प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग बड़ा फैसला किया है. चीन से निवेश के नियमों में ढील दी गई है. IBC कोड में बदलाव को भी मंजूरी दी गई है. FDI शर्तों में ढील के लिए नोट-3 में बदलाव को कैबिनेट की मंजूरी मिली है. चीन से आने वाले निवेश की शर्तों में ढील को कैबिनेट की मंजूरी मिली है. कैबिनेट में जल जीवन मिशन 2028 तक के लिए मंजूरी मिली है. धोलेरा एयरपोर्ट को मंजूरी दी गई है. जेवर एयरपोर्ट का संशोधित बजट 3630 करोड़ रुपये किया गया है.
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा कि भारत ने चीन और सीमा साझा करने वाले अन्य देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील दी है. इसके लिए प्रेस नोट 3 में बदलाव किया गया है. इस प्रेस नोट के तहत, इन देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार की अनिवार्य मंजूरी की आवश्यकता होती है. भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं. अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में दर्ज कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 बिलियन डॉलर) है और वह 23वें स्थान पर है.
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मिडिल ईस्ट में संकट के बीच केंद्र सरकार ने चीन को लेकर ये बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने चीन से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में कई तरह की ढील को हरी झंडी दिखाई है. इस फैसले से भारत में चीन के एफडीआई आने का रास्ता साफ हो गया है. दोनों देशों के बीच गलवान संकट के बाद बड़ा गतिरोध पैदा हो गया था.सरकार ने चीनी निवेश को लेकर कई तरह की शर्तें लगा दी थीं. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 130 अरब डॉलर का है.
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रिश्तों को पटरी पर लाने का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 2024 में मुलाकात के बाद शुरू हुई थी. इस बैठक के कुछ वक्त पहले ही वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी थीं. भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवा और कैलास मानसरोवर यात्रा दोबारा प्रारंभ करने पर रजामंदी बनी थी. पीएम मोदी शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भी गए थे. भारत में एआई वर्ल्ड लीडरशिप समिट के डिक्लेरेशन का चीन ने स्वागत किया था.
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