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Exclusive: भगवान जगन्नाथ के वरिष्ठ पुजारी NDTV से बोले- मंदिर में 3 सुरंगें, रत्न भंडार के हैं रक्षक सांप, पढें खास बातचीत

Jagannath Temple: पुरी जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित डॉ. शरत चंद्र मोहंती ने NDTV से Exclusive बातचीत की. उन्होंने बताया कि रत्न भंडार की सुरक्षा का दायित्व देवों के देव महादेव लोकनाथ जी के पास है. मंदिर के कई पंडितों ने रत्न भंडार के अंदर सांप देखे हैं.

Exclusive: भगवान जगन्नाथ के वरिष्ठ पुजारी NDTV से बोले- मंदिर में 3 सुरंगें, रत्न भंडार के हैं रक्षक सांप, पढें खास बातचीत
Jagannath Temple Priest Pandit Dr. Sarat Chandra Exclusive Interview

पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 48 साल बाद खोला गया, तमाम इंतजाम के बीच खजाने की गणना की जा रही है. इसे लेकर NDTV ने मंदिर के वरिष्ठ सेवायत (पुजारी) पंडित डॉ. शरत चंद्र मोहंती से खास (Exclusive) बातचीत की. इस दौरान उन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए. पुजारी ने बताया कि मंदिर में तीन सुरंगे हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर खुलती हैं. आपने भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए होंगे, लेकिन सुरंग के बारे में शायद ही आपको पता हो. वरिष्ठ पुजारी डॉ. मोहंती ने यह भी बताया कि मंदिर के खजाने की रक्षा सांप करते हैं. पढ़िए, पुजारी डॉ. शरत चंद्र मोहंती ने क्या क्या बताया? 

Jagannath Temple Treasury Open: गणना क्यों हो रही, कब तक पूरी होगी ? 

पंडित डॉ. शरत चंद्र मोहंती ने NDTV को बताया कि भगवान जगन्नाथ के भक्तों की यह बहुत पुरानी मांग थी. उनका कहना था कि भगवान जगन्नाथ जी का जितना भी रत्न, आभूषण और खजाना रत्न भंडार में है, उसे सबके सामने लाया जाए, जिससे ओडिशा के लोगों के सवाल और संदेह खत्म हो सके. गणना को लेकर सरकार से निवेदन किया गया था. 25 मार्च 2026 से गणना शुरू हो गई है. हालांकि, यह कितने दिन में पूरी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
इस तरह के बक्से में रखे जाते हैं आभूषण.

इस तरह के बक्से में रखे जाते हैं आभूषण.

Jagannath Temple Ratna Bhandar: कैसे और किस-किस चीज की गणना होगी?     

पंडित डॉ. मोहंती ने बताया कि सबसे पहले भगवान जगन्नाथ जी के रोजाना उपयोग में आने वाले आभूषणों की गिनती होगी, जिनमें सोने-चांदी का श्रृंगार शामिल है. रथ यात्रा के समय भी भगवान सोने के श्रृंगार में दर्शन देते हैं. इन सभी आभूषणों की सूची सबसे पहले बनाई जाएगी. इसके बाद रत्न भंडार के अंदर स्थित तीन प्रकोष्ठों की क्रमवार गिनती होगी. अंतिम प्रकोष्ठ में रखे गए सभी रत्न और आभूषणों की जांच की जाएगी. जिन आभूषणों में कोई खराबी है, जैसे हार या नेकलेस से दाने निकल गए हों, उनकी मरम्मत की जाएगी. इस पूरी प्रक्रिया के डिजिटल दस्तावेज तैयार किए जाएंगे, जिसका मिलान साल 1978 में बनी सूची से किया जाएगा. 

Ratna Bhandar Mystery: अब जानिए, रत्न भंडार से जुड़ी मान्यताओं के बारे में ? 

भगवान जगन्नाथ मंदिर के इतिहास और पुराणों में भी रत्न भंडार से जुड़ी कई मान्यताएं है. पंडित डॉ. मोहंती के अनुसार, कहा जाता है कि रत्न भंडार की सुरक्षा का दायित्व देवों के देव महादेव लोकनाथ जी के पास है. यहां, लोकनाथ जी कामना लिंग स्वरूप में विराजमान हैं. उनका मंदिर जगन्नाथ मंदिर के पिछले हिस्से से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. लोकनाथ जी को लेकर मान्यता है कि अगर, कोई व्यक्ति झूठ बोलता है या गलत तरीके से धन ले जाता है तो लोकनाथ जी के नाम मात्र से वह धन वापस कर देता है. लोकनाथ जी को रत्न भंडार का रक्षक भी माना जाता है. मंदिर के कई पंडितों ने रत्न भंडार के अंदर सांप देखे हैं. एक मान्यता यह भी है कि अगर, कोई व्यक्ति अनजाने में भी दोषयुक्त वस्त्र पहनकर प्रवेश करता है, तो उसे भी सांप दिखाई देता है.  

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Loknath Ji Temple: अखंड दीप प्रज्वलित कर लोकनाथ जी से क्यों ली गई अनुमति? 

पंडित डॉ. शरत चंद्र मोहंती ने बताया कि लोकनाथ जी को भगवान जगन्नाथ जी के भंडार के रक्षक के रूप में देखा जाता है. यही कारण है कि रत्न भंडार की गणना की प्रक्रिया शुरू करने से पहले भगवान जगन्नाथ जी और लोकनाथ जी दोनों से अनुमति ली गई थी. लोकनाथ मंदिर में अखंड दीप प्रज्वलित कर विधिवत अनुमति मांगी गई. हमारा विश्वास है कि भगवान की इच्छा और आशीवार्द से गणना का कार्य शुभ रूप से पूर्ण होगा. 
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Jagannath Temple Secrets: मंदिर के नीचे मौजूद सुरंग कहां-कहां खुलती हैं? 

भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार के नीचे सुरंग होने के सवाल पर पंडित डॉ. मोहंती ने कहा कि, हां यह पूरी तरह से सही है. वहां तीन सुरंगे हैं. जिनका उपयोग मुगलकाल में सुरक्षा के लिए किया जाता था. एक सुरंग समुद्र की ओर जाती है, दूसरी भुवनेश्वर हाईवे की ओर और तीसरी अठारह नाला ब्रिज के पास स्थित तालाब से जुड़ती है. हालांकि, वर्तमान में यह सुरंगे पत्थर और बालू भरने से बंद हो चुकी हैं. अगर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्था द्वारा इनका पुनरुद्धार किया जाए तो कई ऐतिहासिक तथ्य सामने आ सकते हैं.

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