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PM मोदी की अपील पर पानी बचाने में जुटे लोग.. 1 साल में बना डाले 1.55 करोड़ जल संचय

केंद्र सरकार के 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान को लगातार सफलता मिल रही है. केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि 31 मई तक 1 करोड़ जल संचय स्ट्रक्चर बनाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन 1.55 करोड़ बना लिए गए हैं.

PM मोदी की अपील पर पानी बचाने में जुटे लोग.. 1 साल में बना डाले 1.55 करोड़ जल संचय
एक साल में 1.55 करोड़ जल संचय बनाए गए हैं.
नई दिल्ली:

मोदी सरकार के जल बचाओ अभियान को लोगों का जबरदस्त साथ मिला है. केंद्र का महत्वाकांक्षी 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान टारगेट से बहुत आगे निकल गया है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि 31 मई 2026 तक 1 करोड़ वॉटर स्ट्रक्चर बनाने का टारगेट था. लेकिन लोगों ने मिलकर अब तक 1 करोड़ 55 लाख स्ट्रक्चर बना दिए. यानी टार्गेट से 55 लाख ज्यादा. 

पाटिल ने NDTV से कहा, "PM मोदी ने 6 सितंबर 2024 को सूरत में कहा था कि जल संचय को जन आंदोलन बनाना है. उनके एक आव्हान पर सूरत के राजस्थान वाले व्यापारियों ने अपने गांवों में 40 हजार स्ट्रक्चर बनवा दिए. MP में 35 हजार, बिहार के 10 जिलों में भी काम हुआ. मुंबई के एक व्यापारी ने कच्छ की सूखी नदी को गहरा करने में 50 करोड़ खर्च कर दिए."

अब 2 करोड़ का नया लक्ष्य

मंत्री के मुताबिक पहले 31 मई 2025 तक 10 लाख स्ट्रक्चर का लक्ष्य था, तब भी 27.5 लाख बन गए थे. अब 31 मई 2027 तक 2 करोड़ स्ट्रक्चर बनाने का नया टारगेट रखा गया है. PM मोदी ने कहा था - जल है तो कल है. इसका असर दिख रहा है. सरकार ने मनरेगा से 10 लाख बनाए थे, बाकी जनता ने खुद बनाए. इससे आने वाले समय में जमीन का पानी लेवल ऊपर आएगा.

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कौन सा राज्य सबसे आगे?

अभियान में आंध्र प्रदेश नंबर 1 रहा. वहां 31.08 लाख स्ट्रक्चर बने. इसके बाद छत्तीसगढ़ में 23.07 लाख, मध्य प्रदेश में 21.90 लाख, तेलंगाना में 15.88 लाख, राजस्थान में 5.82 लाख, UP में 2.74 लाख और गुजरात में 2.20 लाख स्ट्रक्चर बने. 

जिलों में आंध्र का अल्लूरी सीताराम राजू जिला 10.49 लाख काम पूरे करके देश में पहले नंबर पर है. शहरों में हैदराबाद नगर निगम 24,892 काम के साथ टॉप पर रहा. 

क्या है 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान?

ये केंद्र सरकार का अभियान है जिसका मकसद पानी बचाना है. इसमें बारिश का पानी इकट्ठा करना, जमीन का पानी रिचार्ज करना और पुराने तालाब-पोखर ठीक करना शामिल है. सबसे खास बात ये कि इसमें गांव-शहर के लोग खुद आगे आकर हिस्सा ले रहे हैं. CSR फंड, कलेक्टर की निगरानी और पोर्टल पर एंट्री के साथ काम पारदर्शी तरीके से हो रहा है.

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