- भारत के 4-5 तेल और गैस से लदे जहाज जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पार कर सकते हैं, इसके लिए ईरान से बातचीत जारी है.
- होर्मुज पार करना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमले का खतरा लगातार बना रहता है.
- भारतीय जहाजों की सुरक्षा और मार्ग पर हर स्तर पर निगरानी और संचार व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के लिये अच्छी खबर है. बहुत जल्द चार से पांच तेल और गैस से लदे भारतीय जहाज होर्मुज पार कर सकते हैं. इसके लिए ईरान से लगातार बातचीत चल रही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि इसके लिए खाड़ी देशों के साथ सही दिशा में बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है. उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इन जहाजों को हरी झंडी मिल सकती है. सब ठीक रहा तो यह भी हो सकता है कि अगले एक से दो दिन के भीतर ही यह खुशखबरी मिल सकती है. हालांकि स्टेट ऑफ होर्मुज के दूसरी तरफ इन पांच के बाद भी करीब 20 भारतीय जहाज अभी भी फंसे हैं. हालांकि होर्मुज को पार करना किसी चुनौती से कम नहीं है. कई चुनौतियों को पार करने के बाद ये जहाज बड़ी मुश्किल से भारत पहुंचते हैं.
मिसाइल और ड्रोन के ताबड़तोड़ हमले के बीच स्टेट ऑफ होर्मुज पार करना आसान नहीं है. सबसे पहले आपको ईरान से बात करनी होती है. उस ईरान से जहां फिलहाल कोई एक केंद्रीय हाइकमान नहीं है. इस वजह से कई स्तरों पर बातचीत करनी पड़ रही है. भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हर स्तर पर जानकारी पहुंचे. ऊपर से लेकर नीचे तक सभी को पता होना चाहिए कि ये भारतीय जहाज हैं.
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Photo Credit: PTI
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होर्मुज संवेदनशील इलाका, हर वक्त हमले का खतरा
होर्मुज स्ट्रेट बहुत संवेदनशील इलाका है. यहां किसी भी समय हमला हो सकता है. दूर से मिसाइल अटैक का खतरा रहता है. ड्रोन से भी हमला किया जा सकता है. तेज चलने वाली छोटी नावों से भी खतरा बना रहता है. ऐसे में बात केवल ईरान से ही नहीं अमेरिका और इजराइल से भी करनी होगी, कहीं वो भारतीय शिप को निशाना बना दें.
अनुमति के बाद भी कई स्तरों पर सुरक्षा की जरूरत
साफ है सिर्फ ईरान या दूसरे अहम देशों से अनुमति मिलना ही काफी नहीं है. इसकी हर स्तर पर सुरक्षा की पुष्टि जरूरी है. वजह है हालात बदलने में कोई वक्त नही लगता हैं. यहां तो हर पल नई स्थिति बनती है. इसलिए जहाजों को चलने का जो रुट दिया जाता है, उसी रास्ते से होकर जहाज को चलना होता है. उनकी हर पल की लोकेशन पर नजर रखी जाती है. ऐसे में किसी भी तरह की गलती या गलतफहमी की कोई गुजाइंश न के बराबर होती है ताकि कोई भी गलती से हमला न कर दे. जब से इस इलाके में लड़ाई शुरु हुई है तब से करीब 20 जहाज आग के हवाले किए जा चुके हैं.
कम्युनिकेशन और सुरक्षा को लेकर कई दिक्कतें
जानकार बताते है कि कम्युनिकेशन और सुरक्षा को लेकर कई दिक्कतें सामने आ रही हैं. इसे लेकर भारत की अलग-अलग एजेंसियां मिलकर इन समस्याओं को सुलझा रही हैं. सूत्र बताते हैं कि जहाज की लोकेशन के हिसाब से समय तय होता है. स्टेट ऑफ होर्मुज पार करने में कम से कम एक से डेढ़ दिन लग सकता है. अगर हालात खराब रहे तो कई बार इससे ज्यादा समय भी लग जाता है. इसके बाद जब जहाज ओमान की खाड़ी पहुंचते हैं, तब जाकर अगला सफर शुरू होता है.
गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर आईएएस सूरत तैनात
ओमान की खाड़ी के पास ही नौसेना के युद्धपोत तैनात हैं, जो खतरों को देखते हुए भारतीय जहाज को एस्कॉर्ट करके आगे बढ़ते हैं. भारतीय फ्लैगशिप वाले जहाज को नेवी के युद्धपोत जहां तक खतरा बना रहता है, वहां तक इनको सुरक्षा मुहैया कराते हैं. यहीं पर भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर आईएएस सूरत तैनात है. यह जंगी जहाज मिसाइल और कई तरह के हथियारों से लैस है. इनके रहते अगर किसी भारतीय जहाज पर मिसाइल या ड्रोन से हमला होने की आशंका होती है तो वह न केवल पहले आगाह करते हैं बल्कि उसको माकूल जवाब भी देते हैं.
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