रेलवे ने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' का हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह परीक्षण 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में किया गया. इस ट्रेन रविवार को हजरत निजामुद्दीन-पलवल रेल मार्ग पर रफ्तार भरी. इस परीक्षण के दौरान 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी.
इस ट्रायल का उद्देश्य तेज रफ्तार में भी 'कवच' सुरक्षा प्रणाली की क्षमता और काम करने के तरीके की जांच करना था. यह परीक्षण सफल रहा. इस दौरान ट्रेन के लोको पायलट और स्टेशन के बीच संचार व्यवस्था ने भी ठीक से काम किया. इस दौरान ट्रेन ने हजरत निजामुद्दीन और पलवल के बीच करीब 50 किलोमीटर की दूरी करीब 40 मिनट में पूरी की. अंग्रेजी अखबार 'इकनॉमिक टाइम्स' की एक खबर के मुताबिक इस रूट पर अभी केवल गतिमान एक्सप्रेस ही 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. गतिमान एक्सप्रेस यह रफ्तार न्यू टाउन स्टेशन पार करने के बाद ही हासिल कर पाती है.
कहां से कहां तक गई स्लीपर वंदे भारत
इस रूट पर स्लीपर वंदे भारत ट्रेन पहली बार 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली. यह वंदे भारत ट्रेन दोपहर एक बजकर 38 मिनट पर हजरत निजामुद्दीन से रवाना हुई और दो बजकर 21 मिनट पर पलवल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर पहुंची. वहां आधे घंटे से अधिक समय तक रुकने के बाद दोपहर दो बजकर 52 मिनट पर पलवल से वापस चली. वापसी में यह ट्रेन तीन बजकर 32 मिनट पर हजरत निजामुद्दीन पहुंची. इस परीक्षण के दौरान 'कवच' सिस्टम की संचार व्यवस्था की भी जांच की गई.इस सफर के दौरान लोको पायलट
इससे पहले दिल्ली-पलवल सेक्शन पर कवच सिस्टम की जांच के लिए मुख्य रूप से इंजन चलाकर परीक्षण किया गया था.दिल्ली-पलवल रूट पर करीब 30 बार कवच का परीक्षण हो चुका है. उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने इस साल फरवरी में दादरी-टुंडला रेल खंड पर 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कवच का सफल परीक्षण किया था. यह परीक्षण 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के रैक पर किया गया था.
क्या है 'कवच'
कवच को भारतीय रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने विकसित किया है. यह बिना अनुमति सिग्नल पार करने की दशा में और अत्यधिक गति और टक्कर से ट्रेनों की रक्षा करता है. कवच पूरी तरह भारत में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है. इसका उद्देश्य ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाना और ट्रेन टक्कर और सिग्नल की अनदेखी जैसी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करना है. जरूरत पड़ने पर कवच लोको पायलट को चेतावनी देता है. अगर ड्राइवर समय पर जरूरी कदम नहीं उठाता, तो सिस्टम अपने आप ट्रेन में ब्रेक भी लगा सकता है.कवच लोको पायलट की मदद करता है और इंसानी गलती के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने में मदद करता है.यह प्रणाली लोको पायलट को उनके केबिन में सिग्नलिंग सूचना के समयबद्ध प्रदर्शन के जरिए मदद करती है. यह प्रदर्शन 120 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार में सुरक्षित संचालन के लिए जरूरी हो जाता है.
पीआईबी की ओर से इस साल फरवरी में जारी एक बयान में बताया गया था कि कवच रेलवे को हर साल ज्यादा मजबूत, तेज और भरोसेमंद सुरक्षा परिवेश बनाने में मदद कर रहा है. इसकी वजह से ट्रेन दुर्घटनाओं में कमी आई है.बयान के मुताबिक साल 2014-15 में 135 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं,जो 2024-25 में घट कर 31 और 2025-26 (नवंबर तक) में केवल 11 रह गईं थीं.
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