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मोदी सरकार के बजट आखिर कैसे बताते हैं विकास, कल्याण और सुधारों की गाथा, जान लें

2022-23 के बजट में पीएम गतिशक्ति योजना के तहत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, डिजिटल रुपया, और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जैसी पहल हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण रहीं.

मोदी सरकार के बजट आखिर कैसे बताते हैं विकास, कल्याण और सुधारों की गाथा, जान लें
मोदी सरकार का बजट हर बार रहा है कुछ खास
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  • मोदी सरकार ने 2014 से 2025 तक के बजटों में आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया
  • शुरुआती वर्षों में कर राहत और डिजिटल इंडिया तथा स्वच्छ भारत अभियान जैसे महत्वाकांक्षी योजनाओं की शुरुआत हुई
  • कृषि और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ बड़े निवेश किए गए
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नई दिल्ली:

मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में बजट को केवल राजस्व और व्यय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा तय करने का साधन बनाया है.2014 से 2025 तक के बजटों में न केवल बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा पर जोर रहा, बल्कि कर सुधार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और भविष्य की तकनीकों को भी प्राथमिकता दी गई.शुरुआती वर्षों में कर राहत और बुनियादी ढांचे पर फोकस दिया गया। ये बजट 2014-2016 के बीच पेश हुए.

मोदी सरकार के पहले बजट (2014-15) में आम जनता को राहत देते हुए आयकर छूट सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 लाख की गई. जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹3 लाख तय की गई.निवेश सीमा को भी बढ़ाकर ₹1.5 लाख किया गया। इसी बजट में डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की शुरुआत हुई.2015-16 में सरकार ने सहकारी संघवाद को बढ़ावा देते हुए राज्यों को अधिक कर हिस्सेदारी दी. साथ ही, जन धन योजना, मुद्रा लोन, अटल पेंशन योजना जैसी योजनाओं से वित्तीय समावेशन को गति दी. इसके अलावा कॉर्पोरेट टैक्स घटाने और काले धन पर सख्ती का रोडमैप पेश किया गया.

पूरा एक दशक कृषि और ग्रामीण विकास को समर्पित किया गया

 2016-2019 के बीच कई बड़े सुधार हुए.2016-17 के बजट में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा. सिंचाई, फसल बीमा और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश किए गए.2017-18 में रेलवे बजट को सामान्य बजट में शामिल करने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया. 

ई-नाम, फसल बीमा, और ग्रामीण आवास जैसी योजनाओं को बढ़ावा मिला

2018-19 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत हुई, जो दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बनी.किसानों के लिए एमएसपी को लागत का 1.5 गुना तय किया गया.2019 के अंतरिम बजट में पीएम-किसान योजना लॉन्च हुई, जिसके तहत छोटे किसानों को ₹6,000 सालाना आय सहायता दी गई. साथ ही, ₹5 लाख तक की आय पर कर छूट ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी.$5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का रोडमैप और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर भी पेश हुई. 2019-2021 के बजट में इसका इरादा सामने आया.

2019-20 के बजट में सरकार ने भारत को $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा. राष्ट्रीय इंफ्रा पाइपलाइन, जल जीवन मिशन, और स्टार्टअप्स को बढ़ावा जैसे कदम उठाए गए.2020-21 में आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी गई. ₹100 लाख करोड़ की इंफ्रा योजना, सरलीकृत आयकर व्यवस्था, और LIC IPO जैसे ऐतिहासिक फैसले किए गए.2021-22 में महामारी के बीच स्वास्थ्य बजट को दोगुना कर ₹2.23 लाख करोड़ किया गया और COVID टीकाकरण के लिए ₹35,000 करोड़ का प्रावधान किया गया. साथ ही, PLI स्कीम के जरिए विनिर्माण को बढ़ावा मिला.

अमृत काल और हरित विकास की ओर कदम बढ़ाए गए 

2022-23 के बजट में पीएम गतिशक्ति योजना के तहत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, डिजिटल रुपया, और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जैसी पहल हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण रहीं.2023-24 में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना. ₹10 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय, रेलवे के लिए रिकॉर्ड ₹2.4 लाख करोड़, और नए कर स्लैब में ₹7 लाख तक कर छूट ने सुर्खियां बटोरीं.2024 के अंतरिम बजट में सरकार ने 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर लाने का दावा किया. ₹11.11 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय, रूफटॉप सोलर योजना, और लखपति दीदी जैसी योजनाओं ने सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को गति दी.

2025-26 का वर्ष भविष्य की अर्थव्यवस्था और कर राहत पर केंद्रित रहा

नवीनतम बजट (2025-26) में सरकार ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए ₹12 लाख वार्षिक आय तक कर मुक्त किया. किसानों के लिए पीएम धन-धान्य कृषि योजना, एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी सीमा दोगुनी, और AI, न्यूक्लियर एनर्जी, R&D में बड़े निवेश ने भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा तय की.साथ ही, FDI सीमा बीमा क्षेत्र में 100%, Jan Vishwas 2.0 के तहत कानूनों का सरलीकरण, और फिस्कल डेफिसिट को 4.4% तक लाने का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है.

मोदी सरकार के बजटों ने पिछले दशक में भारत को कल्याणकारी राज्य से विकासशील अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया.डिजिटल इंडिया से लेकर ग्रीन इंडिया तक, किसानों से लेकर स्टार्टअप्स तक, और मध्यम वर्ग से लेकर उद्योग जगत तक, हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई गईं. आने वाले वर्षों में इन बजटों की दिशा भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में निर्णायक साबित हो सकती है.

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