racket: कानपुर में सामने आया किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला भी है. महज 50 हजार रुपये के विवाद ने करोड़ों रुपये के अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी नेटवर्क की परतें खोल दीं. इस मामले में नामी अस्पतालों, डॉक्टरों और दलालों की मिलीभगत उजागर हुई है. पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने अब तक 40 से 50 लोगों का अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

50 हजार के झगड़े से खुला करोड़ों का खेल

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब बिहार के समस्तीपुर निवासी और मेरठ में एमबीए की पढ़ाई कर रहे छात्र आयुष ने पुलिस से शिकायत की. आर्थिक तंगी से जूझ रहे आयुष ने 10 लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने का सौदा किया था. लेकिन ऑपरेशन के बाद दलालों ने उसे पूरे पैसे नहीं दिए और 50 हजार रुपये काट लिए. साढ़े नौ लाख रुपये लेकर नाराज आयुष ने पुलिस को फोन कर दिया. यही कॉल इस बड़े रैकेट के लिए काल साबित हुई.

टेलीग्राम से फंसाता था मास्टरमाइंड

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा था, जो पेशे से एम्बुलेंस चालक था. वह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को तलाशता और किडनी बेचने का लालच देता था. आयुष को भी इसी तरह जाल में फंसाया गया.

10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची किडनी

जांच में पता चला कि मुजफ्फरनगर की मरीज पारुल तोमर को किडनी की जरूरत थी. दलालों और डॉक्टरों ने उसके परिजनों से 60 लाख रुपये वसूले. वहीं किडनी देने वाले आयुष को सिर्फ 10 लाख देने का सौदा हुआ. यानी एक ऑपरेशन में ही 50 लाख रुपये का सीधा मुनाफा गिरोह की जेब में गया.

तीन अस्पतालों पर एक साथ छापा

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार देर रात कल्याणपुर इलाके के अहूजा हॉस्पिटल, प्रिया हॉस्पिटल और मेड लाइफ हॉस्पिटल पर छापेमारी की. जांच में सामने आया कि मेड लाइफ हॉस्पिटल बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहा था. मौके से आयुष और मरीज पारुल को बरामद किया गया. आयुष की हालत गंभीर होने पर उसे तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

6 गिरफ्तार, कई बड़े नाम फरार

पुलिस ने अहूजा हॉस्पिटल के मालिक डॉ. सुरजीत सिंह अहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया है. वहीं इस रैकेट से जुड़े डॉ. अफजाल, सर्जन डॉ. रोहित उर्फ राहुल और वैभव अनुराग अभी फरार हैं. उनकी तलाश में कई टीमें दबिश दे रही हैं.

देश-विदेश तक फैला नेटवर्क

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि इस रैकेट के तार सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं हैं. शुरुआती जांच में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक कनेक्शन मिले हैं. पुलिस का अंदाजा है कि गिरोह अब तक 40‑50 अवैध ट्रांसप्लांट कर चुका है, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

अवैध अस्पताल सील, रजिस्ट्रेशन निरस्त

कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने सख्त कार्रवाई करते हुए अहूजा और प्रिया हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे मेड लाइफ हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है. मौके से 1.75 लाख रुपये नकद और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं भी जब्त की गई हैं.

आयुष और पारुल को पीजीआई लखनऊ रेफर

फिलहाल किडनी देने वाले आयुष और किडनी लेने वाली पारुल का इलाज कानपुर मेडिकल कॉलेज के हैलेट अस्पताल में चल रहा है. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि दोनों को इंफेक्शन का खतरा है और अस्पताल में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण दोनों को लखनऊ के पीजीआई रेफर किया जा रहा है.

कानून के शिकंजे में गिरोह

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है. फरार डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद इस काले कारोबार से जुड़े और बड़े चेहरों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है.

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