फिंगरप्रिंट बदल कर 'अपराधियों' को दोबारा कुवैत का वीजा दिलाते थे बदामश, पुलिस ने किया गिरफ्तार

आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही पुलिस ने डिपोर्ट होने के बाद कुवैत में फिर से प्रवेश पाने के लिए सर्जरी कराने वाले दो लोगों को भी गिरफ्तार किया है.

फिंगरप्रिंट बदल कर 'अपराधियों' को दोबारा कुवैत का वीजा दिलाते थे बदामश, पुलिस ने किया गिरफ्तार

इस प्रक्रिया के बाद एक या दो महीने में, घाव ठीक हो जाता है और एक साल तक फिंगरप्रिंट पैटर्न को थोड़ा बदल जाता है. 

अगर आपको लगता है कि फिंगरप्रिंट से कभी छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता और इसकी मदद से आसानी से आरोपियों को पकड़ा जा सकता है, तो आप गलतफहमी में हैं. तेलंगाना में पुलिस ने दो ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जो गैरकानूनी तौर पर सर्जरी की मदद से फिंगरप्रिंट बदल कर नौकरी के लिए लोगों को कुवैत भेजने का धंधा करते थे. 

पुलिस ने कहा कि उन्होंने राजस्थान के साथ-साथ केरल में फिंगरप्रिंट पैटर्न बदलने के लिए कम से कम 11 ऐसी सर्जरी की हैं. सभी से सर्जरी के लिए 25,000 का शुल्क लिया गया है. आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही पुलिस ने डिपोर्ट होने के बाद कुवैत में फिर से प्रवेश पाने के लिए सर्जरी कराने वाले दो लोगों को भी गिरफ्तार किया है. साथ ही सर्जरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मेडिकल किट और अन्य सबूत भी जब्त कर लिए हैं. 

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मलकाजगिरी जोन से एक विशेष अभियान दल ने सोमवार को घाटकेसर पुलिस के साथ एक संयुक्त अभियान चलाया और गज्जालकोंडुगरी नागा मुनेश्वर रेड्डी, सागबाला वेंकट रमना, बोविला शिव शंकर रेड्डी और रेंडला राम कृष्ण रेड्डी नामक चार लोगों को गिरफ्तार किया. वे कडप्पा से आए थे और हैदराबाद के एक होटल में ठहरे थे. वे सभी घाटकेसर में और लोगों की ऐसी सर्जरी करने की तैयार में थे. 

पुलिस के अनुसार, गजलकोंडुगरी नागा मुनेश्वर रेड्डी वाईएसआर कडपा जिले के कृष्णा डायग्नोस्टिक्स में 36 वर्षीय रेडियोलॉजिस्ट और एक्स-रे तकनीशियन है. वहीं, 39 वर्षीय सागबाला वेंकट रमना तिरुपति के डीबीआर अस्पताल में एनेस्थीसिया टेक्नीशियन है. जबकि 25 वर्षीय बोविला शिव शंकर रेड्डी और 38 वर्षीय रेंडला रामा कृष्ण रेड्डी कुवैत में कंस्ट्रक्शन वर्कर के रूप में काम करते थे. 

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मिली जानकारी अनुसार इस प्रक्रिया से उन व्यक्तियों की दोबारा कुवैत में एंट्री में मदद की जाती है, जिन्हें कुवैत से आपराधिक गतिविधियों के लिए निर्वासित किया गया था. सर्जरी करने के लिए, गजलकोंडुगरी और सागबाला ने उंगलियों की ऊपरी परत को काट दिया, फिर टिशू के एक हिस्से को हटा दिया और इसे फिर से सिल दिया. इस प्रक्रिया के बाद एक या दो महीने में, घाव ठीक हो जाता है और एक साल तक फिंगरप्रिंट पैटर्न को थोड़ा बदल जाता है.