जंतर-मंतर पर आरक्षण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच योगगुरु रामदेव ने एक बड़ा बयान दिया है. रामदेव ने रविवार को कहा कि अगर एससी और एसटी का अपमान संविधान के खिलाफ है तो ब्राह्मणों का अपमान भी संविधान के खिलाफ है.
रामदेव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'कुछ लोगों को लगता है कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है... मैं कहूंगा कि छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों, SC/ST समुदायों के सदस्यों और ब्राह्मणों के साथ भी अन्याय होता है.'
उन्होंने कहा कि 'आज, अगर कोई SC/ST व्यक्ति का अपमान करता है, तो हर कोई लोकतंत्र और संविधान की बात करता है और इसे असंवैधानिक बताता है. अगर SC/ST व्यक्ति का अपमान संविधान के खिलाफ है, तो ब्राह्मण का अपमान भी संविधान के खिलाफ है.'
'लोकतंत्र को बंधक नहीं बनाना चाहिए'
योगगुरु रामदेव ने 'एक देश, एक चुनाव' का समर्थन करते हुए कहा कि इससे शिक्षा में सुधार होगा और विकास की गति बढ़ेगी. लोकतंत्र को बाधाओं का बंधक नहीं बनने देना चाहिएट 'एक देश, एक चुनाव' से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि चुनाव पूरे साल चलते रहते हैं, हर कुछ महीनों में कोई न कोई चुनाव होता ही रहता है.
#WATCH | Haridwar, Uttarakhand: On Kangana Ranaut's remarks, Yog Guru Baba Ramdev says, "What can I say about these people? I do not wish to fuel a controversy. The country knows who Ramdev is and recognises his contributions. Therefore, I do not want to comment on petty… pic.twitter.com/dGvE2NUtgv
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 23, 2026
उन्होंने कहा कि सड़कों और संसद में हंगामा और व्यवधान पैदा करके, कुछ लोगों को लगता है कि वे लोकतंत्र को बंधक बना सकते हैं. लेकिन कोई भी लोकतंत्र को बंधक नहीं बना सकता.
रामदेव ने कहा कि 'लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा कर बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए. यदि किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं.'
वंदे मातरम को लेकर क्या बोले रामदेव?
वंदे मातरम को लेकर बाबा रामदेव ने कहा, 'हम भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में मानते हैं. यही हमारी आस्था, हमारा ज्ञान, हमारा मंदिर और हमें सुरक्षा और शक्ति देने वाली हैं. वह हमारे लिए सर्वोच्च हैं और हमारी भक्ति और आकांक्षा का परम केंद्र हैं.'
रामदेव ने कहा, 'जो लोग 'वंदे मातरम' में देवियों, देवताओं, मठों या मंदिरों का जिक्र देखते हैं, वे मेरी नजर में हमारी संस्कृत और संस्कृति से कटे हुए लगते हैं. उन्हें संस्कृत का थोड़ा और अध्ययन करना चाहिए और इसके अर्थ को बेहतर ढंग से समझना चाहिए.'
उन्होंने आगे कहा कि हमारे लिए भारत माता ही हमारा ज्ञान, हमारी आस्था, हमारा मंदिर, हमारी पूजा, हमारा कर्तव्य, हमारा उद्देश्य, हमारी मंजिल, हमारा धर्म और हमारा सब कुछ हैं.
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