इस महीने आए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पहली बार विपक्षी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस यानी इंडिया गठबंधन की बैठक होने वाली है. उम्मीद है कि यह बैठक छह जून को हो.विपक्ष को बंगाल और असम में मिली हार के बाद यह बैठक महत्वपूर्ण होने वाली है. बंगाल में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाने की मांग की थी. हालांकि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन कहीं नजर नहीं आया था. इसमें शामिल दल राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हुए नजर आए थे.
विधानसभा चुनाव नतीजों से निकला संदेश
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से दो तरह का संदेश निकला. पहला यह कि बीजेपी और मजबूत हो रही है और दूसरा यह कि अब क्षेत्रीय क्षत्रपों का आभामंडल कमजोर पड़ रहा है, कम से कम ममता बनर्जी और एमके स्टालिन की हार का तो यही संदेश निकला था. इसका एक और पक्ष था, वह यह कि यह कांग्रेस के मजबूत होने का संदेश दे गई. कांग्रेस ने केरल में एक दशक बाद वापसी की है तो तमिलनाडु में टीवीके की सरकार में साझीदार बनी है.
आज मिजोरम, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश,जम्मू कश्मीर, केरल,तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना को छोड़कर पूरे देश में बीजेपी और उसके सहयोगियों की सरकार है. बीजेपी के इस तरह मजबूत होने से कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों में खलबली है.ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल, तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे जैसे क्षत्रप हार चुके हैं. ऐसे में अगले महीने होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक महत्वपूर्ण होने वाली है. विपक्षी गठबंधन आपसी मतभेदों को भुलाकर विपक्षी खेमे को मजबूती देना चाहता है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता को धार दी जा सके.
ममता क्यों कर रही हैं पहल
इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाने की मांग सबसे पहले ममता बनर्जी ने की थी.वह भी बंगाल में मिली हार के तत्काल बाद. उन्होंने कहा था कि वो विपक्षी गठबंधन को मजबूत करेंगी. हालांकि इंडिया गठबंधन अंदर से खुद ही एक नजर नहीं आता है. एक तरफ जहां सपा, आप, झामुमो और राजद जैसे दल ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आते हैं तो एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव गुट) जैसे दल कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ.
इंडिया गठबंधन में यह लड़ाई साफ है. इसका फायदा भी बीजेपी उठा ले जाती है. यह बिहार चुनाव में नजर भी आया था, जब बीजेपी और उसके साथियों ने सीटों का बंटवारा कर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया था, उस समय तक इंडिया गठबंधन यह तय नहीं कर पाया था कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी. यह भ्रम अंत तक बना रहा और कुछ सीटों पर इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने थे. इस चुनाव में बीजेपी और उसके साथ शानदार जीत दर्ज कर पाने में सफल रहे. हालांकि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आए. उन्होंने जनादेश को चुराने का आरोप लगाया था.
माना जा रहा है कि विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में संसद की रणनीति, आंदोलनों और राज्यों में समन्वय बनाने पर जोर दिया जाए. इसमें राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी गठबंधन को एकजुट दिखाने पर जोर दिया जा सकता है.इससे पहले इंडिया गठबंधन बैठक 15 अप्रैल को हुई थी. यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित की गई थी. इसमें संसद के महिला आरक्षण पर संसद के विशेष सत्र और डेलिमिटेशन के मुद्दे पर रणनीति बनाई गई थी. लेकिन यह इंडिया गठबंधन की औपचारिक बैठक नहीं थी. औपचारिक बैठकें बहुत कम हुई हैं. इस गठबंधन का गठन 2023 में हुआ था. इसकी पहली बैठक उसी साल जुलाई में पटना में हुई थी. इस बैठक में 16 दलों के नेताओं ने भाग लिया था.
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