- INS निपुण को आज भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा, यह पूरी तरह स्वदेशी है.
- आज मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में स्वदेशी INS निपुण को शामिल कर लिया जाएगा.
- हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) की तरफ से इसे तैयार किया गया है.
भारतीय नौसेना की समुद्र में ताकत और बढ़ने वाली है. मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में आज भारत के दूसरे स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल 'आईएनएस निपुण' (INS Nipun) को शामिल किया जाएगा. INS निपुण को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) की तरफ से तैयार किया गया है. यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है. जो कई सुविधाओं से लेस हैं, ऐसे में आईएनएस निपुण कई चुनौतियों से निपटने में भारत की मदद करेगा. यह भारत के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी, जो कई अभियानों में काम आएगा. क्योंकि इससे समुद्र में भारत की ताकत में और इजाफा होने वाला है.
गहरे समुद्र में गोताखोरी में मिलेगी मदद
INS निपुण निस्तार क्लास का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल है, इसे खास तौर पर समुद्र के अंदर गोताखोरी और दूसरी अंडरवाटर गतिविधियों में सहायता के लिए बनाया गया है. यह पोत मुश्किल समुद्री परिस्थितियों में लंबे समय तक गोताखोरों को सहायता दे सकता है. इसमें आधुनिक डाइविंग सिस्टम और पानी के भीतर काम करने के लिए जरूरी तकनीक लगाई गई है. नौसेना के लिए इसकी एक अहम भूमिका पनडुब्बी बचाव अभियानों में भी होगी. किसी पनडुब्बी के समुद्र में फंसने या दुर्घटना की स्थिति में ऐसे पोत बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं.

विशाखापट्टनम में हुआ निर्माण
इसको पूरी तरह भारत में डिजाइन और तैयार किया गया है. इसका निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) विशाखापट्टनम ने किया है. जहाज का निर्माण पूरा होने के बाद इसमें कई जरूरी सिस्टम लगाए गए. इसके बाद व्यापक परीक्षण किए गए. सभी परीक्षण और तैयारियां पूरी होने के बाद इसे 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था. नौसेना में शामिल होने के बाद यह पोत अब सक्रिय अभियानों के लिए उपलब्ध होगा.
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कई आधुनिक सुविधाओं से लैस
निपुण में आधुनिक नेविगेशन और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं. यह समुद्र में अपनी स्थिति को बेहद सटीक तरीके से बनाए रख सकता है. जहाज पर गोताखोरी, समुद्र के अंदर हस्तक्षेप और मेडिकल सपोर्ट के लिए विशेष सुविधाएं भी मौजूद हैं. इसका मतलब है कि 'निपुण' सिर्फ गोताखोरों को समुद्र तक ले जाने वाला जहाज नहीं है. यह पानी की सतह के नीचे होने वाले जटिल अभियानों के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा.
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स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा
निपुण का नौसेना में शामिल होना भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम कदम है. विशेष रूप से ऐसे अत्याधुनिक और विशेषज्ञता वाले जहाजों का देश में निर्माण यह दिखाता है कि भारतीय शिपयार्ड अब नौसेना की जरूरत के मुताबिक जटिल पोत बनाने में सक्षम हो रहे हैं.
क्या बताता है जहाज का प्रतीक चिन्ह?
निपुण के क्रेस्ट यानी प्रतीक चिन्ह में व्हेल और डाइविंग हेलमेट को प्रमुखता दी गई है. व्हेल समुद्र की गहराई में लंबे समय तक रहने की क्षमता के लिए जानी जाती है. यह धैर्य, मजबूती और लंबे अभियानों का प्रतीक है. वहीं डाइविंग हेलमेट गोताखोर और उसके मिशन को दर्शाता है. यह जहाज में मौजूद आधुनिक डाइविंग और जीवन रक्षक प्रणालियों का भी प्रतीक है. दोनों प्रतीक मिलकर निपुण की भूमिका को दर्शाते हैं, गोताखोर को समुद्र की गहराई तक सुरक्षित पहुंचाना, वहां लंबे समय तक सहायता देना और उसे सुरक्षित वापस लाना. इसकी खासियत है.
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