विज्ञापन
This Article is From Jun 19, 2024

गर्मी के बीच महंगाई भी सता रही, दाल-चावल, आटा से लेकर सब्जियों तक के बढ़े दाम- जानें कब मिलेगी राहत?

महंगाई इन दिनों हर आदमी को महसूस हो रही है. चाहे वह अनाज हो या फल और सब्जियां. इसके पीछे बहुत हद तक भयंकर गर्मी भी जिम्मेदार है. यहां जानें कब तक इस महंगाई से मिलेगी राहत...

गर्मी के बीच महंगाई भी सता रही, दाल-चावल, आटा से लेकर सब्जियों तक के बढ़े दाम- जानें कब मिलेगी राहत?
सब्जियों के दाम भी बहुत बढ़ गए हैं.

लोकसभा चुनाव के बीच आम आदमी के लिए दाल-रोटी महंगी हो गई है. पिछले एक महीने में लगभग सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमत में 15% से 20% तक बढ़ोतरी हुई है. दाल-चावल, आटा, शक्कर, तेल, मसाले सबकी कीमतें बढ़ गईं हैं. पिछले तीन महीने में दाल की कीमत 15 से 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई है, जिसमें तुअर, चना, उड़द सारी दालें शामिल हैं.अगर आप स्नैक्स के तौर पर मखाना खाने के शौकीन हैं तो उसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है. इसी तरह सब्जियों के दामों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है.

Latest and Breaking News on NDTV

सब्जियों के दाम

आलू तक दिल्ली में 40 रुपये किलों तक खुदरा मिल रहा है. आजादपुर मंडी में यह करीब 25 रुपये किलो बिक रहा है. इसी तरह प्याज का थोक भाव भी 25-30 रुपये किलो हो गया है. टमाटर 15-20 रुपये किलो बिक रहा है. घीया, करेला, परवल, तोरई, पत्तागोभी, फूलगोभी, कटहल, कुंदरू के भी दामों में 10-20 रुपये बढ़ोतरी हो गई है. सब्जियों की बढ़ती कीमतों के बीच गर्मी को कारण बताया जा रहा है.

मुद्रास्फीति लगातार बढ़ रही

मई के महीने में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 15 महीने के उच्चतम स्तर 2.61 प्रतिशत पर पहुंच गई थी. थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति लगातार तीन महीने से बढ़ रही है. अप्रैल में यह 1.26 प्रतिशत और मई 2023 में यह शून्य से 3.61 प्रतिशत नीचे रही थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 जून को एक बयान में कहा, ‘‘ मई 2024 में मुद्रास्फीति बढ़ने का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों के विनिर्माण, कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस, खनिज तेल और अन्य विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही.''

फरवरी 2023 के बाद सबसे ज्यादा

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मई में 15 महीने के उच्चतम स्तर पर रही है. इसका पिछला उच्चतम स्तर फरवरी 2023 में देखा गया था, जब थोक मुद्रास्फीति 3.85 प्रतिशत थी. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 10 महीने के उच्च स्तर 9.82 प्रतिशत पर पहुंच गई. मई में सब्जियों की महंगाई दर 32.42 प्रतिशत रही, जो एक महीने पहले अप्रैल में 23.60 प्रतिशत थी. इसी तरह प्याज की महंगाई दर 58.05 प्रतिशत, जबकि आलू की महंगाई दर 64.05 प्रतिशत रही. दालों की महंगाई दर मई में 21.95 प्रतिशत रही. हालांकि मई में थोक मुद्रास्फीति की वृद्धि इस महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के विपरीत है. इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार मई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.75 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले 12 महीनों का सबसे निचला स्तर है.

ऐसा होने पर मिलेगी राहत?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ही ध्यान में रखता है. आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में लगातार आठवीं बार ब्याज दर को यथावत रखने का फैसला किया था. बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता ने कहा कि देश में भीषण गर्मी के कारण खाद्य मुद्रास्फीति भी ऊंची बनी रहने का अनुमान है. मानसून की प्रगति भविष्य में खाद्य मुद्रास्फीति की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Inflation, Vegetables Prices Increased, Cereals And Pulses Rate Increased
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com