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ISRO ने गगनयान क्रू मॉड्यूल सिस्टम के टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए

ISRO ने गगनयान क्रू मॉड्यूल सिस्टम के टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए

भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ने रविवार को कहा कि उसने गगनयान क्रू मॉड्यूल सिस्टम के तीन बड़े टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं. पहला टेस्ट समुद्र में उतरने (स्प्लैशडाउन) के बाद क्रू मॉड्यूल को सीधी स्थिति में लाने से जुड़ा था, जिसे क्रू की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी जरूरतों में से एक माना जाता है.

इसके लिए, कोल्ड-गैस पर आधारित एक 'अपराइटिंग सिस्टम' (सीधा करने वाला सिस्टम) बनाया गया और उसका टेस्ट किया गया. ISRO ने कहा, "CMUS (क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम) के सभी हिस्सों वाला एक सिस्टम-लेवल क्वालिफिकेशन टेस्ट सेटअप तैयार किया गया और प्राइमरी इन्फ्लेशन मॉड्यूल के लिए इन्फ्लेशन टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए. इसमें हाई-प्रेशर गैस बोतल में भरी गैस का इस्तेमाल करके कंट्रोल वाल्व चलाकर फ्लोटेशन को फुलाया गया."

दूसरे टेस्ट में उस 'अम्बिलिकल मैकेनिज्म' के अलग होने की जांच की गई जो क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के बीच कड़ी का काम करता है. इस मैकेनिज्म के दो हिस्से होते हैं. एक क्रू मॉड्यूल की तरफ होता है जिसे CSU-1 कहते हैं, और दूसरा सर्विस मॉड्यूल की तरफ होता है जिसे CSU-2 कहते हैं.

क्रू मॉड्यूल के पृथ्वी पर वापस लौटने (री-एंट्री) के चरण के दौरान, CSU-1 के अलग होने के बाद सर्विस मॉड्यूल सबसे पहले क्रू मॉड्यूल से अलग होता है. इसके बाद, री-एंट्री से ठीक पहले, CSU-2 भी अलग हो जाता है.

स्पेस एजेंसी ने कहा, "सिमुलेटेड क्रू मॉड्यूल से CSU-2 को अलग करने का टेस्ट किया गया. इस टेस्ट में CSU-2 के आसानी से अलग होने के साथ-साथ क्रू मॉड्यूल पैनल और उनके इंटरफेस की स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी भी साबित हुई."

तीसरे टेस्ट में 'एपेक्स कवर' के अलग होने की घटना के दौरान क्रू मॉड्यूल की स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी की पुष्टि की गई. एपेक्स कवर मिशन के दौरान पैराशूट और उससे जुड़े सब-सिस्टम की सुरक्षा करता है. क्रू मॉड्यूल की गति कम करने के लिए पैराशूट खोलने से पहले इसे अलग कर दिया जाता है.

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