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जयपुर में संक्रांति पर छिड़ेगी 'जंग', मोदी-पुतिन-ट्रंप वाली पतंगों से पटेगा आसमान; देखिए रामगंज के पतंग मोहल्ले से EXCLUSIVE रिपोर्ट

Jaipur Kite Festival 2026: मकर संक्रांति पर जयपुर पूरी तरह तैयार है. रामगंज के हांडीपुरा और जगन्नाथ शाह के रास्ते से देशभर में पतंगों की सप्लाई हो रही है. इस बार पीएम मोदी और विदेशी नेताओं की सियासी पतंगों के साथ-साथ सुरक्षित देसी मांझे की मांग है. जयपुर का पतंगबाजी इतिहास राजा-महाराजाओं के काल से जुड़ा है, जिसकी झलक आज भी सिटी पैलेस में देखी जा सकती है.

जयपुर में संक्रांति पर छिड़ेगी 'जंग', मोदी-पुतिन-ट्रंप वाली पतंगों से पटेगा आसमान; देखिए रामगंज के पतंग मोहल्ले से EXCLUSIVE रिपोर्ट
जयपुर पतंगबाजी: रामगंज में उमड़ी भीड़, मोदी-पुतिन वाली पतंगों की भारी मांग
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Rajasthan News: गुलाबी नगरी तैयार है, मंझा सूत लिया गया है और आसमान गवाह बनने वाला है देश की सबसे बड़ी पतंगबाजी (Jaipur Patang Bazi) का. इस मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के मौके पर जयपुर की छतों पर सिर्फ शहर नहीं, बल्कि पूरा राजस्थान उमड़ने वाला है. लेकिन इस बार पेंच सिर्फ पतंगों के बीच नहीं, बल्कि 'सियासत' के बीच भी लड़ेंगे.

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'Made in Jaipur' का दम

जयपुर का जगन्नाथ शाह का रास्ता आज देश का सबसे बड़ा 'काइट हब' बन चुका है. रामगंज की इन संकरी गलियों में जो पतंग बनती है, उसकी उड़ान बंगाल, पंजाब और तमिलनाडु तक महसूस की जाती है. यहां के हांडीपुरा और नाहरवाड़ा मोहल्ले में करीब 500 परिवार दिन-रात एक कर रहे हैं ताकि देशभर की संक्रांति रंगीन हो सके.

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आसमान में मचेगा 'वर्ल्ड वॉर'!

इस साल जयपुर के आसमान में सिर्फ पतंगें नहीं, दुनिया के दिग्गज नेता भी उड़ते दिखेंगे. 42 साल से सियासी पतंगें बना रहे यूसुफ अंसारी ने इस बार खास तैयारी की है. पीएम मोदी, अमित शाह और सीएम भजनलाल शर्मा की तस्वीरों वाली पतंगों की भारी डिमांड है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के जेलेंस्की के बीच के 'तनाव' को अब जयपुर के पतंगबाज आसमान में पेंच लड़ाकर सुलझाएंगे. यहां तक कि ट्रंप की पतंगें भी बाजारों में छाई हुई हैं.

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'चाइनीज' को मात देगा 'देसी मांझा'

जयपुर ने इस बार जानलेवा चाइनीज मांझे को दरकिनार कर देसी सूती डोर को अपनाया है. हांडीपुरा के कारीगरों ने खास तरीके से मांझा तैयार किया है, जो पेंच काटने में तो माहिर है लेकिन परिंदों के लिए सुरक्षित है. वहीं, बच्चों के लिए छोटी-छोटी खिलौने वाली पतंगें और रात को आसमान रोशन करने वाले 'विश लैम्प' की भी भारी खरीदारी हो रही है.

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कुएं में खड़े होकर पतंग उड़ाते थे शूरवीर

जयपुर में पतंगबाजी का इतिहास राजा-महाराजाओं के शौर्य से जुड़ा है. 1835 के दौर में महाराजा रामसिंह खुद पतंगबाजी के शौकीन थे. उन्होंने ही पतंग बनाने वाले बेहतरीन कारीगरों को जयपुर में बसाया. उस दौर में कागज नहीं, बल्कि मलमल के कपड़े से पतंगें बनती थीं. इतिहास कहता है कि जयपुर के पुराने पतंगबाज इतने उस्ताद थे कि जमीन पर नहीं, बल्कि कुएं के अंदर खड़े होकर भी पतंग उड़ा लिया करते थे. आज भी सिटी पैलेस में महाराजाओं की वो विशाल चरखियां और 'तुक्कल' पतंगें पर्यटकों को हैरान कर देती हैं.

बाजार में उमड़ा सैलाब, 'वो काटा' की तैयारी!

मकर संक्रांति से पहले जयपुर के बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं है. हर रंग, हर साइज और हर डिजाइन की पतंगों से दुकानें पटी पड़ी हैं. 'वैलेंटाइन डे' स्पेशल पतंगों से लेकर 'टाइगर स्टाइल' तक, युवाओं में जबरदस्त क्रेज दिख रहा है.

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