- तमिलनाडु की चार दिन पुरानी तमिलगा वेत्री कषगम सरकार ने विधानसभा में 144 मतों से विश्वास मत जीत लिया.
- मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम के सदस्य विश्वास मत पर मतदान शुरू होने से पहले सदन छोड़कर चले गए.
- मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने कहा कि उनकी सरकार धर्मनिरपेक्ष रहेगी और पिछली जनकल्याण योजनाएं जारी रखेगी.
तमिलनाडु में चार दिन पुरानी, सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने बुधवार को विधानसभा में विश्वास मत जीत लिया. मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के बहिर्गमन और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIDMK) में विभाजन के बीच सरकार के विरोध में 22 और पक्ष में 144 मत डाले गए. राज्य की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 मतों की आवश्यकता थी.
विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 144 मत पड़े
सदन में मतों के विभाजन के दौरान मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 144 मत पड़े, जबकि विरोध में 22 मत पड़े. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एकमात्र विधायक और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक दल पट्टाली मक्कल काची (चार विधायक) मतदान के दौरान तटस्थ रहे. हुमत की कमी के चलते सरकार की स्थिरता पर उठ रहे सवालों के बीच इस जीत ने पहली बार सत्ता में आई टीवीके सरकार को कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास प्रदान किया है.
हालांकि, मुख्यमंत्री विजय सहित मंत्रियों को विभागों का आवंटन अभी किया जाना है. नियमतः, अब अगले छह महीने तक विधानसभा में दोबारा शक्ति परीक्षण नहीं कराया जा सकेगा. विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके), वामपंथी दलों, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) और एस.पी. वेलुमणि एवं सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के बागी गुट के समर्थन से यह विश्वास मत जीता.
सुबह 9:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद सभी दलों के विधायकों ने इस पर अपने विचार रखे. विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने मतों के विभाजन की प्रक्रिया के बाद घोषणा की कि मुख्यमंत्री द्वारा सदन का विश्वास हासिल करने के लिए लाया गया प्रस्ताव पारित हो गया है. उन्होंने बताया कि सरकार के पक्ष में कुल 144 मत पड़े, जबकि 22 विधायकों ने इसका विरोध किया और पांच विधायक तटस्थ रहे.
DMK ने किया विरोध
सदन में 59 विधायकों वाली मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सदस्यों ने विश्वास मत संबंधी प्रस्ताव पर मतदान शुरू होने से पहले ही सदन से बाहर चले गए. राजग के घटक दल टीटीवी दिनकरण के नेतृत्व वाली अम्माल मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) से निष्कासित विधायक एस. कामराज उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने सरकार के पक्ष में मतदान किया.
सरकार हमेशा धर्मनिरपेक्ष रहेगी : CM विजय
विश्वास मत के प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा धर्मनिरपेक्ष रहेगी और पिछली सरकारों द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार 'घोड़े जैसी रफ्तार' (हॉर्स-स्पीड) से काम करती है, लेकिन वह विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रैडिंग) में शामिल नहीं होती. यह शक्ति परीक्षण राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर के निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने विजय को 13 मई या उससे पहले बहुमत साबित करने को कहा था.
सत्तारूढ़ टीवीके की कुल सदस्य संख्या 107 है, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं और उन्होंने मतदान नहीं किया. इसके अलावा, उच्च न्यायालय के एक आदेश के चलते तिरुपत्तूर से टीवीके विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सके. सेतुपति की जीत को उनके प्रतिद्वंद्वी द्रमुक उम्मीदवार ने अदालत में चुनौती दी है, जो 23 अप्रैल के चुनाव में केवल एक मत से हार गए थे.
टीवीके को किस-किस पार्टी से मिला समर्थन?
टीवीके ने पहले ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया था. इसके अलावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा), विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी पिछले सप्ताह सरकार को बाहर से समर्थन देने की घोषणा की थी.
एआईएडीएमके विधायक सीवी शनमुगम ने क्या कहा?
एआईएडीएमके विधायक सीवी शनमुगम ने कहा कि चुनाव से पहले ही पार्टी में यह मांग उठ रही है कि पार्टी छोड़ने वाले या निष्कासित किए गए सभी नेताओं को वापस पार्टी में शामिल किया जाए, ताकि पार्टी मजबूत हो सके और चुनाव जीत सके. लेकिन उनके मन में ऐसा कोई विचार नहीं है.
ईपीएस की टिप्पणी पर उन्होंने कहा, "मैंने विश्वासघात नहीं किया है. हमारी पार्टी का मूल सिद्धांत डीएमके का सफाया करना है. पिछले 50 वर्षों से हम डीएमके के खिलाफ लड़ रहे हैं. लेकिन एआईएडीएमके के महासचिव के रूप में, चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बनने के लालच में वे नीच बन गए और एआईएडीएमके के मूल सिद्धांतों को भूल गए. अम्मा की मृत्यु डीएमके के झूठे मुकदमे के कारण हुई, उन्हें जेल में डाल दिया गया और हमने उन्हें खो दिया. लेकिन वे सब कुछ भूल गए. आप बता सकते हैं कि विश्वासघाती कौन है.
वहीं, वरिष्ठ नेता वेलुमणि और षणमुगम के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के लगभग 30 विधायकों के एक धड़े ने भी सरकार का समर्थन किया. दूसरी ओर, अन्नाद्रमुक प्रमुख पलानीसामी के प्रति निष्ठा रखने वाले विधायकों ने पहले ही सरकार के खिलाफ मतदान करने का निर्णय लिया था और चेतावनी दी थी कि पार्टी के आदेश (व्हिप) का उल्लंघन करने वाले विधायकों पर दलबदल विरोधी कानून लागू होगा.
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