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बिहार में समान नागरिक संहिता जेडीयू के बिना भी लागू करा सकती है सम्राट चौधरी सरकार? समझिए कैसे

समान नागरिक संहिता को लेकर जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा है कि जल्दी ही इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की जाएगी

बिहार में समान नागरिक संहिता जेडीयू के बिना भी लागू करा सकती है सम्राट चौधरी सरकार? समझिए कैसे
  • गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि 2029 से पहले भारत के 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी
  • जेडीयू ने अभी तक समान नागरिक संहिता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और अमित शाह से बातचीत की योजना है
  • नीतीश ने 2017 में विधि आयोग को लिखा था कि समान नागरिक संहिता व्यापक सहमति से और सोच-समझकर लागू होनी चाहिए
पटना:

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के चुनाव आने वाले हैं. उससे पहले होम मिनिस्टर अमित शाह के एक ऐलान से हलचल तेज हो गई है. उन्होंने सोमवार को कहा था कि 2029 से पहले देश के 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी. अब इसे लेकर उन राज्यों में चर्चाएं तेज हैं, जहां भाजपा गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही है या फिर हिस्सा बनी हुई है. खासतौर पर बिहार में नजरें टिकी हैं, जहां उसके साथ चिराग पासवान और नीतीश कुमार जैसे नेता हैं. जेडीयू को पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार के 24 जनवरी 2017 को विधि आयोग को लिखे पत्र की याद दिलाई जा रही है, जिसमें उन्होंने आम राय के बाद ही समान नागरिक संहिता पर आगे बढ़ने को कहा था.

इस बीच जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा है कि जल्दी ही इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की जाएगी. वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में किसी भी सूरत में समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने दी जाएगी. इसके बाद सवाल उठ रहा है कि जेडीयू के इस रुख का यूसीसी लागू करने पर क्या असर होगा? क्या जेडीयू जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी की अलग राय के बावजूद बीजेपी बिहार में समान नागरिक संहिता लागू करा सकेगी जैसा कि गृह मंत्री ने ऐलान किया है. जेडीयू सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने बदले हालात में अभी कोई निर्णय नहीं किया है. इसीलिए गृह मंत्री से मुलाकात का समय लिया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि सरकार की मंशा क्या है? 

समान नागरिक संहिता के बिल के मसौदे के बारे में जानकारी भी ली जाएगी. इसके बाद पार्टी के भीतर चर्चा के बाद फैसला होगा. जेडीयू सूत्रों के अनुसार अभी यह विषय सामने नहीं है इसलिए जल्दबाज़ी में कोई बात कहने का औचित्य नहीं है. पार्टी के आला सूत्र श्याम रजक के उस बयान को ख़ारिज करते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में किसी भी सूरत में यूसीसी लागू नहीं होने दी जाएगी. वे कहते हैं कि इस मुद्दे पर नीतीश कुमार का पत्र ही पार्टी की लाइन है. विधि आयोग को लिखे इस पत्र में नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया था कि जल्दबाज़ी नहीं होनी चाहिए. 

उन्होंने लिखा था कि समान नागरिक संहिता को किसी राजनीतिक हथियार की तरह ज़बरदस्ती लागू करने के बजाय व्यापक सहमति और विचार-विमर्श के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए. विधि आयोग को भेजे पत्र में जेडीयू अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को नीति निर्देशक तत्वों के तहत यूसीसी लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है, जो मौलिक अधिकारों के अंतर्गत नहीं आता है. उन्होंने रेखांकित किया कि भारत एक विविधताओं से भरा देश है, जहां विभिन्न धर्मों और जातीय समूहों के बीच एक संवेदनशील संतुलन बना हुआ है. 

वाजपेयी सरकार के दौर में भी नीतीश कुमार ने किया था विरोध

अल्पसंख्यकों और विभिन्न धार्मिक समूहों से ठोस परामर्श किए बिना यूसीसी थोपने से सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है और धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों पर विश्वास कम हो सकता है. गौरतलब है कि भाजपा की मूल विचारधारा के मुद्दों पर जेडीयू का तबसे विरोध रहा है, जब वह समता पार्टी के नाम से जानी जाती थी. वाजपेयी सरकार में शामिल समता पार्टी के इसी विरोध के कारण न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाया गया था, जिससे अनुच्छेद 370, राम मंदिर और समान नागरिक संहिता को बाहर रखा गया था.

हालांकि यह 2017 का पत्र है. तब से अब तक हालात काफ़ी बदल गए. भाजपा शासित उत्तराखंड में यूसीसी लागू कर दी गई है. अन्य भाजपा शासित राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उत्तराखंड के बिल के मसौदे को ही अन्य राज्यों में कॉपी-पेस्ट कर पारित कराया जा रहा है. इससे आदिवासी समाज को बाहर रखा गया है. उधर भाजपा सूत्रों का कहना है कि जेडीयू को अंततः समर्थन के लिए मना लिया जाएगा. वे याद दिलाते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाने के विधेयक पर जेडीयू ने राज्य सभा से वॉकआउट किया था. लेकिन तीन तलाक़ और वक़्फ़ जैसे बिलों का समर्थन किया था. 

जेडीयू के साथ नहीं मिला, तब भी कैसे पास हो सकता है बिल

भाजपा सूत्रों के अनुसार बिहार विधानसभा में जेडीयू के समर्थन के बिना भी समान नागरिक संहिता बिल पारित कराने में परेशानी नहीं आएगी. उनके अनुसार जेडीयू अगर राज़ी नहीं होती है और वॉकआउट कर देती है तो यह बिल आसानी से पारित हो जाएगा. इस बिल को पारित कराने के लिए सामान्य बहुमत चाहिए. बिहार विधानसभा की सदस्य संख्या 243 है. बिल पारित कराने के लिए 122 का आंकड़ा चाहिए. अभी भाजपा 88, जेडीयू 85, लोजपा रामविलास 19, हम 5 और आरएलएम के 4 विधायक हैं. इस तरह एनडीए का आंकड़ा 201 है. अगर जेडीयू साथ न दे तो एनडीए की संख्या 116 रह जाती है जो बहुमत से छह कम है. हालांकि हाल ही में हुए राज्य सभा चुनाव में एनडीए का पांचवां उम्मीदवार संख्या बल न होने के बावजूद जीत गया क्योंकि विपक्ष के चार विधायक गैरहाजिर रहे थे. इससे भाजपा को पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम को जिताने में कामयाबी मिल गई थी.

भाजपा को उम्मीद- UCC पर अंत में राजी हो जाएगी जेडीयू

हालांकि भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि बात वहां तक नहीं पहुंचेगी. इससे पहले ही जेडीयू के समर्थन के लिए राज़ी कर लिया जाएगा. उसकी आशंकाओं को दूर किया जाएगा. एक भाजपा नेता के अनुसार बिहार की राजनीति में अब वह दौर नहीं है जब जेडीयू को कुछ मुस्लिम वोट भी मिलते थे. लिहाजा जेडीयू को अपना रुख़ नरम करने में दिक़्क़त नहीं आनी चाहिए. वैसे भी केंद्र में समर्थन के लिए बीजेपी को जेडीयू का साथ चाहिए और वह उसके ऐतराज़ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती.
 

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