
महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी गठबंधन (शिवसेना यूबीटी, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस) में राज्य की 48 सीटों को लेकर बंटवारे पर सहमति बन गई है. मंगलवार शाम को एक बैठक के बाद शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा कि उनका मुस्कुराना इस बात का संकेत है कि बैठक कैसी रही. लगभग तीन घंटे तक चली मेगा बैठक के बाद राउत ने संवाददाताओं से कहा कि हम सभी एक साथ हैं और एकजुट रहेंगे. हमने प्रत्येक सीट पर चर्चा की है.
वहीं कांग्रेस के राज्य प्रभारी रमेश चेन्निथला ने कहा, "इंडिया गठबंधन में सीटों की घोषणा करने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य होगा. शिवसेना और एनसीपी से कुछ लोग अलग हुए हैं, लेकिन वोटर अब भी उद्धव गुट और एनसीपी के साथ है. हम चुनाव में साथ रहेंगे."
कांग्रेस के लिए, समाजवादी पार्टी, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के साथ उसके खट्टे संबंधों को देखते हुए, सीट बंटवारे पर चर्चा आसान नहीं होगी. तीनों दलों ने संकेत दिया है कि वे अपनी शर्तों पर साझेदारी के लिए तैयार हैं.
एसपी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे के लिए कांग्रेस से छह सीटों की मांग की थी, जिसे तत्कालीन पार्टी प्रदेश प्रमुख कमल नाथ ने ठुकरा दिया था, जिन्हें बाद में पार्टी की हार के बाद बर्खास्त कर दिया गया.
आप के साथ कांग्रेस की बातचीत भी अधर में है. पार्टी दिल्ली में चार और पंजाब में सात सीटें चाहती है, लेकिन आप इसे मानने के लिए तैयार नहीं है. दिल्ली और पंजाब दोनों में सत्तारूढ़ दल सीटों का बड़ा हिस्सा चाहता है. सूत्रों ने बताया कि आप गोवा, हरियाणा और गुजरात में भी चुनाव लड़ना चाहती है.
इधर बिहार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने शुरुआती बातचीत कर ली है. नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड राज्य की 40 सीटों में से 17 से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं है. संभावना है कि राजद भी 2015 विधानसभा चुनाव के फॉर्मूले के अनुरूप 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. पांच सीटें कांग्रेस और एक सीट सीपीआई-एमएल के खाते में जा सकती है.
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