- मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण श्रीलंका ने सरकारी संस्थानों में सप्ताह में चार दिन काम करने का निर्णय लिया
- पाकिस्तान ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में भारी कटौती और सरकारी खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है
- नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बढ़ने से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी गैस के दामों में बड़ी वृद्धि की है
ईरान और इजरायल-अमेरिका में जंग के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गहराते ऊर्जा संकट ने दक्षिण एशियाई देशों की कमर तोड़ दी है. पाकिस्तान के बाद अब श्रीलंका ने भी ईंधन की भारी किल्लत के सामने घुटने टेक दिए हैं. नेपाल ने पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा कर दिया है. भारत भी मिडिल ईस्ट संकट की मार झेल रहा है. भारत का शेयर बाजार युद्ध शुरू होने से अब तक 5000 से ज्यादा अंक नीचे आ चुका है. हालांकि, गैस की किल्लत काफी हद तक नियंत्रण में आ गई है. लेकिन इस बीच कुछ ऐसे देश भी हैं, जिन्होंने आपदा में अवसर तलाश लिया है और जमकर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं.
श्रीलंका ने ऑफिसों में ‘फोर-डे वर्किंग वीक' लागू
मिडिल ईस्ट क्राइसिस के बीच श्रीलंका भारी ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. ऐसे में श्रीलंका ने तेल की बूंद-बूंद बचाने के लिए कवायद शुरू कर दी है. कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए श्रीलंका सरकार ने सोमवार, 16 मार्च को देश में ‘फोर-डे वर्किंग वीक' लागू करने की घोषणा कर दी है. इस आदेश के बाद क्या असर पड़ेगा आइए आपको बताते हैं.
- सरकारी संस्थानों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सप्ताह में केवल चार दिन ही काम होगा.
- ईंधन संरक्षण के लिए अब हर बुधवार को सरकारी दफ्तर और शिक्षण संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे.
- सरकार ने लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल संभल कर करें.
- सरकार ने कहा कि परिवहन में इस्तेमाल होने वाले तेल की खपत कम करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है.

पाकिस्तान में सैलरी में कटौती, सरकारी खरीद पर पाबंदी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकारी कंपनियों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों की सैलरी में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दे दी. अफगानिस्तान से जारी जंग के बीच पाकिस्तान को मिडिल ईस्ट संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है. इन हालातों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने बेहद कठोर कदम उठाए हैं.
- सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी.
- कॉरपोरेशन और संस्थाओं के बोर्ड में प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को अब कोई भागीदारी शुल्क (सिटिंग फीस) नहीं मिलेगा.
- सरकारी खरीद पर भी पूरी पाबंदी है.
- सरकारी अधिकारी, मंत्री, राज्य मंत्री और विशेष सहायकों की सभी विदेश यात्राओं पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी.
- पेट्रोल की कीमत में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई.
- सरकारी दफ्तरों में ‘फोर-डे वर्किंग वीक' लागू किया जा चुका है.
नेपाल में बढ़ाए गए पेट्रोल-डीजल के दाम
नेपाल ऑयल निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति प्रबंधन में आ रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है. पेट्रोल की कीमत में 31 रुपये प्रति लीटर, डीजल में 54 रुपये प्रति लीटर तथा एलपीजी गैस में 296 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है. मूल्य वृद्धि के बाद अब पेट्रोल की कीमत 188 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत 196 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी गैस का मूल्य 2,126 रुपये प्रति सिलेंडर तय किया गया है.
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मिडिल ईस्ट संकट में तिजोरी भर रहे ये 3 देश
रूस: यूक्रेन से युद्ध लड़ रहे रूस के लिए ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग किसी लॉटरी की तरह है. रूस पर पश्चिमी देशों ने कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिसका मकसद रूस को आर्थिक रूप से तोड़ना था. लेकिन ईरान वाले युद्ध से बाजी पलट गई है. रूस के पास दुनिया को देने के लिए काफी मात्रा में तेल और गैस है. रूस ने तेल के दाम भी बढ़ा दिए हैं, जिसे खरीदना है खरीदे. तेल की कीमतें 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंचने से रूस की रोजाना लगभग 150 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है.
नॉर्वे: यूरोप के पास अपना तेल-गैस बहुत कम है. संकट के समय यूरोप आंख मूंदकर नॉर्वे पर भरोसा करता है. नॉर्वे के पास उत्तरी सागर में तेल और गैस का खजाना है, जिसका उसे फायदा मिल रहा है. खाड़ी देशों के टैंकरों पर हमले का डर बढ़ा, तो यूरोप ने नॉर्वे से मदद मांगी. नॉर्वे ने इस मौके को छोड़ा नहीं. नॉर्वे अपनी गैस सप्लाई में करीब 10 से 12 प्रतिशत का इजाफा कर दिया. इससे अरबों रुपये का फायदा नॉर्वे को हो रहा है. यूरोप की मजबूरी ने नॉर्वे की तिजोरी भर दी है.
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कनाडा: मिडिल ईस्ट संकट के बीच ‘ब्लैक गोल्ड' पर कनाडा ने भी दांव खेला है. कनाडा के पास ‘ऑयल सैंड्स' के रूप में कच्चे तेल का खजाना है. मिडिल ईस्ट संकट के बीच कनाडा की बड़ी तेल कंपनियों की लॉटरी लग गई है. मार्च 2026 की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वहां की दिग्गज कंपनी ‘कनाडियन नेचुरल रिसोर्सेज' का मुनाफा उनके अपने अंदाजे से भी 18.8 प्रतिशत ज्यादा चल रहा है.
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