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This Article is From Dec 10, 2020

J&K का रोशनी घोटाला : SC से याचिकाकर्ता को फौरी राहत, भू-कब्जा खाली कराने पर रोक

जम्मू-कश्मीर का रोशनी एक्ट घोटाला साल 2001 की तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार से जुड़ा है, जिसके तहत अवैध रूप से कब्जा की गई जमीनों को सशर्त वैध करने का प्रावधान किया गया था.

J&K का रोशनी घोटाला : SC से याचिकाकर्ता को फौरी राहत, भू-कब्जा खाली कराने पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हैं, पहले उनपर सुनवाई होनी है.
  • साल 2001 की फारूक अब्दुल्ला सरकार से जुड़ा है रोशनी घोटाला
  • फऱारूक अब्दुल्ला पर भी हैं अवैध जमीन कब्जाने के आरोप
  • फारुक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि अधिनियम, 2001 पारित कराया था.
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के रोशनी घोटाले (Roshni Act Scam) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने याचिकाकर्ताओं को फिलहाल राहत देते हुए प्रशासन को निर्देश दिया है कि जमीन कब्जा खाली कराने की कार्रवाई न की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले हाईकोर्ट पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला दे, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाय. जम्मू- कश्मीर प्रशासन ने भी सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जबतक जम्मू- कश्मीर हाईकोर्ट मामले का फैसला नहीं करता, तबतक जो याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई कब्जा खाली कराने की कार्यवाही नहीं होगी. 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने तक कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर जनवरी के आखिरी हफ्ते में सुनवाई करेगा. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से सोमवार तक समय मांगा और कहा राज्य सरकार से बातकर सोमवार को पूरी स्थिति बताएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल हैं, पहले उनपर सुनवाई होनी है. हाईकोर्ट में प्रशासन ने ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या हाईकोर्ट मे जब मामला लंबित है तो सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए? कोर्ट ने टिप्पणी की कि समानांतर सुनवाई का कोई मतलब नहीं है. दरअसल, रोशनी योजना के तहत जमीन पाने वाले कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले पर.रोक लगाने की मांग की थी.

मामले में याचिकाकर्ताओं की दलील है कि हमारा पक्ष सुने बिना ही हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दिया. इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हमें एक सप्ताह का समय दिया जाए, हम इसका जवाब देंगे. राज्य सरकार उनलोगों के खिलाफ नहीं जा सकती जिनको नियम के तहत जमीन आवंटित की गई है.

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दो दिन पहले ही रोशनी एक्ट के तहत कब्जाई सरकारी जमीन का मालिकाना अधिकार पाने वाले जम्मू-कश्मीर के आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वो आम लोगों को टारगेट करने की बजाय बड़ी मछलियों पर ध्यान केंद्रित करे, जिन्होंने इस कानून की आड़ में सरकारी जमीन कब्जाई है. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीबीआई को उन मामलों से भी दूर रहने का निर्देश दिया है, जिनमें जम्मू-कश्मीर एंटी करप्शन ब्यूरो पहले से जांच कर रहा है और केस में चार्जशीट पेश कर चुका है.

क्या है रोशनी घोटाला:
साल 2001 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला की सरकार ने हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट्स के लिए फंड एकत्रित करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि अधिनियम, 2001 पारित कराया था. इसे रोशनी एक्ट नाम दिया गया था. इस एक्ट के मुताबिक अनाधिकृत जमीन कब्जेदारों को भूमि का मालिकाना हक इस शर्त पर दिया जाना था कि वे बाजार भाव पर सरकार को उस भूमि की कीमत का भुगतान करेंगे. शुरुआत में कई किसानों को इसके तहत खेतीबारी के लिए मालिकाना हक दिया गया. आरोप है कि फारूक अब्दुल्ला ने भी जम्मू के सजवान क्षेत्र में सात कनाल वन भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था और इसे कानूनी रूप से कब्जा करने के लिए ही रोशनी एक्ट लाया था.

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