विज्ञापन

समंदर में भी बढ़ेगी भारत की ताकत, होने वाली है 70 हजार करोड़ की पनडुब्बी डील, चीन-पाक की बढ़ेगी टेंशन!

भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए सरकार जल्द ही 70000 करोड़ रुपये के 'प्रोजेक्ट-75 इंडिया' को मंजूरी दे सकती है. इस मेगा रक्षा सौदे के तहत भारत में ही 6 आधुनिक AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां बनाएगा.

समंदर में भी बढ़ेगी भारत की ताकत, होने वाली है 70 हजार करोड़ की पनडुब्बी डील, चीन-पाक की बढ़ेगी टेंशन!
  • भारत प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत छह आधुनिक पनडुब्बियां लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की डील में खरीदेगा
  • मझगांव डॉकयार्ड शिप बिल्डर्स लिमिटेड जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ मिलकर पनडुब्बी बनाएगी
  • इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीक होगी जो पानी के अंदर लंबे समय तक रहने में सक्षम बनाएगी
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

भारत जल्द ही नौसेना की सबसे बड़ी रक्षा डील में से एक को अंतिम रूप दे सकता है. प्रोजेक्ट-75 इंडिया (P-75I) के तहत 6 आधुनिक पनडुब्बियां खरीदी जाएंगी. इस डील की कीमत करीब 70,000 करोड़ रुपये होगी. सरकार सितंबर तक इस समझौते को मंजूरी दे सकती है. इस  महीने के अंत तक एक अंतर-मंत्रालयी समूह भी इस प्रक्रिया को हरी झंडी दे सकता है.

मुंबई की कंपनी मझगांव डॉकयार्ड शिप बिल्डर्स लिमिटेड इस परियोजना में भारत की रणनीतिक साझेदार होगी. कंपनी जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ मिलकर काम करेगी. इस समझौते के तहत जर्मनी भारत को पनडुब्बी डिजाइन और तकनीक देगा. इसके बाद भारत में ही इनका निर्माण होगा. इस डील साइन होने के सात साल बाद पहली पनडुब्बी मिलेगी. इसके बाद हर साल एक नई पनडुब्बी नौसेना को सौंपी जाएगी.

AIP तकनीक होगी सबसे बड़ी ताकत

इन सभी पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी AIP तकनीक होगी. AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं. सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए ऊपर आना पड़ता है. इससे दुश्मन उन्हें पकड़ सकता है. लेकिन AIP इस खतरे को काफी कम कर देता है.

Latest and Breaking News on NDTV

भारत के पास अभी एक भी AIP पनडुब्बी नहीं

भारत के पास फिलहाल AIP तकनीक वाली एक भी पनडुब्बी नहीं है. भारतीय नौसेना के पास अभी करीब 16 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं. इनमें से 10 काफी पुरानी हो चुकी हैं और जल्द रिटायर होने की स्थिति में हैं. वहीं पाकिस्तान तेजी से अपनी अंडरवॉटर ताकत बढ़ा रहा है. पिछले साल  पाकिस्तान ने चीन की मदद से बनी चौथी AIP पनडुब्बी को शामिल किया. यह हंगोर क्लास की 8 पनडुब्बियों की श्रृंखला का हिस्सा है. आने वाले कुछ सालों में पाकिस्तान के पास 11 AIP पनडुब्बियां हो सकती हैं. इससे उसे पानी के अंदर लंबे समय तक टिके रहने में बढ़त मिल सकती है.

DRDO बना रहा स्वदेशी AIP सिस्टम

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी DRDO भी स्वदेशी AIP सिस्टम विकसित कर रहा है.संभावना है कि यह तकनीक जून 2026 तक तैयार हो सकती है. इसे भारतीय नौसेना की  पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी में लगाया जाएगा. यह कलवरी क्लास की दूसरी पनडुब्बी है. इसे 2026 के अंत में मेंटेनेंस के दौरान अपग्रेड किया जाएगा.  हालांकि यह परियोजना पहले ही देरी का शिकार हो चुकी है. पहले यह तकनीक आईएनएस कलवरी  में लगाई जानी थी, लेकिन समय पर तैयार नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो सका.

Latest and Breaking News on NDTV

चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी चिंता

भारत की चिंता सिर्फ पाकिस्तान नहीं है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नेवी विंग पीएलए नेवी भी हिंद महासागर क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. चीन के पास अभी करीब 65 पनडुब्बियां होने का अनुमान है. 2035 तक यह संख्या 80 तक पहुंच सकती है. वही आने वाले समय में भारतीय नौसेना के पास फिलहाल करीब 20 के करीब पनडुब्बी होने की संभावना है जो जरूरत और चुनैतियों के मुकाबलें काफी कम है ऐसे में  प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत नौसेना को नये पनडुब्बी का मिलना भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका से भारत की बड़ी हथियार डील, चीन-पाकिस्तान की टेंशन! अपाचे हेलीकॉप्टर और तोप उड़ाएगी दुश्मन की नींद

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com