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27 फरवरी को समुद्र में उतरेगा ‘सबमरीन किलर’, दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनेगा INS अंजदीप

इस युद्धपोत का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है. वैसे पहले नौसेना में आईएनएस अंजदीप का नाम युद्धपोत था जिसे 2003 में रिटायर कर दिया था. अब नया जहाज उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है.

27 फरवरी को समुद्र में उतरेगा ‘सबमरीन किलर’,  दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनेगा INS अंजदीप
  • 27 फरवरी को INS अंजदीप नामक युद्धपोत को शामिल कर गहरे समुद्र में पनडुब्बी खोजने और नष्ट करने में सक्षम होगी.
  • INS अंजदीप को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप से बनाया गया है, जिसमें सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ने भाग लिया है.
  • यह युद्धपोत एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है.
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भारतीय नौसेना 27 फरवरी को एक नई ताकत से लैस होने जा रही है. एक ऐसा युद्धपोत नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जो गहरे समुद्र में मौजूद दुश्मन की पनडुब्बी को खोजकर मार गिराएगी. आसान भाषा में कहें तो ये 'सबमरीन किलर' होगा. यह देश का पहला युद्धपोत है जिसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप के तहत बनाया गया है. यानी इसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों निर्माता शामिल. इसका नाम INS अंजदीप है.

इस युद्धपोत को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में नौसेना में शामिल किया जाएगा. INS अंजदीप को खासतौर से दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए बनाया गया है. इसी वजह से इसे डॉल्फिन हंटर भी कहा जाता है. इसका मतलब असली डॉल्फिन का शिकार करना नहीं है, बल्कि पानी के अंदर तेज चलने वाली सबमरीन को पकड़ना है.

दुश्मन पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में माहिर

यह कोई सामान्य युद्धपोत नहीं है. यह एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी ASW-SWC प्रोजेक्ट का हिस्सा है. आसान शब्दों में कहें तो यह जहाज समुद्र के किनारे और उथले पानी में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में माहिर है. आज के तारीख में समुद्री युद्ध का बड़ा खतरा पानी के नीचे मौजूद होता है. मौका मिलते ही दुश्मन की पनडुब्बी चुपचाप हमला कर सकती है. ऐसे में यह युद्धपोत समय रहते खतरे का पता लगा कर उसे तबाह कर सकता है.

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हाई-स्पीड वॉटर-जेट सिस्टम से लैस

इसे जहाज को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी  शिपयार्ड ने मिलकर तैयार किया है. यह करीब 77 मीटर लंबा है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 46 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसमें हाई-स्पीड वॉटर-जेट सिस्टम लगा है, जिससे यह तेजी से दिशा बदल सकता है. इसकी समुद्र में रहने की क्षमता लगभग 3,333 किलोमीटर तक है. यानी ये एक बहुत बड़े एरिया पर निगरानी और शिकार कर सकता है. इस युद्धपोत को बनाने में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी कंपोनेंट्स देश में ही बने हैं. इसमें लगे अधिकतर उपकरण और सिस्टम भारत में ही तैयार किए गए हैं. यह दिखाता है कि भारत अब खुद अपने रक्षा उपकरण डिजाइन और तैयार करने में सक्षम होता जा रहा है.   

इसमें हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट भी लगे हैं

इस युद्धपोत का नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है. वैसे पहले नौसेना में आईएनएस अंजदीप का नाम युद्धपोत था जिसे 2003 में रिटायर कर दिया था. अब नया जहाज उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है. इसमें ‘अभय' नाम का सोनार लगा है, जो पानी के अंदर छिपी पनडुब्बियों का पता लगाता है. इसके अलावा इसमें हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट भी लगे हैं. यह जहाज तटीय इलाकों में निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी काम आ सकता है.

इसे भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान (Eastern Command) में तैनात किया जाएगा. इससे तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी के आसपास की सुरक्षा और मजबूत होगी. यह जहाज तटीय इलाकों में भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति साबित होगा. इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान ने चीन से आठ अत्याधुनिक पनडुब्बी खरीदने का सौदा किया है. पाकिस्तान को इसी साल पहली पनडुब्बी मिलने की संभावना है. ऐसे में चाइना मेड पाकिस्तानी खतरे से निपटने में या जहाज बहुत ही अहम है.

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