- I-PAC ने रोहतक की रामसेतु इन्फ्रास्ट्रक्टर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 13.5 करोड़ का लोन मिलने का दावा किया था.
- जांच में पाया गया कि जिस कंपनी से लोन मिला बताया गया, वह वास्तविक रूप से अस्तित्व में ही नहीं थी.
- I-PAC ने लोन में से एक करोड़ रुपये लौटाने का दावा किया, लेकिन कंपनी के दस्तावेज संदिग्ध और गड़बड़ पाए गए हैं.
राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) एक नए वित्तीय विवाद में घिर गई है. कंपनी ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों में दावा किया था कि उसे रोहतक स्थित रामसेतु इन्फ्रास्ट्रक्टर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से 13.5 करोड़ रुपये का लोन मिला है. लेकिन जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. जिस कंपनी से लोन मिलने का दावा किया गया, उसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है.
I-PAC ने किस कंपनी का नाम दिया था?
I-PAC ने अपनी बैलेंस शीट और ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि उसे हरियाणा के रोहतक में स्थित 'रामसेतु इन्फ्रास्ट्रक्टर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' से करोड़ों रुपये का कर्ज मिला था. कंपनी का पता- अशोक प्लाज़ा, तीसरी मंजिल, दिल्ली‑रोहतक रोड, रोहतक आधिकारिक तौर पर दर्ज था. यह जानकारी 17 दिसंबर 2021 को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) में अपलोड की गई लोन देने वालों की सूची में मौजूद थी.
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जांच में क्या मिला?
पते और कंपनी के रिकॉर्ड की पड़ताल में एक बड़ा खुलासा सामने आया कि जिस पते पर कंपनी के होने का दावा किया गया था, वहां ऐसी कोई कंपनी मौजूद नहीं मिली. कंपनी के रजिस्ट्रेशन और टैक्स रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां पाई गईं. प्रारंभिक जांच संकेत देती है कि यह एक शेल कंपनी हो सकती है, जिसका उपयोग केवल पैसों के लेनदेन को वैध दिखाने के लिए किया गया.
क्या कोई कंपनी कभी अस्तित्व में थी?
आधिकारिक रिकॉर्ड में इसी नाम से मिलती-जुलती एक पुरानी कंपनी दर्ज जरूर है. रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड.
पंजीकरण वर्ष: अक्टूबर 2013, वही रोहतक का पता. 8 अगस्त 2018 को ROC ने इस कंपनी को स्ट्राइक‑ऑफ कर दिया था. यानी I-PAC द्वारा लोन घोषित करने से तीन साल पहले ही कंपनी बंद हो चुकी थी.
इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि I-PAC ने जिस कंपनी से 13.5 करोड़ का लोन दिखाया, वह कानूनी रूप से उस समय अस्तित्व में ही नहीं थी.
I-PAC का दावा: लोन का कुछ हिस्सा चुका दिया
27 जून 2025 की घोषणा में I-PAC ने कहा कि 13.50 करोड़ में से 1 करोड़ रुपये लौटा दिए गए हैं और अब भी 12.50 करोड़ रुपये बकाया है. लेकिन जिस कंपनी को पैसे लौटाए जाने का दावा है, वह दस्तावेजों में ही संदिग्ध पाई जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक I-PAC की अन्य कंपनियों में भी गड़बड़ी पाई गई है. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार I-PAC से जुड़ी अन्य कंपनियों की बैलेंस शीट की जांच में भी ऐसी ही गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. कई कंपनियों की बैलेंस शीट शून्य (zero) पाई गई है. ED लगातार I-PAC और उससे संबद्ध संस्थाओं की वित्तीय गतिविधियों की जांच में जुटी है.
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13.5 करोड़ के इस कथित लोन ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या I-PAC ने किसी गैर‑मौजूद या बंद हो चुकी कंपनी से लोन दिखाया?
क्या यह पैसा किसी अन्य स्रोत से आया, लेकिन उसे वैध दिखाने के लिए शेल कंपनी का सहारा लिया गया?
और क्या I-PAC से जुड़ी अन्य कंपनियों में भी इसी तरह की वित्तीय अनियमितताएँ मौजूद हैं?
जांच जारी है, लेकिन शुरुआती तथ्य संकेत देते हैं कि यह मामला आने वाले समय में एक बड़ा राजनीतिक‑वित्तीय विवाद बन सकता है.
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