पीपीएफ खाता का लाभ और कैसे उठाएं फायदा.
नई दिल्ली:
- पीपीएफ का खाता खुलवाने में अकसर लोगों को यह डर लगता है कि पैसा कम से कम 15 सालों के लिए लॉक हो गया. यानी जरूरत पड़ी तब भी यह पैसा किसी भी प्रकार से प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है. इसका अर्थ यह हुआ कि पीपीएफ में निवेश लंबे समय के लिए होता है.
- सरकार ने लोगों की शंका का समाधान करते हुए इस खाते में जमा पैसे पर लोन देने की व्यवस्था इसी मंशा से शुरू की. हालांकि इस लोन के साथ कुछ शर्तें भी हैं. पीपीएफ खाते से लोन बहुत आसानी से मिल जाता है और इस लोन को चुकता करना भी आसान होता है. (पढ़ें - जमा पूंजी बढ़ाने के लिए FD या PPF में बेहतर कौन?)
- पीपीएफ से लोन पर ब्याज दर काफी कम होती है. दरअसल इस लोन की ब्याज दर, पीपीएफ खाते में मिल रही ब्याज दर से सिर्फ 2 प्रतिशत ज्यादा होती है. यानी अगर पीपीएफ खाते पर 7.6% का ब्याज मिल रहा है तो पीपीएफ लोन पर 9.6 प्रतिशत का ब्याज देना होगा. यह बैंकों के पर्सनल लोन से काफी सस्ता है. अमूमन बैंक के पर्सनल लोन पर 12-15 का ब्याज दर पर मिलते हैं. बता दें कि पीपीएफ की ब्याज दरें हर तिमाही में बदलती रहती हैं इसलिए लोन पर लागू होने वाली ब्याज दरें भी उसी हिसाब से बदलती रहती हैं.
- पीपीएफ खाते से लोन लेने के लिए कुछ भी गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती. क्योंकि लोन पीएफ के बैलेंस पर लिया गया है, इसलिए सरकार भी इसकी वसूली के लिए सख्ती नहीं करती है. (पढ़ें - नौकरी पेशा को क्यों खुलवाना चाहिए PPF खाता, और उठाना चाहिए यह बड़ा लाभ)
- पीपीएफ खाते से लिए गए लोग को एकमुश्त जमा करना अनिवार्य भी नहीं है. आप अपनी सुविधानुसार 36 किस्तों तक में कर्ज चुका सकते हैं. यानी आपको रकम का इंतजाम करने की मुश्किल से भी नहीं गुजरना होगा.
- पीपीएफ अकाउंट से लोन लेने के लिए कुछ शर्तों को ध्यान में रखना होता है. यह लोन एक पूरा वित्तीय वर्ष बीतने के बाद ही मिल सकता है. सरल शब्दों में, जिस वित्तीय वर्ष के दौरान पीपीएफ खाता खोला गया है, उससे तीसरे वित्तीय वर्ष में जाकर लोन के लिए आवेदन किया जा सकता है.
- दूसरी बात गौर करने की यह है कि पीपीएफ खाते पर पांच साल पूरे होने के बाद लोन सुविधा नहीं मिलती.लोन की रकम पीपीएफ खाते में पिछले वित्तीय वर्ष के पहले वाले वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद रकम के 25प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती.
- पीपीएफ खाते पर लोन की सुविधा लेने के बाद इसकी अदायगी के लिए तीन वर्ष दिए जाते हैं. इसका अर्थ साफ है कि 36 महीनों की किश्तों में भी इस लोन को चुकता किया जा सकता है. एक बार लोन की रकम चुकता कर देने के बाद खाताधारक फिर लोन ले सकता है लेकिन खाते पर लोन की सुविधा नियमानुसार मिल रही हो. एक वित्तवर्ष में एक ही बार खाते पर लोन लिया जा सकता है. (पढ़ें - अब बचत खाते जैसा हो जाएगा आपका PPF अकाउंट)
- पीपीएफ खाते में हर साल के लिए निर्धारित न्यूनतम रकम यानी कि कम से कम 500 सौ रुपये जमा होने ही चाहिए. खाता चलती हुई सूरत में होना चाहिए. ऐसा नहीं होने पर अगले वित्तीय वर्ष के दौरान इस पर लोन की सुविधान नहीं मिलती. इसके अलावा एक वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक ही खाते में जमा कराए जा सकते हैं.
- यहां यह साफ कहा जा सकता है कि जिस वित्तीय वर्ष में पीपीएफ खाता खुलवाया गया है, उसके बाद छठवें वित्तीय वर्ष शुरू होने पर लोन के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है. लेकिन, इसी वित्तीय वर्ष से, कुछ अनिवार्य परिस्थितियों या जरूरत के समय पीपीएफ खाते की मेच्योरिटी से पहले ही नकद की निकासी की सुविधा शुरू हो जाती है. यानी पीपीएफ से पैसे निकालने की अनुमति पीपीएफ खाता खोलने के सातवें साल के बाद दी जाती है. निकासी की अधिकतम सीमा, निकासी वाले साल से पहले चौथे साल के अंत में मौजूद शेष राशि की 50% या ठीक पिछले साल के अंत में मौजूद शेष राशि की 50% है. पीपीएफ से पैसे निकालने की सुविधा साल में सिर्फ एक बार ही मिलती है.
- पीपीएफ खाते को समयपूर्व बंद करने की सुविधा भी उपलब्ध है. पांच वित्त वर्षों तक चलने के बाद पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद करने की सुविधा है. पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद करने की सुविधा कुछ खास मामलों या परिस्थितियों में ही दी जाती है. यदि अकाउंट धारक को किसी गंभीर या जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए या अकाउंट धारक या नाबालिग अकाउंट धारक की आगे की पढ़ाई के लिए पैसे की जरूरत हो. समय से पहले अकाउंट बंद करने के लिए संबंधित दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं. इससे नुकसान यह है कि समय से पहले अकाउंट बंद करने पर अकाउंट धारक होने के नाते आपको अपनी जमा राशि के लिए वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर से एक प्रतिशत कम ब्याज मिलेगा.
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