हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कर्णन
- कोर्ट ने कर्णन की जमानत याचिका और सजा पर रोक पर सुनवाई से इनकार कर दिया
- जस्टिस कर्णन को अवमानना के मामले में 6 माह की सजा सुनवाई गई है
- जस्टिस कर्णन को 40 दिनों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया गया था
कलकत्ता:
कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सीएस कर्णन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने किसी प्रकार से राहत देने से इनकार कर दिया. यानी फिलहाल जस्टिस कर्णन जेल में ही रहेंगे. कोर्ट ने जस्टिस कर्णन की जमानत याचिका और सजा पर रोक पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है.
बता दें कि जस्टिस कर्णन को अवमानना के मामले में 6 माह की सजा सुनवाई गई है. जस्टिस कर्णन को 40 दिनों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दोषी कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस करनन सोमवार को कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की. इससे पहले जस्टिस करनन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नही मिली थी. करनन ने अर्जी दाखिल कर जमानत और सज़ा को रद्द करने की मांग की थी.
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि इस मामले की सुनवाई 7 जजों की संवैधानिक पीठ ने की थी और 6 महीने की सज़ा का फ़ैसला सुनाया था ऐसे में 2 जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई कैसे कर सकती है.
जिसपर करनन के वकील ने कहा जब तक इस मामले में संवैधानिक पीठ का गठन नही होता तब तक उन्हें ज़मानत दे दी जाए. गर्मियों की छुटियों के बाद 3 जुलाई को कोर्ट खुलेगा तब तक उन्हें जमानत दे दी जाए.
जिसपर कोर्ट ने कहा कि आदेश 7 जजों की संवैधानिक पीठ का है ऐसे में हम कोई आदेश नही दे सकते. जब कोर्ट खुलेगा तब आप मुख्य न्यायाधीश के सामने अपनी अर्जी पर सुनवाई की मांग कर सकते है. ये कहते हुए कोर्ट ने उनकी ज़मानत और सज़ा को रद्द करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर कर दिया.
बता दें कि जस्टिस कर्णन को अवमानना के मामले में 6 माह की सजा सुनवाई गई है. जस्टिस कर्णन को 40 दिनों की फरारी के बाद गिरफ्तार किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दोषी कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस करनन सोमवार को कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की. इससे पहले जस्टिस करनन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नही मिली थी. करनन ने अर्जी दाखिल कर जमानत और सज़ा को रद्द करने की मांग की थी.
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि इस मामले की सुनवाई 7 जजों की संवैधानिक पीठ ने की थी और 6 महीने की सज़ा का फ़ैसला सुनाया था ऐसे में 2 जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई कैसे कर सकती है.
जिसपर करनन के वकील ने कहा जब तक इस मामले में संवैधानिक पीठ का गठन नही होता तब तक उन्हें ज़मानत दे दी जाए. गर्मियों की छुटियों के बाद 3 जुलाई को कोर्ट खुलेगा तब तक उन्हें जमानत दे दी जाए.
जिसपर कोर्ट ने कहा कि आदेश 7 जजों की संवैधानिक पीठ का है ऐसे में हम कोई आदेश नही दे सकते. जब कोर्ट खुलेगा तब आप मुख्य न्यायाधीश के सामने अपनी अर्जी पर सुनवाई की मांग कर सकते है. ये कहते हुए कोर्ट ने उनकी ज़मानत और सज़ा को रद्द करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर कर दिया.
लेखक के बारे में
आशीष कुमार भार्गव
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