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IIT मंडी में 'शूद्र पोस्टर' पर विवाद, कॉलेज प्रशासन ने दिए जांच के आदेश, भगवद्गीता से जुड़ा है मामला

पोस्टर में भगवद्गीता के एक श्लोक का उल्लेख था, जिसमें कहा गया था कि मानव समाज के चार वर्गों का विभाजन ‘प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कार्यों’ के आधार पर किया गया है.

IIT मंडी में 'शूद्र पोस्टर' पर विवाद, कॉलेज प्रशासन ने दिए जांच के आदेश, भगवद्गीता से जुड़ा है मामला
मंडी:

आईआईटी मंडी ने अपने परिसर में भगवद्गीता पर आधारित एक विवादित पोस्टर लगाने को लेकर जांच के आदेश दिए हैं. इस पोस्टर में कहा गया था कि ‘शूद्रों को उच्च वर्ग की सेवा' करनी चाहिए. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने इसे छात्रों की धर्मग्रंथ की अपनी व्याख्या बताया और इसकी सामग्री से संस्थान को अलग कर लिया.

बेहरा का भगवद्गीता के शिक्षण और अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) से लंबे समय से जुड़ाव रहा है. वह आईआईटी मंडी में भगवद्गीता पर तीन क्रेडिट का पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं. इसके अलावा वह प्रस्तावित भक्तिवेदांत विश्वविद्यालय के संस्थापक हैं, जो खुद को इस्कॉन की पहल बताता है.

बेहरा ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘कुछ छात्रों ने गीता की व्याख्या अपने तरीके से की. मैंने एक जांच समिति बनाई है. यह छात्रों का कार्यक्रम था.'' बेहरा ने जोर दिया कि वह और संस्थान जातिगत भेदभाव के खिलाफ़ हैं.

रविवार को ‘आईआईटी मंडी कम्युनिटी' को भेजे गए एक ईमेल में बेहरा ने कहा कि चार सितंबर को जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए पोस्टर के बारे में जानकर वह ‘स्तब्ध' रह गए. उन्होंने कहा कि संस्थान ने किसी भी तरह से इस पोस्टर का समर्थन नहीं किया था. इस ईमेल का शीर्षक ‘परिसर में हाल में लगाए गए पोस्टर की कड़ी निंदा' था.

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उन्होंने ईमेल में लिखा, ‘‘मैंने हर मंच पर किसी भी रूप में जातिगत भेदभाव के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से आवाज उठाई है. इस मामले में मैंने एक जांच समिति गठित की है, ताकि संस्थान के परिसर का इस्तेमाल कभी भी सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी किसी गतिविधि के लिए न हो. इस घटना से आहत हमारे समुदाय के सदस्यों के प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है.''

बेहरा ने कहा कि संस्थान संविधान में निहित ‘समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण' और अन्य सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने ईमेल में कहा, ‘‘संस्थान किसी भी तरह के जातिगत भेदभाव की कड़ी निंदा करता है.'' उन्होंने संस्थान समुदाय से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी को ‘‘इस तरह के पूर्वाग्रह और किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए.''

बेहरा ने बताया कि यह पोस्टर छात्रों की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया था. उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसमें संकाय सदस्यों के अलावा एससी और ओबीसी समेत विभिन्न सामाजिक वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.

यह विवाद ‘भगवद्गीता - द टाइमलेस विजडम' शीर्षक वाले एक पोस्टर को लेकर शुरू हुआ, जिसे संस्थान के सभागार के बाहर लगाया गया था. इस पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों में बांटकर दर्शाया गया था.

इसमें ब्राह्मणों की भूमिका ‘ईश्वर का संदेश फैलाना', क्षत्रियों की भूमिका ‘समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना', वैश्यों की भूमिका ‘अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना और दूसरों का सहयोग करना' तथा शूद्रों की भूमिका ‘उच्च वर्ग की सेवा करना' बताई गई थी.

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इस पोस्टर में भगवद्गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख था, जिसमें कहा गया था कि मानव समाज के चार वर्गों का विभाजन ‘प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कार्यों' के आधार पर किया गया है.

बेहरा ने बताया कि वह परिसर से बाहर थे और शनिवार को ही लौटे हैं. उन्होंने कहा कि रविवार सुबह उन्हें इस विवाद के बारे में जानकारी मिली. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पोस्टर नहीं देखा है. मैं इस मामले में किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहता और समिति को इस पर फैसला करना है.''

आईआईटी मंडी की वेबसाइट पर बेहरा के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, वह पिछले 27 वर्षों से युवाओं को भगवद्गीता के माध्यम से ‘शांति के सार्वभौमिक सिद्धांतों' की शिक्षा देते रहे हैं. उन्हें ‘एचजी लीला पुरुषोत्तम दास' के नाम से भी जाना जाता है.

आईआईटी निदेशक ने कहा कि इस्कॉन जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करता है और समानता का संदेश देता है. उन्होंने कहा, ‘‘इस्कॉन एकमात्र ऐसा संगठन है जो जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ सख्ती और मजबूती से आवाज उठाता है. इस्कॉन में शूद्र समुदाय के लोग भी पुजारी हैं. मुस्लिम समुदाय के लोग भी पुजारी हैं.''

बेहरा ने कहा, ‘‘हम हर तरह के जातिवाद के खिलाफ हैं. सभी पेशागत जिम्मेदारियां गुण और कर्म के आधार पर तय होती हैं.''

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान आईआईटी मंडी में वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि जब वह संस्थान में आए थे, तब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से कोई भी संकाय सदस्य नहीं था, लेकिन बाद में इन समुदायों के सदस्यों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.

रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बेहरा अपने विचारों को लेकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं.

2023 में उन्होंने छात्रों से मांसाहार न करने की शपथ लेने को कहा था. उस दौरान उन्होंने दावा किया था कि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों के प्रति क्रूरता के कारण हो रही हैं. इससे एक साल पहले, आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर नियुक्ति के तुरंत बाद एक वीडियो सामने आया था, जिसमें बेहरा ने दावा किया था कि उन्होंने पवित्र मंत्रों का जाप कर एक मित्र के परिवार को ‘बुरी आत्माओं' से मुक्ति दिलाने में मदद की थी.

आईआईटी मंडी के भारतीय ज्ञान प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र ने भी जून में एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें भगवद्गीता, आयुर्वेद और पुनर्जन्म समेत कई विषयों पर सत्र आयोजित किए गए थे. बेहरा इस सम्मेलन के प्रमुख आयोजकों में से एक थे. वह ‘पुनर्जन्म, ओबीई (शरीर से बाहर के अनुभव) और मृत्यु के बाद संवाद' शीर्षक वाले एक सत्र के सह-आयोजक भी थे.

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